एडमंड लालरिंडिका की हैट्रिक से ईस्ट बंगाल ने 4-1 से मोहन बागान को हराया, 22 साल बाद डूरंड कप जीता
सारांश
मुख्य बातें
ईस्ट बंगाल एफसी ने 23 अगस्त 2026 को कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में खेले गए 135वें डूरंड कप के फाइनल में चिर-प्रतिद्वंद्वी मोहन बागान सुपर जायंट को 4-1 से रौंदकर 22 साल बाद यह प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया। इससे पहले ईस्ट बंगाल ने 2004 में डूरंड कप जीता था। इस ऐतिहासिक जीत के सूत्रधार एडमंड लालरिंडिका रहे, जिन्होंने पहले हाफ में ही शानदार हैट्रिक ठोक दी।
मुख्य घटनाक्रम
मैच की शुरुआत से ही ईस्ट बंगाल ने आक्रामक रुख अपनाया। 10वें मिनट में टीएच बिपिन सिंह ने पहला गोल दागकर स्कोरबोर्ड खोला। इसके ठीक एक मिनट बाद 11वें मिनट में एडमंड लालरिंडिका ने गोल करके बढ़त को 2-0 कर दिया, और फिर 22वें मिनट में अपना दूसरा गोल दागते हुए टीम को 3-0 की मज़बूत बढ़त दिला दी।
मोहन बागान के लिए मनवीर सिंह ने 33वें मिनट में गोल करते हुए उम्मीद जगाने की कोशिश की और स्कोर 3-1 किया। लेकिन हाफ-टाइम से ठीक पहले 44वें मिनट में लालरिंडिका ने अपना तीसरा गोल दागकर हैट्रिक पूरी की और पहले हाफ का अंत 4-1 के स्कोर के साथ हुआ।
दूसरा हाफ: गोलरहित, लेकिन तनावपूर्ण
दूसरे हाफ में कोई गोल नहीं हुआ, लेकिन मैदान पर तनाव और आक्रामकता का माहौल बना रहा। 58वें मिनट में मोहन बागान के टेकचम अभिषेक सिंह और 59वें मिनट में ईस्ट बंगाल के थोउनाओजाम जैक्सन सिंह को येलो कार्ड दिखाए गए। अतिरिक्त समय के 90+5वें मिनट में मोहन बागान के अल्बर्टो रोड्रिगेज मार्टिन को भी येलो कार्ड मिला। पहले हाफ में भी ईस्ट बंगाल के दानी रामिरेज (29वें मिनट) और मोहन बागान के लालेंगमाविया राल्टे (42वें मिनट) को येलो कार्ड दिखाए गए थे। फुल-टाइम की सीटी बजने तक स्कोर 4-1 ही रहा।
ऐतिहासिक बराबरी
इस खिताब के साथ ईस्ट बंगाल ने डूरंड कप जीत की संख्या में मोहन बागान की बराबरी कर ली है। दोनों क्लबों के नाम अब 17-17 डूरंड कप खिताब हैं। यह भारतीय फुटबॉल के सबसे पुराने और भावनात्मक रूप से सबसे तीव्र डर्बी में एक नया अध्याय है।
व्यक्तिगत पुरस्कार
टूर्नामेंट के व्यक्तिगत पुरस्कारों में गोल्डन ग्लव मोहन बागान एसजी के विशाल कैथ को, गोल्डन बूट नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी के अलाएद्दीन अजराई को और गोल्डन बॉल ईस्ट बंगाल एफसी के एडमंड लालरिंडिका को मिला। सभी पुरस्कार विजेताओं को ₹3 लाख का चेक दिया गया, जबकि गोल्डन बॉल विजेता लालरिंडिका को एक एसयूवी की चाबी भी भेंट की गई।
यह जीत ईस्ट बंगाल के लिए महज एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि दो दशकों के इंतज़ार का अंत है — और आने वाले सत्र में क्लब के मनोबल के लिए एक बड़ा संकेत।