गुलमर्ग: भविष्य में वैश्विक शीतकालीन खेल केंद्र बनने की दिशा में डॉ. मनसुख मांडविया की योजना

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गुलमर्ग: भविष्य में वैश्विक शीतकालीन खेल केंद्र बनने की दिशा में डॉ. मनसुख मांडविया की योजना

सारांश

गुलमर्ग को शीतकालीन खेलों का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना के तहत, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। खेलों के साथ पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को जोड़ने का लक्ष्य है।

Key Takeaways

  • गुलमर्ग को शीतकालीन खेलों का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना।
  • 15 दिवसीय एकीकृत खेल आयोजन का आयोजन।
  • 900 से अधिक एथलीटों ने भाग लिया।
  • खेलो इंडिया नीति युवा खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद।
  • पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को खेलों में शामिल करना।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में आयोजित छठे खेलो इंडिया शीतकालीन खेल के दूसरे चरण के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार भविष्य में गुलमर्ग को एक प्रमुख वैश्विक शीतकालीन खेल केंद्र में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि "कश्मीर की भूमि में अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में गुलमर्ग को शीतकालीन खेलों का एक वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य है।"

डॉ. मांडविया ने बताया कि भविष्य में गुलमर्ग में आयोजित होने वाले शीतकालीन खेलों के संस्करणों को पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ मिलाकर 15 दिवसीय एकीकृत खेल आयोजन के रूप में विस्तारित किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "अब शीतकालीन खेल केवल चार दिनों तक सीमित नहीं रहेंगे। पर्यटन को एकीकृत करके, हम 15 दिनों के कार्यक्रम का आयोजन करेंगे जिसमें फिट इंडिया कार्निवल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई प्रतियोगिताएं शामिल होंगी।"

छठे खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के दूसरे चरण में, 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 900 से अधिक एथलीटों ने भाग लिया, जिससे पूरे देश के युवा एक साथ आए।

डॉ. मांडविया ने खेलों की समाज को एकजुट करने, खेल भावना को बढ़ावा देने और समग्र विकास में योगदान देने की शक्ति पर जोर दिया। जम्मू-कश्मीर में खेलो इंडिया केंद्रों में खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के साथ बातचीत का उल्लेख करते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में उभरती खेल भावना और उत्कृष्टता की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कभी 'पत्थरबाज़ी' से जुड़े इस क्षेत्र को अब 'स्कीइंग' के लिए जाना जा रहा है। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, इस केंद्र शासित प्रदेश में खेलों का जोश बढ़ा है, जो प्रगति और विकास की दिशा में निरंतर यात्रा को दर्शाता है।

केंद्रीय खेल मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसमें खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत की आकांक्षा 2036 के ओलंपिक खेलों की मेज़बानी करने और 2047 तक स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शीर्ष पांच खेल राष्ट्रों में अपना स्थान बनाने की है। खेलो इंडिया पहल ने खेलों के अवसरों का विस्तृत विकास किया है, जिससे खिलाड़ियों की निरंतर भागीदारी सुनिश्चित होती है।

अंत में, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि शीतकालीन खेलों की अवसंरचना और प्रशिक्षण प्रणालियों को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) स्थापित किया जाएगा। डॉ. मांडविया ने हाल ही में घोषित खेलो भारत नीति को खिलाड़ियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक खिलाड़ी-केंद्रित नीति बताया।

Point of View

यह खबर खेलों के विकास और क्षेत्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण है। गुलमर्ग को वैश्विक खेल केंद्र बनाने की पहल से न केवल खेल को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी सहायक होगी।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

गुलमर्ग को शीतकालीन खेलों का वैश्विक केंद्र कब बनाया जाएगा?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आने वाले समय में गुलमर्ग को शीतकालीन खेलों का वैश्विक केंद्र बनाने की योजना है।
इस आयोजन में कितने एथलीटों ने भाग लिया?
छठे खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के दूसरे चरण में 900 से अधिक एथलीटों ने भाग लिया।
गुलमर्ग में शीतकालीन खेलों का आयोजन कब होगा?
गुलमर्ग में शीतकालीन खेलों का आयोजन 15 दिवसीय एकीकृत खेल आयोजन के रूप में किया जाएगा।
क्या खेलो इंडिया पहल ने किसी नई नीति की घोषणा की है?
हां, डॉ. मांडविया ने खेलो भारत नीति की घोषणा की है, जो खिलाड़ियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बनाई गई है।
शीतकालीन खेलों में कौन-सी गतिविधियाँ शामिल होंगी?
इन खेलों में फिट इंडिया कार्निवल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई प्रतियोगिताएं शामिल होंगी।
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