महबूबा मुफ्ती का JKCA पर बड़ा आरोप: राजनीति, भ्रष्टाचार और कश्मीरी पहचान के आधार पर भेदभाव
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने 16 जुलाई 2026 को जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) पर राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार और क्षेत्रीय भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और उसके अध्यक्ष जय शाह से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
एक्स पर क्या लिखा महबूबा ने
महबूबा मुफ्ती ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, 'JKCA में बहुत परेशान करने वाली घटनाएं हो रही हैं। JKCA को राजनीति, भ्रष्टाचार और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर रहना चाहिए।' उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई JKCA को बिना उचित प्रक्रिया के कमज़ोर किया जा रहा है, जो चिंताजनक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि JKCA के अध्यक्ष जावेद खिताबी और स्थानीय क्लबों को कथित तौर पर उनकी कश्मीरी पहचान के कारण निशाना बनाया गया और हटाया गया। अपने पोस्ट में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी टैग किया।
BCCI से हस्तक्षेप की माँग
महबूबा ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'BCCI को इस दखलंदाज़ी को रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि क्रिकेट को जम्मू बनाम कश्मीर का मुद्दा न बनाया जाए। क्रिकेट को तय करने दें कि भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा — पहचान को नहीं।' उन्होंने BCCI और जय शाह से सीधे दखल देने का अनुरोध किया।
यह ऐसे समय में आया है जब JKCA और उसके प्रशासन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। महबूबा के आरोप इस बहस को और तीखा करते हैं।
रणजी ट्रॉफी विजेता टीम पर सवाल
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम ने हाल ही में अपना पहला रणजी ट्रॉफी खिताब जीता था — सेमीफाइनल में बंगाल और फाइनल में कर्नाटक जैसी मज़बूत टीमों को पराजित करके। इस ऐतिहासिक जीत को पूरे देश में सराहा गया था और इसे घरेलू क्रिकेट में एक नई ताकत के उभरने के रूप में देखा गया था।
ऐसे में महबूबा मुफ्ती के आरोप JKCA की प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाते हैं और स्थानीय क्रिकेटरों के लिए निराशाजनक स्थिति पैदा करते हैं।
आगे क्या होगा
अब सबकी नज़रें BCCI पर हैं कि वह इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या कोई जाँच या कार्रवाई की जाती है। JKCA प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह मामला क्रिकेट प्रशासन और राजनीति के बीच की बढ़ती खाई को उजागर करता है।