नीतीश रेड्डी ने अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 में 3 विकेट लेकर जीता 'प्लेयर ऑफ द मैच'
सारांश
मुख्य बातें
ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी ने अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए दूसरे टी20 इंटरनेशनल में चोट से वापसी करते हुए 24 रन देकर 3 विकेट चटकाए और 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार अपने नाम किया। उनकी इस शानदार गेंदबाज़ी ने भारत को अफगानिस्तान को 159/8 पर रोकने और फिर 7 विकेट शेष रहते लक्ष्य हासिल करने में अहम भूमिका निभाई।
मुख्य प्रदर्शन
22 वर्षीय नीतीश रेड्डी के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि सीरीज़ के पहले मुकाबले में वे औसत प्रदर्शन ही कर पाए थे। दूसरे मैच में मिली सफलता ने उन्हें वह मनोबल दिया जिसकी उन्हें चोट के बाद मैदान पर वापसी के लिए सख्त ज़रूरत थी। गौरतलब है कि इस प्रदर्शन से ठीक पहले उन्होंने खुलासा किया था कि फिटनेस हासिल करने के लिए उन्होंने बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में कठोर परिश्रम किया था।
नीतीश रेड्डी के अपने शब्द
बुधवार को बीसीसीआई के एक वीडियो में नीतीश ने कहा, 'बहुत अच्छा लग रहा है। चोट से वापसी करने वाले हर खिलाड़ी को आत्मविश्वास की जरूरत होती है। सच कहूं तो, पहला मैच मेरे लिए उतना अच्छा नहीं रहा था, लेकिन दूसरे मैच में अपने प्रदर्शन से बहुत खुश हूं, क्योंकि किसी भी खिलाड़ी को ऐसे आत्मविश्वास की जरूरत होती है और मुझे उम्मीद है कि मैं इस आत्मविश्वास को आगे भी बनाए रखूंगा।'
टीम मैनेजमेंट के समर्थन पर बोलते हुए उन्होंने कहा, 'भारतीय टीम का हिस्सा बनना हमेशा से सम्मान की बात रही है। मैनेजमेंट ने मुझे काफी मौके दिए हैं और मुझ पर बहुत भरोसा जताया है। मुझे लगता है कि एक खिलाड़ी को असल में इसी चीज की जरूरत होती है और मुझे मैनेजमेंट से यही मिल रहा है। मैं इससे काफी खुश हूं।'
मानसिक स्वास्थ्य और चोट से उबरने की चुनौती
नीतीश ने स्वीकार किया कि COE में लंबे समय तक रहना मानसिक रूप से थका देने वाला अनुभव होता है, भले ही वहाँ सभी सुविधाएँ उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि करीबी दोस्तों और परिवार से नियमित बातचीत और कभी-कभी 1-2 दिन के लिए घर जाना उन्हें मानसिक सुकून देता है।
उन्होंने कहा, 'मेरे कुछ बहुत अच्छे दोस्त हैं, मैं उनसे रोज़ बात करता हूं। सीओई में मानसिक रूप से बहुत थकान हो जाती है। मगर मैं कहूंगा कि मैं अपने दोस्तों और परिवार से बात करता हूं और कभी-कभी 1-2 दिन के लिए घर जाकर वापस आ जाता हूं। इससे थोड़ा सुकून मिलता है, लेकिन हाँ, मानसिक सेहत का ध्यान रखना भी ज़रूरी है।'
ऑलराउंडर की ज़िम्मेदारी और सकारात्मक सोच
नीतीश ने माना कि एक ऑलराउंडर होने के नाते उन पर काम का बोझ अपेक्षाकृत अधिक होता है, जिससे चोट का जोखिम भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा, 'चोटें तो लगती ही हैं। शायद इसलिए कि मैं एक ऑलराउंडर हूं, मुझ पर काम का बोझ अधिक होता है। कभी-कभी, जब चोट लगती है, तो बुरा लगता है और मैं कहूंगा कि यह सब सोच पर निर्भर करता है। ऐसे समय में आपको बहुत मज़बूत रहना होता है। बस मानसिक रूप से सकारात्मक रहें और अच्छा काम करते रहें, भगवान सही समय पर आपको फल देंगे।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय टीम युवा ऑलराउंडरों पर निर्भरता बढ़ा रही है और नीतीश का यह प्रदर्शन उनकी टीम में अपनी जगह और मज़बूत करने का संकेत देता है।