12 अक्टूबर 2026
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जरनैल सिंह: सिर में 6 टांके के साथ मैदान पर उतरे, 1962 एशियन गेम्स में भारत को दिलाया गोल्ड

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जरनैल सिंह: सिर में 6 टांके के साथ मैदान पर उतरे, 1962 एशियन गेम्स में भारत को दिलाया गोल्ड

सारांश

सिर में 6 टांके, असहनीय दर्द — और फिर भी मैदान पर उतरकर गोल दागना। जरनैल सिंह की यह कहानी महज खेल नहीं, एक ऐसे योद्धा की दास्तान है जिसने 1962 एशियन गेम्स में भारत को फुटबॉल का सोना दिलाया और एशियाई ऑल स्टार टीम के इकलौते भारतीय कप्तान बने।

मुख्य बातें

जरनैल सिंह 1950-60 के दशक के भारतीय फुटबॉल के सबसे दमदार स्टॉपर बैक थे, जो पंजाब से थे।
1962 एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में सिर में 6 टांके लगने के बाद भी मैदान पर उतरे और साउथ वियतनाम के खिलाफ गोल दागा।
सेमीफाइनल और साउथ कोरिया के खिलाफ फाइनल में योगदान देकर भारत को गोल्ड मेडल दिलाया।
एशियाई ऑल स्टार टीम में जगह पाने और उसकी कप्तानी करने वाले एकमात्र भारतीय फुटबॉलर रहे।
1965 से 1967 तक भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कप्तान रहे; 1964 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित।
13 अक्टूबर 2000 को कनाडा में अस्थमा के कारण निधन।

भारतीय फुटबॉल के इतिहास में जरनैल सिंह का नाम उन गिने-चुने खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने अपनी पीढ़ी में खेल की परिभाषा बदली। 1950 और 1960 के दशक को भारतीय फुटबॉल का स्वर्णिम युग माना जाता है, और उस युग की रीढ़ थे पंजाब के इस दमदार स्टॉपर बैक ने अपने करियर में देश के लिए जो कुछ हासिल किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है। 1962 एशियन गेम्स में उनका वह प्रदर्शन, जब सिर में 6 टांके लगे होने के बाद भी वे मैदान पर उतरे और गोल दागा, भारतीय खेल इतिहास के सबसे साहसिक क्षणों में से एक है।

कौन थे जरनैल सिंह

पंजाब में जन्मे जरनैल सिंह स्टॉपर बैक की पोज़िशन पर खेलते थे। करीब छह फीट की कद-काठी और मैदान की स्थिति को पढ़ने की असाधारण क्षमता के कारण वे विपक्षी आक्रमण को नाकाम करने में माहिर थे। उनकी आक्रामक शैली और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें उस दौर के सर्वश्रेष्ठ भारतीय फुटबॉलरों में स्थापित किया।

1962 एशियन गेम्स: साहस और गोल्ड की कहानी

1962 एशियन गेम्स में जरनैल ने भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में केंद्रीय भूमिका निभाई। साउथ वियतनाम के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें सिर पर गंभीर चोट आई, जिसके बाद उनके सिर में 6 टांके लगाए गए। इस दर्दनाक स्थिति के बावजूद जरनैल ने मैदान छोड़ने से इनकार कर दिया और टीम के लिए गोल भी दागा।

इसके बाद साउथ कोरिया के खिलाफ फाइनल मुकाबले में भी जरनैल ने अपनी छाप छोड़ी। उनके योगदान से भारत ने गोल्ड मेडल जीता — एक उपलब्धि जो आज भी भारतीय फुटबॉल की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलताओं में गिनी जाती है।

एशियाई ऑल स्टार टीम के कप्तान

जरनैल सिंह एशियाई ऑल स्टार टीम में जगह पाने वाले इकलौते भारतीय फुटबॉलर रहे, और उन्हें इस प्रतिष्ठित टीम का कप्तान भी नियुक्त किया गया। यह सम्मान एशियाई फुटबॉल में उनकी असाधारण स्थिति का प्रमाण था।

वे लंबे समय तक मोहन बागान फुटबॉल क्लब से जुड़े रहे और 1960 के रोम ओलंपिक में भी भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा रहे। 1965 से 1967 तक उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की कप्तानी की, और उनके नेतृत्व में टीम ने यादगार प्रदर्शन किए।

अर्जुन पुरस्कार और विरासत

भारतीय फुटबॉल में असाधारण योगदान के लिए उन्हें 1964 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनकी उत्कृष्टता और राष्ट्रीय खेल में उनकी अमिट भूमिका की सरकारी स्वीकृति था।

13 अक्टूबर 2000 को कनाडा में अस्थमा की बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। वे अपने बेटे से मिलने के लिए कनाडा गए हुए थे। उनके जाने से भारतीय फुटबॉल ने अपना एक सच्चा नायक खो दिया, लेकिन उनकी विरासत आज भी हर उस खिलाड़ी को प्रेरित करती है जो हरे मैदान पर कदम रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जरनैल सिंह कौन थे और भारतीय फुटबॉल में उनका क्या योगदान था?
जरनैल सिंह भारत के महानतम फुटबॉलरों में से एक थे, जो 1950-60 के दशक में स्टॉपर बैक की पोज़िशन पर खेलते थे। उन्होंने 1962 एशियन गेम्स में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया, एशियाई ऑल स्टार टीम की कप्तानी की और 1964 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हुए।
1962 एशियन गेम्स में जरनैल सिंह ने 6 टांकों के साथ कैसे खेला?
साउथ वियतनाम के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में जरनैल सिंह के सिर पर गंभीर चोट लगी और उनके सिर में 6 टांके लगाए गए। दर्द की परवाह किए बिना वे मैदान पर वापस लौटे और भारत के लिए गोल भी दागा, जिसके बाद भारत ने फाइनल में साउथ कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता।
जरनैल सिंह एशियाई ऑल स्टार टीम के कप्तान कैसे बने?
जरनैल सिंह एशियाई ऑल स्टार टीम में चुने जाने वाले एकमात्र भारतीय फुटबॉलर थे। उनके असाधारण प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित टीम का कप्तान भी नियुक्त किया गया, जो एशियाई फुटबॉल में भारत के लिए एक ऐतिहासिक सम्मान था।
जरनैल सिंह का निधन कब और कहाँ हुआ?
जरनैल सिंह का निधन 13 अक्टूबर 2000 को कनाडा में अस्थमा की बीमारी के कारण हुआ। वे उस समय अपने बेटे से मिलने के लिए कनाडा गए हुए थे।
जरनैल सिंह को अर्जुन पुरस्कार कब मिला और वे किस क्लब से जुड़े थे?
जरनैल सिंह को भारतीय फुटबॉल में उत्कृष्ट योगदान के लिए 1964 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे लंबे समय तक मोहन बागान फुटबॉल क्लब से जुड़े रहे और 1960 के रोम ओलंपिक में भी भारतीय टीम का हिस्सा थे।
राष्ट्र प्रेस
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