महिला टी20 विश्व कप 2026: इन 5 कमज़ोरियों ने तोड़ा भारत का खिताबी सपना, हरमनप्रीत की कप्तानी पर भी सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला क्रिकेट टीम का महिला टी20 विश्व कप 2026 में खिताब जीतने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया। रविवार, 29 जून को ऑस्ट्रेलिया के हाथों मिली हार के साथ ही हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। पिछले साल वनडे विश्व कप जीतने के बाद इस बार भारत को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन कई मोर्चों पर कमज़ोर प्रदर्शन ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
मध्यक्रम की सुस्त बल्लेबाज़ी
स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की जोड़ी ने कई मैचों में विस्फोटक शुरुआत दी, लेकिन मध्यक्रम की धीमी बल्लेबाज़ी पूरे टूर्नामेंट में भारत की सबसे बड़ी कमज़ोरी बनी रही। जेमिमा रोड्रिग्स ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ निर्णायक मुकाबले में 28 गेंदों में 34 रन बनाए, जो टी20 के मिज़ाज के लिहाज़ से काफी धीमा रहा। बीच के ओवरों में अत्यधिक डॉट गेंदें खेलना भारत को बार-बार भारी पड़ा। स्वयं कप्तान हरमनप्रीत का पूरे टूर्नामेंट में स्ट्राइक रेट महज़ 131 का रहा, जो टी20 क्रिकेट के मानकों पर औसत माना जाता है।
खराब फील्डिंग और छूटे कैच
टूर्नामेंट में भारतीय टीम की फील्डिंग बेहद साधारण रही। खिलाड़ियों ने कई अहम मौकों पर कैच छोड़े, जिससे विपक्षी बल्लेबाज़ों को जीवनदान मिला। लापरवाह फील्डिंग की वजह से अतिरिक्त रन भी गए, जो अंततः मैचों के नतीजों पर असर डालते रहे। इसका सीधा असर गेंदबाज़ों के मनोबल पर भी पड़ा और वे विपक्षी बल्लेबाज़ों पर दबाव बनाने में नाकाम रहीं।
पेस अटैक की बेअसर गेंदबाज़ी
इंग्लैंड की स्विंग-अनुकूल परिस्थितियों में भी भारतीय तेज़ गेंदबाज़ विकेट लेने के लिए संघर्ष करती नज़र आईं। रेणुका सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में केवल 2 विकेट लिए और उनकी इकोनॉमी 8.85 रन प्रति ओवर की रही। क्रांति गौड़ और नंदिनी शर्मा भी अपेक्षाकृत प्रभावहीन रहीं। श्री चरणी ने ज़रूर टूर्नामेंट में 14 विकेट चटकाए, लेकिन उन्हें अन्य तेज़ गेंदबाज़ों का पर्याप्त साथ नहीं मिला।
स्पिनर्स पर अत्यधिक निर्भरता
यह विश्व कप भारत की स्पिन-केंद्रित रणनीति की सीमाओं को भी उजागर कर गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में 19 में से 14 ओवर स्पिन गेंदबाज़ों ने डाले, जबकि परिस्थितियाँ तेज़ गेंदबाज़ों के अनुकूल थीं। टूर्नामेंट में भारत के कुल विकेटों में से 87 प्रतिशत विकेट अकेले स्पिनर्स ने लिए — यह आँकड़ा टीम के असंतुलित गेंदबाज़ी आक्रमण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
हरमनप्रीत की कप्तानी और बल्लेबाज़ी दोनों पर सवाल
कप्तान हरमनप्रीत कौर के लिए यह टूर्नामेंट बल्ले और नेतृत्व दोनों लिहाज़ से निराशाजनक रहा। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ उनकी कप्तानी की रणनीति सवालों के घेरे में रही। 5 मैचों में उन्होंने कुल 141 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 56 रनों की पारी को अलग कर दें, तो शेष 4 पारियों में वह केवल 85 रन ही जुटा सकीं। यह ऐसे समय में आया है जब टीम को बड़े मैचों में कप्तान से निर्णायक योगदान की दरकार थी। आगे भारतीय महिला क्रिकेट के चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के सामने इन कमज़ोरियों को दूर करने की बड़ी चुनौती होगी।