एशियन गेम्स 2026 के कबड्डी गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ियों ने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को सौंपा ज्ञापन, इनामी राशि में कटौती पर जताई नाराज़गी
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में मंगलवार को एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीम के खिलाड़ियों ने महाराष्ट्र सरकार की संशोधित इनामी राशि नीति के विरोध में उपमुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को औपचारिक ज्ञापन सौंपा। असलम इनामदार और सोनाली शिंगेट की अगुवाई में खिलाड़ियों का कहना है कि 17 सितंबर 2026 को जारी नए सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के तहत उनकी प्रति-खिलाड़ी इनामी राशि पिछले एशियाई खेलों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से घट गई है।
नई नीति में क्या बदला
17 सितंबर 2026 को जारी नए जीआर के अनुसार, 10 से अधिक खिलाड़ियों वाली टीम स्पर्धा के लिए कुल ₹5 करोड़ की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है, जिसे सभी खिलाड़ियों के बीच समान रूप से बाँटा जाएगा। इस गणना के अनुसार प्रत्येक कबड्डी खिलाड़ी को लगभग ₹42 लाख मिलते हैं।
इसके विपरीत, असलम इनामदार के अनुसार पिछले एशियाई खेलों में टीम स्पर्धा में प्रत्येक खिलाड़ी को ₹75 लाख मिले थे, जबकि व्यक्तिगत स्पर्धा के लिए ₹1 करोड़ निर्धारित थे। इस प्रकार नई नीति में प्रति-खिलाड़ी राशि में करीब ₹33 लाख की कमी आई है।
खिलाड़ियों ने क्या कहा
असलम इनामदार ने कहा, 'हमने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। हमने उनसे अनुरोध किया कि एशियाई खेलों के लिए पहले लागू की गई पुरस्कार नीति और वर्तमान नीति में कुछ अंतर हैं, जिन पर विचार किया जाना चाहिए।' उन्होंने अन्य राज्यों की नीतियों का भी हवाला दिया, जहाँ स्वर्ण पदक पर ₹3 करोड़, रजत पदक पर ₹2 करोड़ और कांस्य पदक पर ₹1 करोड़ प्रति खिलाड़ी दिए जाते हैं।
इनामदार ने खिलाड़ियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि का संदर्भ देते हुए कहा, 'ज़्यादातर खिलाड़ी मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। जब कोई खिलाड़ी खेल में अपना करियर बनाता है और भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करता है, तो उसे उम्मीद होती है कि इससे वह आर्थिक रूप से मज़बूत बनेगा और उसे एक अच्छी नौकरी भी मिलेगी।' उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सभी राज्यों में एकसमान खेल नीति लागू हो, तो माता-पिता बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए अधिक प्रोत्साहित करेंगे।
महिला कबड्डी खिलाड़ी सोनाली शिंगेट ने बताया कि पिछले साल विश्व कप में हिस्सा लेने पर पुरानी जीआर के तहत उन्हें ₹2 करोड़ 25 लाख मिले थे, जबकि अब नई नीति के तहत मिलने वाली राशि काफी कम हो गई है। उन्होंने कहा, 'यह खिलाड़ियों के लिए सकारात्मक नहीं, बल्कि नकारात्मक बदलाव है। इससे खिलाड़ी मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं और उनका मनोबल भी गिर सकता है।'
खेल मंत्री की प्रतिक्रिया
इनामदार के अनुसार, सुनेत्रा पवार ने खिलाड़ियों की बात ध्यान से सुनी और भरोसा दिलाया कि इस मामले पर जल्द ही सकारात्मक नतीजे मिलेंगे। खेल मंत्री की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
आम खिलाड़ियों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर नीतिगत प्रयास जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरस्कार राशि में कमी से कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों में युवाओं की रुचि पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जो अभी भी बड़े पैमाने पर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों से खिलाड़ी लाती है।
आगे क्या होगा
सोनाली शिंगेट ने स्पष्ट किया कि यदि खेल मंत्रालय से संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो खिलाड़ी दोबारा बैठक करेंगे और ज़रूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की जाएगी। खिलाड़ियों ने संकेत दिया है कि वे अपनी माँग तब तक जारी रखेंगे जब तक नीति में उचित संशोधन न हो।