गद्दाफी स्टेडियम से ICC ने हटाया डिमेरिट अंक, पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया वनडे पिच को मिली क्लीन चिट
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के अपील पैनल ने 20 अगस्त को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम पर लगाया गया डिमेरिट अंक रद्द कर दिया। यह अंक 4 जून को पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए तीसरे वनडे की पिच को दी गई 'असंतोषजनक' रेटिंग के कारण लगाया गया था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की अपील पर पैनल ने समीक्षा के बाद यह फैसला सुनाया।
अपील पैनल की समीक्षा प्रक्रिया
पैनल ने मैच के फुटेज, मैच रेफरी की आधिकारिक रिपोर्ट और दोनों टीमों के कप्तानों की टिप्पणियों का विस्तृत अध्ययन किया। समीक्षा में पाया गया कि भले ही मैच रेफरी ने ICC के दिशानिर्देशों का सही ढंग से पालन किया था, तथापि पिच में वे तकनीकी विशेषताएं अनुपस्थित थीं जो 'असंतोषजनक' रेटिंग के लिए अनिवार्य मानी जाती हैं। पैनल ने विशेष रूप से दर्ज किया कि पिच में अत्यधिक असमानता या अत्यधिक स्पिन नहीं थी।
गद्दाफी स्टेडियम का रिकॉर्ड साफ
इस फैसले के बाद गद्दाफी स्टेडियम के आधिकारिक रिकॉर्ड में अब शून्य डिमेरिट अंक दर्ज हैं। यह पाकिस्तान क्रिकेट के लिए राहत की खबर है, क्योंकि ICC की पिच और आउटफील्ड मॉनिटरिंग प्रक्रिया के तहत निर्धारित सीमा से अधिक डिमेरिट अंक जमा होने पर स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय मैचों की मेजबानी से वंचित किया जा सकता है।
कनाडा की दो अपीलें — मिला-जुला फैसला
ICC अपील पैनल ने इसी सत्र में टोरंटो के किंग सिटी स्थित मेपल लीफ क्रिकेट ग्राउंड के संबंध में क्रिकेट कनाडा द्वारा दायर दो अपीलों पर भी विचार किया। पहली अपील 8 जून को संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड के बीच ICC मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग 2 मैच से जुड़ी थी, जिसमें पिच को 'असंतोषजनक' रेटिंग दी गई थी। पैनल ने पाया कि उस मैच की पिच में अत्यधिक असमानता, सीम मूवमेंट या स्पिन नहीं थी, अतः वह डिमेरिट अंक भी हटा दिया गया।
हालांकि, 16 जून को कनाडा-नीदरलैंड मैच के दौरान पिच को 'अनफिट' घोषित किए जाने पर लगाए गए तीन डिमेरिट अंक बरकरार रखे गए। पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि उस मैच में पिच की स्थिति खतरनाक थी और यह 'अनफिट' रेटिंग के मानदंडों के अनुरूप थी।
अंतिम स्थिति
इन निर्णयों के पश्चात गद्दाफी स्टेडियम पर शून्य डिमेरिट अंक हैं, जबकि मेपल लीफ क्रिकेट ग्राउंड के रिकॉर्ड में तीन डिमेरिट अंक दर्ज हैं। ICC की यह प्रक्रिया वैश्विक क्रिकेट में पिच मानकों की निगरानी के लिए अहम मानी जाती है और भविष्य में मेजबानी अधिकारों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।