दीपक पूनिया: झज्जर के अखाड़े से कॉमनवेल्थ गोल्ड तक, जूनियर वर्ल्ड चैंपियन की प्रेरक यात्रा
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के झज्जर जिले के छोटे से कस्बे छारा में जन्मे पहलवान दीपक पूनिया ने कुश्ती की दुनिया में वह मुकाम हासिल किया, जो किसी भी भारतीय युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। 19 मई 1999 को जन्मे दीपक ने जूनियर स्तर से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 तक के सफर में भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है।
पहलवानी का संस्कार और पारिवारिक विरासत
दीपक पूनिया का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ कुश्ती की जड़ें गहरी थीं। उनके पिता सुभाष पूनिया स्वयं एक अनुभवी पहलवान रह चुके थे और यही उनके पहले गुरु भी बने। महज 5 वर्ष की आयु में पिता ने दीपक को अखाड़े में दाखिला दिलाया। दूध के शौकीन और जन्मजात ताकत से भरपूर इस बालक ने स्थानीय दंगलों में कई बार नकद पुरस्कार जीते और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
छत्रसाल स्टेडियम और मैट पर संघर्ष
स्कूल स्तरीय प्रतियोगिताओं के दौरान छत्रसाल स्टेडियम के एक कोच की नज़र दीपक की असाधारण प्रतिभा पर पड़ी। मिट्टी के अखाड़े में पले-बढ़े दीपक के लिए सिंथेटिक मैट पर दाँव-पेंच आज़माना शुरुआत में कठिन था, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया। कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने जल्द ही इस अंतर को पाट दिया।
जूनियर करियर में स्वर्णिम उपलब्धियाँ
2016 में दीपक ने जूनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और उसी वर्ष वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप में भी गोल्ड अपने नाम किया। 2018 में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में एक बार फिर स्वर्ण जीता और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2018 में रजत पदक हासिल किया। 2019 में दीपक ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया — वे 2001 के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय पहलवान बने।
टोक्यो ओलंपिक और पेरिस की राह में बाधाएँ
टोक्यो ओलंपिक 2020 में दीपक पुरुष 86 किलोग्राम वर्ग के कांस्य पदक मुकाबले तक पहुँचे, जहाँ सैन मैरिनो के माइल्स अमीन ने उन्हें हराया। अप्रैल 2024 में बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित एशियन ओलंपिक क्वालीफायर में दुबई में भारी बारिश के कारण उड़ान में देरी हुई, जिससे वे समय पर 'वेट-इन' के लिए रिपोर्ट नहीं कर पाए और उन्हें बाहर कर दिया गया। मई 2024 में वर्ल्ड क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के ज़रिए ओलंपिक टिकट पाने का प्रयास भी सफल नहीं रहा।
सीनियर करियर की उपलब्धियाँ और विरासत
2021 और 2022 की एशियन चैंपियनशिप में दीपक ने रजत पदक जीते। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर की सबसे बड़ी सीनियर उपलब्धि हासिल की। कुल मिलाकर एशियन चैंपियनशिप में उनके नाम 3 रजत और 2 कांस्य पदक दर्ज हैं। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाले दीपक पूनिया आज सैकड़ों भारतीय युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं।