13 अक्टूबर 2026
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एशियन गेम्स 2026 के कबड्डी गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ियों ने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को सौंपा ज्ञापन, इनामी राशि में कटौती पर जताई नाराज़गी

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एशियन गेम्स 2026 के कबड्डी गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ियों ने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को सौंपा ज्ञापन, इनामी राशि में कटौती पर जताई नाराज़गी

सारांश

एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड जीतकर लौटे कबड्डी खिलाड़ी महाराष्ट्र सरकार की नई पुरस्कार नीति से नाराज़ हैं — पहले ₹75 लाख मिलते थे, अब ₹42 लाख मिल रहे हैं। असलम इनामदार और सोनाली शिंगेट ने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को ज्ञापन सौंपकर संशोधन की माँग की है।

मुख्य बातें

एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय कबड्डी खिलाड़ियों ने महाराष्ट्र सरकार की संशोधित पुरस्कार राशि पर नाराज़गी जताई।
नई नीति के तहत प्रत्येक खिलाड़ी को लगभग ₹42 लाख मिलेंगे, जबकि पिछले एशियाई खेलों में टीम स्पर्धा में ₹75 लाख प्रति खिलाड़ी मिले थे।
17 सितंबर 2026 के नए जीआर के अनुसार 10 से अधिक खिलाड़ियों वाली टीम के लिए कुल ₹5 करोड़ की राशि निर्धारित है।
असलम इनामदार और सोनाली शिंगेट की अगुवाई में खिलाड़ियों ने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को ज्ञापन सौंपा।
खिलाड़ियों ने चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर वे मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।

मुंबई में मंगलवार को एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीम के खिलाड़ियों ने महाराष्ट्र सरकार की संशोधित इनामी राशि नीति के विरोध में उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को औपचारिक ज्ञापन सौंपा। असलम इनामदार और सोनाली शिंगेट की अगुवाई में खिलाड़ियों का कहना है कि 17 सितंबर 2026 को जारी नए सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के तहत उनकी प्रति-खिलाड़ी इनामी राशि पिछले एशियाई खेलों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से घट गई है।

नई नीति में क्या बदला

17 सितंबर 2026 को जारी नए जीआर के अनुसार, 10 से अधिक खिलाड़ियों वाली टीम स्पर्धा के लिए कुल ₹5 करोड़ की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है, जिसे सभी खिलाड़ियों के बीच समान रूप से बाँटा जाएगा। इस गणना के अनुसार प्रत्येक कबड्डी खिलाड़ी को लगभग ₹42 लाख मिलते हैं।

इसके विपरीत, असलम इनामदार के अनुसार पिछले एशियाई खेलों में टीम स्पर्धा में प्रत्येक खिलाड़ी को ₹75 लाख मिले थे, जबकि व्यक्तिगत स्पर्धा के लिए ₹1 करोड़ निर्धारित थे। इस प्रकार नई नीति में प्रति-खिलाड़ी राशि में करीब ₹33 लाख की कमी आई है।

खिलाड़ियों ने क्या कहा

असलम इनामदार ने कहा, 'हमने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। हमने उनसे अनुरोध किया कि एशियाई खेलों के लिए पहले लागू की गई पुरस्कार नीति और वर्तमान नीति में कुछ अंतर हैं, जिन पर विचार किया जाना चाहिए।' उन्होंने अन्य राज्यों की नीतियों का भी हवाला दिया, जहाँ स्वर्ण पदक पर ₹3 करोड़, रजत पदक पर ₹2 करोड़ और कांस्य पदक पर ₹1 करोड़ प्रति खिलाड़ी दिए जाते हैं।

इनामदार ने खिलाड़ियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि का संदर्भ देते हुए कहा, 'ज़्यादातर खिलाड़ी मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। जब कोई खिलाड़ी खेल में अपना करियर बनाता है और भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करता है, तो उसे उम्मीद होती है कि इससे वह आर्थिक रूप से मज़बूत बनेगा और उसे एक अच्छी नौकरी भी मिलेगी।' उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सभी राज्यों में एकसमान खेल नीति लागू हो, तो माता-पिता बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए अधिक प्रोत्साहित करेंगे।

महिला कबड्डी खिलाड़ी सोनाली शिंगेट ने बताया कि पिछले साल विश्व कप में हिस्सा लेने पर पुरानी जीआर के तहत उन्हें ₹2 करोड़ 25 लाख मिले थे, जबकि अब नई नीति के तहत मिलने वाली राशि काफी कम हो गई है। उन्होंने कहा, 'यह खिलाड़ियों के लिए सकारात्मक नहीं, बल्कि नकारात्मक बदलाव है। इससे खिलाड़ी मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं और उनका मनोबल भी गिर सकता है।'

खेल मंत्री की प्रतिक्रिया

इनामदार के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने खिलाड़ियों की बात ध्यान से सुनी और भरोसा दिलाया कि इस मामले पर जल्द ही सकारात्मक नतीजे मिलेंगे। खेल मंत्री की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

आम खिलाड़ियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर नीतिगत प्रयास जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरस्कार राशि में कमी से कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों में युवाओं की रुचि पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जो अभी भी बड़े पैमाने पर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों से खिलाड़ी लाती है।

आगे क्या होगा

सोनाली शिंगेट ने स्पष्ट किया कि यदि खेल मंत्रालय से संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो खिलाड़ी दोबारा बैठक करेंगे और ज़रूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की जाएगी। खिलाड़ियों ने संकेत दिया है कि वे अपनी माँग तब तक जारी रखेंगे जब तक नीति में उचित संशोधन न हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

नीतिगत प्राथमिकता का है — जब खिलाड़ी देश के लिए स्वर्ण जीतकर लौटते हैं और उन्हें पुरस्कार में कटौती मिलती है, तो संदेश उलटा जाता है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र जैसे संपन्न राज्य में टीम स्पर्धा की राशि का ढाँचा इस तरह बनाया गया है जो व्यक्तिगत एथलीट को हतोत्साहित करता है। अन्य राज्यों में प्रति-खिलाड़ी ₹3 करोड़ तक की नीति के मुकाबले ₹42 लाख की राशि कबड्डी को 'दूसरे दर्जे का खेल' मानने जैसी है। असली सवाल यह है कि जीआर में संशोधन कब होगा — और क्या यह केवल कबड्डी तक सीमित रहेगा या अन्य टीम खेलों को भी समान राहत मिलेगी।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन गेम्स 2026 के कबड्डी खिलाड़ी महाराष्ट्र सरकार से क्यों नाराज़ हैं?
खिलाड़ियों का कहना है कि 17 सितंबर 2026 के नए जीआर के तहत उनकी प्रति-खिलाड़ी इनामी राशि ₹75 लाख से घटकर लगभग ₹42 लाख रह गई है। यह पिछले एशियाई खेलों की नीति की तुलना में उल्लेखनीय कमी है।
नई महाराष्ट्र खेल पुरस्कार नीति में क्या बदलाव किया गया है?
17 सितंबर 2026 को जारी नए जीआर के अनुसार 10 से अधिक खिलाड़ियों वाली टीम स्पर्धा के लिए कुल ₹5 करोड़ निर्धारित है, जो सभी खिलाड़ियों में बाँटी जाती है। पहले की नीति में टीम स्पर्धा में प्रत्येक खिलाड़ी को ₹75 लाख और व्यक्तिगत स्पर्धा में ₹1 करोड़ मिलते थे।
खिलाड़ियों ने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार से मुलाकात में क्या माँग की?
असलम इनामदार और सोनाली शिंगेट की अगुवाई में खिलाड़ियों ने माँग की कि वर्तमान और पूर्व नीति के अंतर पर विचार किया जाए और पुरस्कार राशि को अन्य राज्यों के स्तर पर लाया जाए। खेल मंत्री ने सकारात्मक परिणाम का भरोसा दिलाया है।
अन्य राज्यों में एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक पर कितनी पुरस्कार राशि दी जाती है?
असलम इनामदार के अनुसार कई अन्य राज्यों में स्वर्ण पदक पर ₹3 करोड़, रजत पदक पर ₹2 करोड़ और कांस्य पदक पर ₹1 करोड़ प्रति खिलाड़ी निर्धारित है। महाराष्ट्र की वर्तमान नीति में यह राशि इससे काफी कम है।
अगर सकारात्मक जवाब नहीं मिला तो खिलाड़ी क्या करेंगे?
सोनाली शिंगेट ने स्पष्ट किया कि यदि खेल मंत्री से संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो खिलाड़ी दोबारा बैठक करेंगे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे। खिलाड़ियों ने माँग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प जताया है।
राष्ट्र प्रेस
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