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दीपक पूनिया: झज्जर के अखाड़े से कॉमनवेल्थ गोल्ड तक, जूनियर वर्ल्ड चैंपियन की प्रेरक यात्रा

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दीपक पूनिया: झज्जर के अखाड़े से कॉमनवेल्थ गोल्ड तक, जूनियर वर्ल्ड चैंपियन की प्रेरक यात्रा

सारांश

झज्जर के एक छोटे अखाड़े से शुरू हुई दीपक पूनिया की यात्रा जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गोल्ड तक पहुँची। पिता की विरासत, मिट्टी से मैट तक का संघर्ष और 2001 के बाद जूनियर वर्ल्ड खिताब जीतने वाले पहले भारतीय — दीपक की कहानी हर युवा खिलाड़ी के लिए एक पाठ है।

मुख्य बातें

दीपक पूनिया का जन्म 19 मई 1999 को हरियाणा के झज्जर जिले के छारा कस्बे में हुआ।
पिता सुभाष पूनिया स्वयं पहलवान थे; महज 5 वर्ष की आयु में अखाड़े में दाखिला मिला।
2019 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती — 2001 के बाद यह उपलब्धि पाने वाले पहले भारतीय।
टोक्यो ओलंपिक 2020 में 86 किलोग्राम वर्ग के कांस्य पदक मुकाबले तक पहुँचे।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में स्वर्ण पदक जीता; एशियन चैंपियनशिप में 3 रजत और 2 कांस्य पदक।
अप्रैल 2024 में उड़ान देरी के कारण एशियन ओलंपिक क्वालीफायर से बाहर; पेरिस ओलंपिक में भागीदारी नहीं हो सकी।

हरियाणा के झज्जर जिले के छोटे से कस्बे छारा में जन्मे पहलवान दीपक पूनिया ने कुश्ती की दुनिया में वह मुकाम हासिल किया, जो किसी भी भारतीय युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। 19 मई 1999 को जन्मे दीपक ने जूनियर स्तर से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 तक के सफर में भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है।

पहलवानी का संस्कार और पारिवारिक विरासत

दीपक पूनिया का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहाँ कुश्ती की जड़ें गहरी थीं। उनके पिता सुभाष पूनिया स्वयं एक अनुभवी पहलवान रह चुके थे और यही उनके पहले गुरु भी बने। महज 5 वर्ष की आयु में पिता ने दीपक को अखाड़े में दाखिला दिलाया। दूध के शौकीन और जन्मजात ताकत से भरपूर इस बालक ने स्थानीय दंगलों में कई बार नकद पुरस्कार जीते और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

छत्रसाल स्टेडियम और मैट पर संघर्ष

स्कूल स्तरीय प्रतियोगिताओं के दौरान छत्रसाल स्टेडियम के एक कोच की नज़र दीपक की असाधारण प्रतिभा पर पड़ी। मिट्टी के अखाड़े में पले-बढ़े दीपक के लिए सिंथेटिक मैट पर दाँव-पेंच आज़माना शुरुआत में कठिन था, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया। कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने जल्द ही इस अंतर को पाट दिया।

जूनियर करियर में स्वर्णिम उपलब्धियाँ

2016 में दीपक ने जूनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और उसी वर्ष वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप में भी गोल्ड अपने नाम किया। 2018 में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में एक बार फिर स्वर्ण जीता और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2018 में रजत पदक हासिल किया। 2019 में दीपक ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया — वे 2001 के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय पहलवान बने।

टोक्यो ओलंपिक और पेरिस की राह में बाधाएँ

टोक्यो ओलंपिक 2020 में दीपक पुरुष 86 किलोग्राम वर्ग के कांस्य पदक मुकाबले तक पहुँचे, जहाँ सैन मैरिनो के माइल्स अमीन ने उन्हें हराया। अप्रैल 2024 में बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित एशियन ओलंपिक क्वालीफायर में दुबई में भारी बारिश के कारण उड़ान में देरी हुई, जिससे वे समय पर 'वेट-इन' के लिए रिपोर्ट नहीं कर पाए और उन्हें बाहर कर दिया गया। मई 2024 में वर्ल्ड क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के ज़रिए ओलंपिक टिकट पाने का प्रयास भी सफल नहीं रहा।

सीनियर करियर की उपलब्धियाँ और विरासत

2021 और 2022 की एशियन चैंपियनशिप में दीपक ने रजत पदक जीते। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर की सबसे बड़ी सीनियर उपलब्धि हासिल की। कुल मिलाकर एशियन चैंपियनशिप में उनके नाम 3 रजत और 2 कांस्य पदक दर्ज हैं। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाले दीपक पूनिया आज सैकड़ों भारतीय युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह सवाल उठाता है कि क्या भारतीय खेल संस्थाएँ अपने शीर्ष एथलीटों की लॉजिस्टिक और प्रशासनिक ज़िम्मेदारी पर्याप्त रूप से उठा रही हैं। हरियाणा के ग्रामीण अखाड़ों से निकले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की संख्या बताती है कि कच्ची प्रतिभा की कमी नहीं — कमी है तो एक सुदृढ़ सहायता तंत्र की।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपक पूनिया कौन हैं और वे किस खेल से जुड़े हैं?
दीपक पूनिया हरियाणा के झज्जर जिले के छारा कस्बे से आने वाले भारतीय पहलवान हैं, जो फ्रीस्टाइल कुश्ती के 86 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हैं। वे 2019 के जूनियर वर्ल्ड चैंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के स्वर्ण पदक विजेता हैं।
दीपक पूनिया ने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप कब जीती?
दीपक पूनिया ने 2019 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती और इस खिताब को हासिल करने वाले 2001 के बाद पहले भारतीय पहलवान बने। इससे पहले 2016 में जूनियर एशियन और वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीते थे।
टोक्यो ओलंपिक 2020 में दीपक पूनिया का प्रदर्शन कैसा रहा?
टोक्यो ओलंपिक 2020 में दीपक पूनिया पुरुष 86 किलोग्राम वर्ग के कांस्य पदक मुकाबले तक पहुँचे, जहाँ सैन मैरिनो के माइल्स अमीन ने उन्हें हराया। वे पदक से चूक गए, लेकिन ओलंपिक फाइनल्स तक पहुँचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि रही।
दीपक पूनिया पेरिस ओलंपिक 2024 में क्यों नहीं खेल पाए?
अप्रैल 2024 में बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित एशियन ओलंपिक क्वालीफायर में दुबई में भारी बारिश के कारण उनकी उड़ान में देरी हुई और वे समय पर 'वेट-इन' के लिए रिपोर्ट नहीं कर पाए, जिससे उन्हें बाहर कर दिया गया। मई 2024 में वर्ल्ड क्वालीफाइंग टूर्नामेंट के ज़रिए ओलंपिक टिकट पाने का प्रयास भी सफल नहीं रहा।
दीपक पूनिया के करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
दीपक पूनिया के करियर की प्रमुख उपलब्धियों में 2019 जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड, कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 गोल्ड, 2016 जूनियर एशियन और वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप गोल्ड, 2018 एशियन जूनियर चैंपियनशिप गोल्ड और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप सिल्वर शामिल हैं। एशियन चैंपियनशिप में उनके नाम 3 रजत और 2 कांस्य पदक भी दर्ज हैं।
राष्ट्र प्रेस
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