जमशेदपुर एफसी का ISL से बाहर होना भारतीय फुटबॉल के लिए बड़ा नुकसान: गुरप्रीत सिंह संधू
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने रविवार, 2 अगस्त को जमशेदपुर एफसी के फर्स्ट-टीम कामकाज बंद करने के फैसले पर गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने इसे भारतीय फुटबॉल के लिए 'बड़ा नुकसान' बताते हुए टाटा ग्रुप से इस निर्णय पर पुनर्विचार की अपील की। टाटा ग्रुप की इस फ्रेंचाइजी ने घोषणा की है कि वह अपने मौजूदा डूरंड कप अभियान की समाप्ति के बाद इंडियन सुपर लीग (ISL) से हट जाएगी।
क्लब का ISL सफर और विरासत
जमशेदपुर एफसी ने ISL में अपने नौ सीजन के दौरान एक बार लीग विनर्स शील्ड अपने नाम की। यह खिताब उन्होंने 2021/22 सीजन में तत्कालीन हेड कोच ओवेन कॉयल के नेतृत्व में जीता था। इसके अलावा क्लब केवल एक और बार — 2024/25 सीजन में कोच खालिद जमील की अगुवाई में — ISL प्लेऑफ तक पहुँच सका। अब ISL से हटने के बाद भारतीय फुटबॉल में टाटा ग्रुप की उपस्थिति केवल जमशेदपुर स्थित टाटा फुटबॉल एकेडमी (TFA) के संचालन तक सीमित रह जाएगी।
गुरप्रीत संधू की भावुक अपील
बेंगलुरु एफसी के गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा, 'कुछ क्लब फुटबॉल से कहीं बढ़कर होते हैं। वे स्थिरता, भरोसे और खेल के विकास के प्रति लंबे समय की प्रतिबद्धता का प्रतीक होते हैं। जमशेदपुर एफसी का अपनी फर्स्ट-टीम का कामकाज बंद करने का फैसला न केवल क्लब के लिए, बल्कि पूरे भारतीय फुटबॉल के लिए एक बड़ा नुकसान है।' उन्होंने आगे कहा कि TFA और जमशेदपुर एफसी के ज़रिए टाटा ग्रुप ने भरोसे, निवेश और विकास की एक ऐसी विरासत बनाई है जिसकी जगह आसानी से नहीं ली जा सकती।
संधू ने यह भी कहा, 'ऐसे फैसले कभी आसान नहीं होते और अक्सर व्यावसायिक हकीकत के कारण लिए जाते हैं, लेकिन मुझे उम्मीद है कि अभी भी इस पर फिर से सोचने की गुंजाइश है। भारतीय फुटबॉल को ऐसे संस्थानों की जरूरत है जो इसके भविष्य पर भरोसा बनाए रखें। उम्मीद है कि यह आखिरी अध्याय नहीं है।'
सुनील छेत्री का भी दुख
भारत के दिग्गज फुटबॉलर सुनील छेत्री ने भी इस निर्णय को 'गहरा झटका' करार दिया। उन्होंने कहा, 'भारतीय फुटबॉल में स्टेकहोल्डर बने रहने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। कुछ समय से हालात ऐसे ही रहे हैं, लेकिन जब आस-पास सब कुछ बिखरता हुआ दिखे, तो आप एक-दूसरे का साथ बनाए रखने के लिए परिवार पर भरोसा करते हैं।' छेत्री ने टाटा ग्रुप को भारतीय फुटबॉल का 'मजबूत स्तंभ' बताते हुए कहा कि जमशेदपुर की फर्स्ट टीम का बंद होना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी एक गहरा आघात है।
आगे क्या होगा
फिलहाल जमशेदपुर एफसी का डूरंड कप अभियान जारी है और उसके समाप्त होने के बाद क्लब औपचारिक रूप से ISL से अलग हो जाएगा। क्लब के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के भविष्य को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। यह घटना ऐसे समय में आई है जब भारतीय फुटबॉल पहले से ही निवेश और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की चुनौतियों से जूझ रहा है। गौरतलब है कि टाटा ग्रुप जैसे बड़े कॉर्पोरेट संस्थान का ISL से हटना लीग की वित्तीय स्थिरता और भविष्य की संरचना पर गंभीर सवाल खड़े करता है।