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फीफा ने ऑस्ट्रेलियाई वीएआर शॉन इवांस को नस्लभेदी इशारे के आरोप से बरी किया

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फीफा ने ऑस्ट्रेलियाई वीएआर शॉन इवांस को नस्लभेदी इशारे के आरोप से बरी किया

सारांश

फीफा की स्वतंत्र अनुशासनात्मक समिति ने ऑस्ट्रेलियाई वीएआर शॉन इवांस को नस्लभेदी इशारे के आरोप से बरी कर दिया। इवांस ने इशारे को अनजाने में हुई हरकत बताया। यह मामला फुटबॉल में नस्लवाद-विरोधी निगरानी और प्रतीकों की व्याख्या पर बड़ी बहस छेड़ गया है।

मुख्य बातें

फीफा की स्वतंत्र अनुशासनात्मक समिति ने शॉन इवांस को नस्लभेदी इशारे के आरोप से बरी किया।
इवांस को जर्मनी बनाम कुराकाओ मैच से पहले प्रसारण में उल्टा 'ओके' का निशान बनाते देखा गया था।
इवांस ने कहा कि यह इशारा अनजाने में, अवचेतन मन से हुआ और उन्हें उस वक्त इसकी जानकारी नहीं थी।
फीफा को जाँच में अनुशासनात्मक नियमों के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला।
38 वर्षीय इवांस वर्ष 2017 से फीफा की रेफरी सूची में हैं और 2022 कतर विश्व कप में भी रेफरी रह चुके हैं।
उल्टा 'ओके' निशान को वर्ष 2019 में एंटी-डिफेमेशन लीग (ADL) ने नफरत फैलाने वाले प्रतीकों की सूची में रखा था।

फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा ने ऑस्ट्रेलियाई वीडियो असिस्टेंट रेफरी शॉन इवांस को नस्लभेदी इशारा करने के आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है। जर्मनी और कुराकाओ के बीच रविवार को होने वाले मुकाबले से पहले प्रसारण में इवांस को उल्टा 'ओके' का निशान बनाते देखा गया था, जिसे कुछ संदर्भों में 'व्हाइट सुप्रीमेसी' से जोड़ा जाता है। फीफा की स्वतंत्र अनुशासनात्मक समिति ने जाँच के बाद पाया कि अनुशासनात्मक नियमों के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला।

मुख्य घटनाक्रम

मैच से पहले प्रसारण फुटेज में वीडियो रिव्यू टीम के शॉन इवांस को उल्टा 'ओके' का इशारा करते हुए दिखाया गया। यह इशारा मूल रूप से 'सर्कल गेम' नामक मज़ाक और लोकप्रिय सिटकॉम 'मैल्कम इन द मिडल' से प्रचलित हुआ था। हालाँकि, वर्ष 2017 से इसे कट्टर दक्षिणपंथी समूहों द्वारा भी अपनाया जाने लगा, और वर्ष 2019 में अमेरिकी संस्था एंटी-डिफेमेशन लीग (ADL) ने इसे नफरत फैलाने वाले प्रतीकों की सूची में शामिल किया।

इवांस का बयान

इवांस ने स्पष्ट किया कि यह हरकत पूरी तरह अनजाने में हुई। उन्होंने अपने बयान में कहा, "मैंने जानबूझकर कोई हाथ का इशारा या प्रतीक नहीं बनाया जिससे कोई संदेश, जुड़ाव, खेल या किसी तरह की मान्यता जाहिर हो।" उन्होंने आगे कहा, "यह हरकत अनजाने में, अवचेतन मन से हुई थी और मुझे उस समय पता भी नहीं चला कि मैंने ऐसा किया है।"

इवांस ने यह भी जोड़ा, "मैच के दौरान और बाद में ली गई तस्वीरों से पता चला कि मैंने अपनी उंगलियों के बीच पेन पकड़े हुए कई बार यह हरकत दोहराई थी।" उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद जो मीडिया कवरेज हुई वह उनकी वास्तविक पहचान नहीं दर्शाती और उन्हें इस इशारे का अफसोस है।

फीफा की प्रतिक्रिया

फीफा की स्वतंत्र अनुशासनात्मक समिति ने मामले की जाँच पूरी करने के बाद पुष्टि की कि इवांस के बयान पर गौर करने के बाद फीफा के अनुशासनात्मक नियमों के उल्लंघन का "कोई सबूत" नहीं मिला। संस्था ने कहा, "अनुशासनात्मक समिति ने मिस्टर इवांस के बयान पर भी ध्यान दिया है।"

इवांस का अनुभव और करियर

38 वर्षीय शॉन इवांस वर्ष 2017 से फीफा की आधिकारिक रेफरी सूची में हैं। वर्ष 2022 में कतर में आयोजित फीफा विश्व कप में भी उन्हें रेफरी की भूमिका सौंपी गई थी। इवांस ने कहा कि विश्व कप में रेफरी की भूमिका निभाना उनके करियर का सबसे बड़ा सम्मान है और वे टूर्नामेंट के बाकी समय में अपने साथियों का समर्थन करने के लिए तत्पर हैं।

आगे क्या

फीफा के इस फैसले के साथ इवांस पर लगे आरोप औपचारिक रूप से समाप्त हो गए हैं। यह मामला फुटबॉल के मैदान में नस्लवाद-विरोधी निगरानी और प्रसारण फुटेज की व्याख्या को लेकर व्यापक बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। आने वाले मैचों में इवांस की भूमिका पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल का जवाब नहीं देता कि खेल के मैदान में नस्लवाद-विरोधी निगरानी कितनी प्रभावी है। 'अनजाने में हुई हरकत' की दलील स्वीकार करना एक मिसाल बनाता है जिसका दुरुपयोग भविष्य में हो सकता है। ADL जैसी संस्था द्वारा सूचीबद्ध प्रतीक का प्रसारण में दिखना और फिर बिना किसी संस्थागत सुधार के मामले को बंद कर देना, फुटबॉल में नस्लवाद-विरोधी प्रतिबद्धता की गहराई पर सवाल उठाता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फीफा ने शॉन इवांस को क्यों बरी किया?
फीफा की स्वतंत्र अनुशासनात्मक समिति ने जाँच के बाद पाया कि इवांस के बयान पर गौर करने के बाद अनुशासनात्मक नियमों के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला। इवांस ने इशारे को अनजाने में, अवचेतन मन से हुई हरकत बताया था।
शॉन इवांस पर क्या आरोप लगे थे?
जर्मनी और कुराकाओ के बीच मैच से पहले प्रसारण में इवांस को उल्टा 'ओके' का निशान बनाते देखा गया था, जिसे कुछ संदर्भों में 'व्हाइट सुप्रीमेसी' से जोड़ा जाता है। इस पर नस्लभेदी इशारे का आरोप लगाया गया था।
उल्टा 'ओके' का निशान नस्लभेदी क्यों माना जाता है?
यह इशारा मूल रूप से एक मज़ाक के रूप में प्रचलित था, लेकिन वर्ष 2017 से कट्टर दक्षिणपंथी समूहों ने इसे अपना लिया। वर्ष 2019 में एंटी-डिफेमेशन लीग (ADL) ने इसे नफरत फैलाने वाले प्रतीकों की सूची में शामिल किया।
शॉन इवांस कौन हैं और उनका अनुभव क्या है?
शॉन इवांस 38 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई वीडियो असिस्टेंट रेफरी हैं जो वर्ष 2017 से फीफा की आधिकारिक रेफरी सूची में हैं। वे वर्ष 2022 में कतर में आयोजित फीफा विश्व कप में भी रेफरी की भूमिका निभा चुके हैं।
इस फैसले का फुटबॉल में नस्लवाद-विरोधी प्रयासों पर क्या असर होगा?
यह मामला फुटबॉल में नस्लवाद-विरोधी निगरानी और प्रतीकों की व्याख्या को लेकर व्यापक बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। आलोचकों का कहना है कि 'अनजाने में हुई हरकत' की दलील को स्वीकार करना भविष्य में ऐसे मामलों की जाँच को कमज़ोर कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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