आईसीसी ने अफगान महिला शरणार्थी क्रिकेटर्स का डेवलपमेंट प्रोग्राम जारी रखा, 2030 तक क्वालिफिकेशन पाथवे का रोडमैप तैयार होगा
सारांश
मुख्य बातें
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के गवर्निंग बोर्ड ने 13 जुलाई 2026 को अफगान महिला शरणार्थी क्रिकेटर्स के लिए चलाए जा रहे 'डेवलपमेंट पाथवे प्रोग्राम' को आगे जारी रखने की मंजूरी दे दी है। साथ ही, बोर्ड ने स्पेशल टास्क फोर्स का पुनर्गठन करते हुए उसे 2030 तक आईसीसी के क्वालिफिकेशन पाथवे में इन खिलाड़ियों को शामिल कराने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
एडिनबर्ग बैठक में लिए गए अहम फैसले
आईसीसी बोर्ड ने एडिनबर्ग में आयोजित अपनी वार्षिक बैठक के दौरान इंडिपेंडेंट डायरेक्टर डॉ. रोज़ रिवाज और आईसीसी मुख्य कार्यकारी समिति की सदस्य सारा कीन को स्पेशल टास्क फोर्स में शामिल करने की मंजूरी दी। ये दोनों अब बीसीसीआई (BCCI), क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के मौजूदा सदस्यों के साथ मिलकर इस टास्क फोर्स का हिस्सा होंगी।
यह टास्क फोर्स महिला क्रिकेट कार्यक्रम की निगरानी जारी रखते हुए खिलाड़ियों को अधिक अवसर, व्यापक प्रतिनिधित्व और प्रतिस्पर्धा के बेहतर मानकों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में काम करेगी।
डॉ. रोज़ रिवाज का बयान
टास्क फोर्स में नव-नियुक्त डॉ. रोज़ रिवाज ने कहा, 'आईसीसी स्पेशल टास्क फोर्स में शामिल होना और इस अहम पहल में योगदान देना मेरे लिए सम्मान की बात है। टास्क फोर्स को एक साफ और टिकाऊ रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो स्ट्रक्चर्ड कोचिंग, सार्थक प्रतिस्पर्धी मौकों और सही हाई-परफॉर्मेंस पाथवे के जरिए अफगान महिला शरणार्थी क्रिकेटर्स के लगातार विकास में मदद करे।'
उन्होंने आगे कहा कि यह प्रोग्राम क्रिकेट के जरिए मौके पैदा करने की आईसीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वे टास्क फोर्स के साथियों तथा डिलीवरी पार्टनर्स के साथ मिलकर इसे 'मकसद, ईमानदारी और दीर्घकालिक स्थिरता' के साथ आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।
प्रोग्राम में क्या-क्या शामिल है
इस सपोर्ट पैकेज में खिलाड़ियों के घरेलू इलाकों में क्रिकेट और स्ट्रेंथ-एंड-कंडीशनिंग (S&C) कोच के साथ-साथ फिजियोथेरेपी की सुविधा भी शामिल होगी। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा में रहने वाली खिलाड़ियों को उनके स्थानीय क्रिकेट माहौल में जोड़े रखा जाएगा, जहाँ उन्हें ट्रेनिंग और खेलने के नियमित अवसर मिलते रहेंगे।
गौरतलब है कि पिछले 12 महीनों में भारत और इंग्लैंड के दौरों के दौरान इन खिलाड़ियों को एक समूह के रूप में ट्रेनिंग और मुकाबले के अवसर मिले थे। ऐसे सामूहिक मौकों को अब धीरे-धीरे और बढ़ाया जाएगा, और ये मुकाबले उन टीमों के विरुद्ध होंगे जिन्हें 2030 तक आईसीसी क्वालिफिकेशन इवेंट्स की ओर उनके विकास में रणनीतिक रूप से सहायक माना गया है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन के कारण महिला क्रिकेटरों पर खेलने पर प्रतिबंध जारी है, और आईसीसी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की सदस्यता को लेकर लंबे समय से दबाव में है। यह प्रोग्राम उन खिलाड़ियों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है जो शरणार्थी के रूप में विभिन्न देशों में रह रही हैं। 2030 की समयसीमा के साथ तय किया गया यह रोडमैप यह स्पष्ट करता है कि आईसीसी इन खिलाड़ियों को मुख्यधारा की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से जोड़ने की दिशा में दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रहा है।