एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट पुष्पा राणा को ₹1 करोड़ का कैश अवार्ड, नौकरी की मांग भी उठाई
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान और एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट पुष्पा राणा को हिमाचल प्रदेश सरकार ने ₹1 करोड़ की सम्मान राशि प्रदान की है। शिमला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर यह राशि पूर्व घोषित ₹33 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ की गई। पुरस्कार स्वीकार करते हुए राणा ने मुख्यमंत्री का आभार जताने के साथ-साथ खिलाड़ियों के लिए नौकरी और वर्ल्ड कप की लंबित पुरस्कार राशि जारी करने की मांग भी रखी।
मुख्य घटनाक्रम
पुष्पा राणा ने कहा कि सरकार की ओर से मिले इस सम्मान के लिए वह पूरी टीम की ओर से आभारी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले घोषित ₹33 लाख की राशि को बढ़ाकर ₹1 करोड़ किया गया है, जो खिलाड़ियों के योगदान की उचित पहचान है। उनके अनुसार, यह निर्णय प्रदेश सरकार की खेल-समर्थक नीति का संकेत देता है।
भारतीय महिला टीम की उपलब्धियाँ
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में ईरान को 37-34 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। यह टीम का लगातार दूसरा एशियन गेम्स खिताब था — इससे पहले हांगझोऊ 2023 में भी भारत ने यह स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इसके अतिरिक्त, भारत ने महिला कबड्डी वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में चीनी ताइपे को 35-28 से हराकर खिताब जीता, जो लगातार दूसरा वर्ल्ड कप था। गौरतलब है कि भारत ने 2012 में पटना में आयोजित पहले संस्करण में भी वर्ल्ड कप खिताब जीता था।
खिलाड़ियों की मांगें
पुष्पा राणा ने इस अवसर पर दो प्रमुख मांगें उठाईं। पहली, वर्ल्ड कप की लंबित पुरस्कार राशि शीघ्र जारी की जाए। दूसरी, खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि इस मुकाम तक पहुँचने के लिए खिलाड़ियों ने 14 से 15 साल की कठोर मेहनत की है। उनके अनुसार, हिमाचल और देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को केवल सम्मान नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की उम्मीद
पुष्पा राणा ने बताया कि नौकरी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुक्खू से कई बार मुलाकात हो चुकी है और उन्हें सकारात्मक आश्वासन मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह सरकार ने कैश अवार्ड की मांग स्वीकार की, उसी तरह नौकरी की मांग पर भी अनुकूल निर्णय होगा। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में खिलाड़ियों की सरकारी नौकरी की माँग और खेल-नीति को लेकर बहस जारी है।