सौरव गांगुली ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल, 54वें जन्मदिन पर सचिन तेंदुलकर ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को उनके 54वें जन्मदिन, 9 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने प्रतिष्ठित हॉल ऑफ फेम में शामिल किया। गांगुली इस सम्मान को पाने वाले भारत के 12वें क्रिकेटर बन गए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर ने अपने पुराने साथी को हार्दिक बधाई दी।
सचिन का भावुक संदेश
तेंदुलकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, '14 साल की उम्र से एक-दूसरे को जानने के बाद अब ज्यादा सरप्राइज नहीं बचे हैं। यह भी उनमें से एक नहीं था। सौरव गांगुली आपको बधाई हो। ICC हॉल ऑफ फेम में आपके शामिल होने से बेहद खुश हूं।' यह संदेश उनकी दशकों पुरानी दोस्ती और क्रिकेट के प्रति साझा समर्पण को दर्शाता है।
दादा ने जताया आभार
सचिन के इस संदेश के जवाब में गांगुली ने भी एक्स पर लिखा, 'धन्यवाद चैंपियन। आपके साथ एक ही लिस्ट में होना ही सबसे बड़ी कार्य संतुष्टि है।' इससे पहले, बुधवार को गांगुली ने खुद इस सम्मान की जानकारी साझा करते हुए ICC अध्यक्ष जय शाह का धन्यवाद किया था। उन्होंने लिखा था, 'ICC और अध्यक्ष जय शाह को मुझे हॉल ऑफ फेम में शामिल करने के लिए धन्यवाद। यह बहुत बड़ा सम्मान है।'
आधिकारिक घोषणा की तैयारी
रिपोर्टों के अनुसार, ICC अपनी 11 जुलाई को होने वाली वार्षिक बैठक में गांगुली को हॉल ऑफ फेम में शामिल करने की आधिकारिक घोषणा कर सकता है। यह बैठक क्रिकेट कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है, जहाँ वैश्विक क्रिकेट के भविष्य पर भी निर्णय लिए जाते हैं।
भारत के ICC हॉल ऑफ फेमर्स
गांगुली से पहले 11 भारतीय क्रिकेटर यह सम्मान प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें दो महिला खिलाड़ी भी शामिल हैं। इस सूची में बिशन सिंह बेदी (2009), सुनील गावस्कर (2009), कपिल देव (2010), अनिल कुंबले (2015), राहुल द्रविड़ (2018), सचिन तेंदुलकर (2019), वीनू मांकड़ (2021), डायना एडुल्जी (2023), वीरेंद्र सहवाग (2023), नीतू डेविड (2024) और एमएस धोनी (2025) के नाम शामिल हैं।
गांगुली की कप्तानी का स्वर्णिम अध्याय
सौरव गांगुली की गिनती भारत के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में होती है। उनके नेतृत्व में टीम इंडिया ने विदेशी मैदानों पर जीत का हुनर सीखा, जो पहले एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती थी। उनकी कप्तानी में भारत ने नेटवेस्ट ट्रॉफी जीती, 2002 की चैंपियंस ट्रॉफी में संयुक्त विजेता रहे और 2003 के वनडे विश्व कप के फाइनल तक पहुँचे। यह सम्मान उनके उस विरासत की स्वीकृति है जिसने आधुनिक भारतीय क्रिकेट की नींव रखी।