कोलकाता में मेसी की 64 फुट मूर्ति तेज़ हवा में हिली, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के लेक टाउन इलाके में स्थापित अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनल मेसी की 64 फुट ऊँची मूर्ति इन दिनों गंभीर विवाद के केंद्र में है — स्थानीय निवासियों के अनुसार, तेज़ हवा चलने पर यह मूर्ति हिलती दिखाई देती है, जिससे एक बड़े हादसे की आशंका बन गई है। यह मूर्ति दिसंबर 2024 में मेसी के भारत दौरे के दौरान तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) मंत्री सुजीत बोस की पहल पर लगाई गई थी।
मूर्ति की संरचनात्मक खामियाँ
अधिकारियों द्वारा जाँच किए जाने पर कथित तौर पर पाया गया कि मूर्ति के प्राथमिक फ्रेमवर्क में कई स्क्रू ढीले हो चुके थे और समग्र संरचना पर्याप्त मज़बूत नहीं थी। फिलहाल इसे रस्सियों के सहारे बाँधकर सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। मूर्ति एक व्यस्त चौराहे के निकट स्थापित है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ और गहरी हो गई हैं।
राजनीतिक विवाद
इस मामले ने तेज़ी से राजनीतिक रंग ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन की समाप्ति के बाद इस मुद्दे को पूर्व सरकार की कार्यशैली से जोड़ना शुरू कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि यह मूर्ति दिखावे की राजनीति का प्रतीक है — जहाँ बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो शुरू किए जाते हैं, लेकिन उनकी बुनियादी मज़बूती और दीर्घकालिक रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता।
गौरतलब है कि कुछ लोग इस मूर्ति के हिलने को TMC सरकार के पतन का प्रतीकात्मक संकेत भी बता रहे हैं — हालाँकि यह एक राजनीतिक व्याख्या है, तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं।
नई सरकार की कार्रवाई
राज्य के नए खेल मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने कथित तौर पर कहा है कि मूर्ति के निर्माण से जुड़े लोगों के विरुद्ध उनकी लापरवाही के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मूर्ति को हटाया जाएगा, मज़बूत किया जाएगा या पूरी तरह दोबारा बनाया जाएगा।
मेसी दौरे की अव्यवस्था की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब दिसंबर 2024 में मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान भी अव्यवस्था की खबरें सामने आई थीं। साल्ट लेक स्टेडियम में भारी भीड़ उमड़ी थी, लेकिन खराब प्रबंधन और अत्यधिक वीआईपी संस्कृति के कारण टिकट खरीदने वाले आम प्रशंसक अपने पसंदीदा खिलाड़ी की ठीक से झलक तक नहीं देख पाए। इससे नाराज़ होकर कई लोगों ने तोड़फोड़ की और स्टेडियम में अफरा-तफरी मच गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, उन दर्शकों को राहत देने की भी योजना बनाई जा रही है जिन्होंने टिकट खरीदने के बावजूद निराशा झेली।
आगे क्या होगा
प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जनसुरक्षा के सवालों के बीच यह मामला अभी अनसुलझा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जाने वाली बड़ी संरचनाओं के लिए स्वतंत्र संरचनात्मक ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। अगले कुछ दिनों में प्रशासन के फैसले से यह तय होगा कि यह मूर्ति कोलकाता की फुटबॉल-प्रेमी पहचान का हिस्सा बनी रहेगी या नहीं।