ईशा सिंह और नीरू ढांडा को खेल मंत्री मांडविया ने किया सम्मानित, ISSF वर्ल्ड कप गोल्ड की उपलब्धि पर मिला प्रोत्साहन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुरुवार, 30 जुलाई को नई दिल्ली में भारत की दो शीर्ष निशानेबाज़ों — ईशा सिंह और नायब सूबेदार नीरू ढांडा — को उनकी ऐतिहासिक आईएसएसएफ वर्ल्ड कप उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। दोनों खिलाड़ियों ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम बुलंद किया है।
किसने क्या हासिल किया
नीरू ढांडा ने इटली के लोनाटो में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में महिला ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया — वे यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला ट्रैप शूटर बन गई हैं। वहीं, ईशा सिंह ने चीन के हांग्जू में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता — यह इस इवेंट में उनका इस वर्ष का दूसरा वर्ल्ड कप स्वर्ण था।
मंत्री का संदेश और सरकारी समर्थन
सम्मान समारोह के दौरान मांडविया ने दोनों निशानेबाज़ों को हर संभव सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, "सरकार पूरी कोशिश कर रही है और यह सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है कि आप हर टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में किसी भी तरह से पीछे न रहें। शूटिंग हमारे सबसे महत्वपूर्ण खेलों में से एक है और एलए ओलंपिक 2028, कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 को देखते हुए हमारे लिए मेडल जीतने वाला एक प्रमुख खेल है। हम बस यही चाहते हैं कि आप लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में भी मेडल जीतें।"
मांडविया ने यह भी रेखांकित किया कि इन खिलाड़ियों की सफलता टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, खेलो इंडिया और वैज्ञानिक कोचिंग सहायता जैसी सरकारी पहलों के दीर्घकालिक निवेश का प्रतिफल है।
नीरू ढांडा का ऐतिहासिक सफर
हरियाणा के जींद की रहने वाली 26 वर्षीय नीरू ने लोनाटो के क्वालिफिकेशन राउंड में 125 में से 121 का स्कोर करके एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। रोमांचक फाइनल में उन्होंने फ्रांस की पूर्व विश्व चैंपियन कैरोल कॉर्मेनियर को पराजित किया। गौरतलब है कि यह जीत एशियन शूटिंग चैंपियनशिप 2025 में उनके स्वर्ण पदक के बाद आई है। नीरू फिलहाल TOPS के डेवलपमेंट ग्रुप का हिस्सा हैं।
ईशा सिंह की निरंतर चमक
21 वर्षीय ईशा सिंह — जो अर्जुन अवार्डी और TOPS के कोर ग्रुप की सदस्य हैं — ने हांग्जू फाइनल में चीन की कड़ी चुनौती को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके करियर में इससे पहले एशियन गेम्स में दो सिल्वर मेडल शामिल हैं। पिछले वर्ष उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में अपना पहला आईएसएसएफ वर्ल्ड कप खिताब जीता था और दोहा विश्व चैंपियनशिप में 25 मीटर पिस्टल में कांस्य पदक जीतकर यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। इसके अलावा, उन्होंने म्यूनिख वर्ल्ड कप में 43 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ 25 मीटर पिस्टल का गोल्ड भी जीता था।
आगे की राह
दोनों खिलाड़ी एशियन गेम्स 2026 की तैयारी में जुटी हैं और उनकी नज़र लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 पर भी टिकी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय निशानेबाज़ी ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार पदक जीतकर खुद को एक विश्वसनीय ओलंपिक पदक स्रोत के रूप में स्थापित किया है।