नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप: सदिया की प्रिशा कचारी के पिता ने CM हिमंता से माँगी आर्थिक मदद
सारांश
मुख्य बातें
सदिया की उभरती बैडमिंटन खिलाड़ी प्रिशा कचारी को नेशनल बैडमिंटन चैंपियनशिप के अंडर-17 वर्ग में अरुणाचल प्रदेश की ओर से प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। असम के सदिया की रहने वाली इस खिलाड़ी के पिता ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से वित्तीय सहायता की अपील की है, ताकि प्रिशा को उचित प्रशिक्षण सुविधाएँ और खेल उपकरण मिल सकें। यह अपील ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में जमीनी स्तर के खेल प्रतिभाओं को आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपनी क्षमता का पूरा प्रदर्शन नहीं कर पाने की चुनौती एक जानी-मानी समस्या बनी हुई है।
पिता की अपील और पृष्ठभूमि
प्रिशा के पिता ने बताया, 'मेरी बेटी नेशनल खेलने जा रही है। पिछली बार नेशनल में उसका प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा था, क्योंकि हम उसे ट्रेनिंग की अच्छी सुविधा और बेहतर खेल उपकरण उपलब्ध नहीं करा सके। हम लोग असम से हैं, लेकिन वह अरुणाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेगी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चयन से सदिया और असम दोनों का नाम रोशन होगा।
प्रिशा के पिता ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से विशेष रूप से मदद माँगी है — उल्लेखनीय है कि सरमा स्वयं बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सदिया के स्थानीय बैडमिंटन एसोसिएशन से भी सहयोग की गुहार लगाई है।
प्रिशा की उपलब्धियाँ
प्रिशा कचारी ने स्थानीय और राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया है। उन्होंने 13वीं दोरजी खांडू मेमोरियल स्टेट बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में अपनी बहन केसया एलाप्रा के साथ अंडर-17 गर्ल्स डबल्स वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। इसी प्रतियोगिता में उन्होंने साथी खिलाड़ी दीवू मिहू के साथ अंडर-17 मिक्स्ड डबल्स वर्ग में कांस्य पदक भी अपने नाम किया।
स्थानीय स्तर पर जीते गए इन खिताबों और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में चयन ने प्रिशा की प्रतिभा को रेखांकित किया है। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत से राष्ट्रीय बैडमिंटन प्रतियोगिताओं के लिए चयन अपने-आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
आर्थिक बाधाएँ और खेल उपकरणों की चुनौती
प्रिशा के पिता ने खेल उपकरणों की महँगी कीमतों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले बैडमिंटन रैकेट, शटलकॉक और खेल परिधान जैसे आवश्यक उपकरण जुटाना आम परिवारों के लिए आसान नहीं होता। यह समस्या केवल प्रिशा की नहीं, बल्कि देशभर में असंख्य प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की है जो संसाधनों की कमी के कारण अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाते।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार और राज्य सरकारें जमीनी स्तर के खेल विकास पर जोर दे रही हैं, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर व्यक्तिगत एथलीटों तक सहायता पहुँचने की गति अभी भी धीमी बनी हुई है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और सदिया बैडमिंटन एसोसिएशन इस अपील पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। यदि समय रहते आर्थिक मदद मिलती है, तो प्रिशा बेहतर तैयारी के साथ नेशनल चैंपियनशिप में उतर सकती हैं। प्रिशा ने खुद भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन का भरोसा दिलाया है और स्थानीय स्तर पर जीते अपने खिताब यह साबित करते हैं कि उनमें राष्ट्रीय स्तर पर चमकने की क्षमता है।