कर्षण घावरी: वेस्टइंडीज के खिलाफ 1978-79 टेस्ट सीरीज में शानदार गेंदबाजी कर टीम इंडिया को दिलाई जीत
सारांश
Key Takeaways
- कर्षण घावरी का जन्म 28 फरवरी 1951 को हुआ।
- उन्होंने 39 टेस्ट मैचों में 109 विकेट लिए।
- 1978-79 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 27 विकेट लेकर अपनी पहचान बनाई।
- घावरी एक सक्षम कोच भी रहे हैं।
- वे आज भी युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देते हैं।
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सौराष्ट्र ने भारतीय क्रिकेट में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें चेतेश्वर पुजारा और रवींद्र जडेजा जैसे महान खिलाड़ी शामिल हैं। ये सभी आधुनिक युग के सितारे हैं। लेकिन अगर हम अतीत की ओर नजर डालें, तो ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने समय में देश की सेवा की है और भारतीय क्रिकेट के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। कर्षण घावरी ऐसा ही एक नाम है।
कर्षण घावरी का जन्म 28 फरवरी 1951 को राजकोट में हुआ। उनका पूरा नाम कर्षण देवजीभाई घावरी है। बाएं हाथ से बल्लेबाजी और गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ी अक्सर खतरनाक माने जाते हैं, और घावरी भी इससे अछूते नहीं थे। वह बाएं हाथ के बल्लेबाज थे और मध्यम गति की तेज गेंदबाजी तथा स्पिन गेंदबाजी में भी माहिर थे।
घावरी ने सौराष्ट्र से घरेलू क्रिकेट में शुरुआत की और बाद में मुंबई के लिए भी खेला। उन्होंने 159 प्रथम श्रेणी मैचों में 452 विकेट और 43 लिस्ट ए मैचों में 47 विकेट अपने नाम किए।
घावरी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ दिसंबर 1994 में टेस्ट मैच से की थी। वह इंग्लैंड के खिलाफ 7 जून 1975 को अपने पहले वनडे में खेले। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर 1981 तक चला और इस दौरान उन्होंने 1975 और 1981 में वनडे विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। लगभग 6 वर्षों के करियर में, उन्होंने भारत के लिए 39 टेस्ट और 19 वनडे खेले। टेस्ट में उनके नाम 109 और वनडे में 15 विकेट हैं। घावरी निचले क्रम के एक उपयोगी बल्लेबाज भी थे, जिन्होंने टेस्ट में 2 अर्धशतक लगाते हुए 913 रन बनाए, जिनमें उनका सर्वोच्च स्कोर 86 रहा।
कर्षण घावरी ने 1978-79 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 6 टेस्ट मैचों की घरेलू टेस्ट श्रृंखला में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और कुल 27 विकेट लिए। इस श्रृंखला में भारत ने 1-0 से जीत हासिल की। 1978 में पाकिस्तान के खिलाफ कपिल देव के डेब्यू के समय, घावरी उनके गेंदबाजी साथी थे।
घावरी ने अपने क्रिकेट करियर के बाद कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। वह 2006 में त्रिपुरा और 2019 में सौराष्ट्र क्रिकेट टीम के हेड कोच बने। 75 वर्ष की आयु में भी, घावरी युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने के लिए सक्रिय हैं।