दीपक पूनिया ने एशियन गेम्स 2026 में 97 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती में जीता ब्रॉन्ज मेडल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय पहलवान दीपक पूनिया ने 3 अक्टूबर 2026 को नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के मेंस फ्रीस्टाइल 97 किग्रा कुश्ती इवेंट में मंगोलिया के गनखुयाग गनबातार को 2-1 से पराजित कर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। यह जीत एक कड़े और कम स्कोर वाले मुकाबले में आई, जिसमें दीपक ने अनुशासित और संयमित कुश्ती का प्रदर्शन किया।
मुकाबले का घटनाक्रम
ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में दीपक पूनिया ने पहले दौर में दो अंक हासिल कर बढ़त बनाई। दूसरे दौर में गनबातार ने एक अंक वापस लिया, लेकिन दीपक ने मज़बूत बचाव के साथ अपनी बढ़त बरकरार रखते हुए 2-1 की जीत दर्ज की और पोडियम पर जगह पक्की की।
इससे पहले दीपक ने अपने अभियान की शुरुआत चीन के झोउ जुनपेंग को 12-2 के बड़े अंतर से हराकर की। क्वार्टरफाइनल में हांगकांग के ली वुई फंग विंसेंट के मुकाबले में न उतरने के कारण दीपक सीधे सेमीफाइनल में पहुँच गए।
सेमीफाइनल में हार, फिर शानदार वापसी
सेमीफाइनल में दीपक का सामना उज्बेकिस्तान के शेरजोड पोयोनोव से हुआ। भारतीय पहलवान ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंततः 8-9 के करीबी अंतर से मुकाबला हार गए और ब्रॉन्ज मेडल प्लेऑफ में उतरे। वहाँ उन्होंने गनबातार को हराकर पोडियम पर वापसी की।
ऐतिहासिक संदर्भ
दीपक का यह ब्रॉन्ज मेडल एशियन गेम्स के इतिहास में पुरुषों की फ्रीस्टाइल 97 किग्रा वर्ग में किसी भारतीय पहलवान द्वारा जीता गया पाँचवाँ पदक है। इस वर्ग में भारत का पहला पदक मारुति माने ने 1962 एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल के रूप में जीता था। उसी संस्करण में गणपत अंदलकर ने सिल्वर मेडल हासिल किया था, जबकि विश्वनाथ सिंह ने 1966 में सिल्वर और भीम सिंह ने 1966 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
गौरतलब है कि दीपक पूनिया इससे पहले एशियन गेम्स 2023 में पुरुषों की 86 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। इस बार भार वर्ग बदलकर 97 किग्रा में उतरना और पदक हासिल करना उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है।
भारतीय कुश्ती पर असर
दीपक के इस पदक ने नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती के पदक खाते में इज़ाफा किया है। यह जीत भारतीय कुश्ती संघ और देश के कुश्ती प्रशंसकों के लिए उत्साहजनक संकेत है, विशेष रूप से उस दौर में जब भारतीय पहलवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मज़बूत करने में जुटे हैं।
आगे क्या
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय कुश्ती दल का अभियान जारी है और आने वाले दिनों में अन्य वर्गों में भी पदक की उम्मीदें बनी हुई हैं। दीपक पूनिया के इस प्रदर्शन से युवा पहलवानों को प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।