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गुरबचन सिंह रंधावा: 1962 एशियन गेम्स स्वर्ण पदक विजेता और अर्जुन पुरस्कार पाने वाले पहले ट्रैक एथलीट

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गुरबचन सिंह रंधावा: 1962 एशियन गेम्स स्वर्ण पदक विजेता और अर्जुन पुरस्कार पाने वाले पहले ट्रैक एथलीट

सारांश

गुरबचन सिंह रंधावा ने संसाधनों की कमी के दौर में 1962 एशियन गेम्स में डेकाथलॉन स्वर्ण और 1964 ओलंपिक फाइनल में पाँचवाँ स्थान हासिल कर भारतीय ट्रैक एंड फील्ड को नई पहचान दी। अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित रंधावा आज भी युवा एथलीटों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

मुख्य बातें

गुरबचन सिंह रंधावा का जन्म 6 मई, 1939 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था।
उन्होंने 1962 एशियन गेम्स (जकार्ता) में डेकाथलॉन में स्वर्ण पदक जीता।
1964 टोक्यो ओलंपिक में 110-मीटर हर्डल्स के फाइनल में पाँचवाँ स्थान हासिल किया — किसी भारतीय ट्रैक एथलीट के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक।
1961 में अर्जुन पुरस्कार पाने वाले पहले ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बने; उसी वर्ष इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी।
2005 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
सेवानिवृत्ति के बाद मेंटर और प्रशासक के रूप में भारतीय एथलेटिक्स के विकास में योगदान जारी रखा।

गुरबचन सिंह रंधावा भारतीय ट्रैक एंड फील्ड के उन चुनिंदा एथलीटों में से हैं, जिन्होंने संसाधनों की कमी के बावजूद एशिया के शीर्ष मंच पर तिरंगे की शान बढ़ाई। 1950 और 1960 के दशक में रंधावा देश के सबसे चर्चित एथलीटों में गिने जाते थे और उनके प्रदर्शन ने भारतीय एथलेटिक्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

प्रारंभिक जीवन और एथलेटिक प्रतिभा

गुरबचन सिंह रंधावा का जन्म 6 मई, 1939 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। बचपन से ही उनकी एथलेटिक प्रतिभा स्पष्ट थी और बेहद कम उम्र में वे प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स में सक्रिय हो गए। रंधावा 110-मीटर हर्डल्स, डेकाथलॉन, लंबी कूद और स्प्रिंट इवेंट्स में दक्ष थे। इन स्पर्धाओं में गति, शारीरिक शक्ति और तकनीकी कुशलता के अनूठे संयोजन की दरकार होती है, जो रंधावा में स्वाभाविक रूप से मौजूद था।

1962 एशियन गेम्स: ऐतिहासिक स्वर्ण पदक

इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित 1962 एशियन गेम्स में गुरबचन सिंह रंधावा ने डेकाथलॉन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि ने उन्हें उस समय एशिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों की पंक्ति में खड़ा कर दिया। इसके अतिरिक्त, अपने करियर के दौरान उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स और कई एशियन चैंपियनशिप सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

1964 टोक्यो ओलंपिक: भारतीय एथलेटिक्स का गौरवशाली अध्याय

1964 टोक्यो ओलंपिक रंधावा के करियर का सबसे यादगार पड़ाव रहा। उन्होंने 110-मीटर हर्डल्स में हिस्सा लिया और फाइनल में पाँचवाँ स्थान हासिल किया। यद्यपि पदक नहीं मिला, तथापि ओलंपिक के फाइनल तक पहुँचना और पाँचवें स्थान पर रहना ट्रैक एंड फील्ड में किसी भारतीय एथलीट द्वारा किए गए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में गिना जाता है। गौरतलब है कि यह उस दौर की बात है जब भारतीय एथलीट अत्यंत सीमित संसाधनों के बीच विश्व मंच पर उतरते थे।

राष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार

भारत सरकार ने गुरबचन सिंह रंधावा को 1961 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि 1961 में ही अर्जुन पुरस्कार की शुरुआत हुई थी और उस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में 20 खिलाड़ियों को यह सम्मान दिया गया था। एथलेटिक्स श्रेणी में यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पाने वाले वे पहले ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बने। वर्ष 2005 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी नवाज़ा।

खेल के बाद का योगदान

सक्रिय खेल जीवन से संन्यास के बाद भी रंधावा भारतीय एथलेटिक्स से जुड़े रहे। मेंटर और प्रशासक की भूमिका में उन्होंने देश में ट्रैक एंड फील्ड को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी विरासत आज भी युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, विशेष रूप से उन परिस्थितियों में जब उन्होंने संसाधनों की कमी के बावजूद विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस पीढ़ी के संघर्ष की है जिसने बिना आधुनिक सुविधाओं के विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया। 1964 के ओलंपिक फाइनल में पाँचवाँ स्थान आज भी भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में कम चर्चित उपलब्धियों में से एक है, जबकि यह उस युग में असाधारण था। अर्जुन पुरस्कार के पहले ही वर्ष ट्रैक एंड फील्ड में यह सम्मान मिलना इस बात का प्रमाण है कि रंधावा की प्रतिभा को तत्कालीन प्रशासन ने भी स्वीकार किया था। उनकी विरासत आज इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि भारतीय एथलेटिक्स अभी भी ओलंपिक पदक की उसी प्रतीक्षा में है जिसे रंधावा ने 1964 में लगभग पूरा कर दिखाया था।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरबचन सिंह रंधावा कौन हैं?
गुरबचन सिंह रंधावा भारत के प्रसिद्ध ट्रैक एंड फील्ड एथलीट हैं, जिनका जन्म 6 मई, 1939 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। वे 1962 एशियन गेम्स में डेकाथलॉन स्वर्ण पदक विजेता और अर्जुन पुरस्कार पाने वाले पहले ट्रैक एंड फील्ड एथलीट हैं।
गुरबचन सिंह रंधावा ने 1962 एशियन गेम्स में कौन सा पदक जीता था?
रंधावा ने 1962 में जकार्ता, इंडोनेशिया में आयोजित एशियन गेम्स में डेकाथलॉन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। इस उपलब्धि ने उन्हें उस समय एशिया के शीर्ष एथलीटों में स्थान दिलाया।
1964 टोक्यो ओलंपिक में रंधावा का प्रदर्शन कैसा रहा?
1964 टोक्यो ओलंपिक में गुरबचन सिंह रंधावा ने 110-मीटर हर्डल्स स्पर्धा के फाइनल में पाँचवाँ स्थान हासिल किया। यद्यपि उन्हें पदक नहीं मिला, किंतु यह प्रदर्शन ट्रैक एंड फील्ड में किसी भारतीय एथलीट द्वारा ओलंपिक में किए गए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक माना जाता है।
गुरबचन सिंह रंधावा को कौन-कौन से राष्ट्रीय सम्मान मिले?
भारत सरकार ने रंधावा को 1961 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया — वे एथलेटिक्स श्रेणी में यह सम्मान पाने वाले पहले ट्रैक एंड फील्ड एथलीट थे। इसके अतिरिक्त, 2005 में उन्हें पद्मश्री से भी नवाज़ा गया।
रंधावा ने सेवानिवृत्ति के बाद भारतीय एथलेटिक्स में क्या योगदान दिया?
सक्रिय खेल जीवन से संन्यास के बाद रंधावा मेंटर और प्रशासक के रूप में भारतीय एथलेटिक्स से जुड़े रहे। उन्होंने देश में ट्रैक एंड फील्ड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और युवा एथलीटों को प्रेरित करते रहे।
राष्ट्र प्रेस
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