नीतीश रेड्डी का दूसरे टी20 में 3 विकेट, बोले — 'चोट के बाद आत्मविश्वास सबसे ज़रूरी'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी ने अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 इंटरनेशनल में शानदार वापसी करते हुए 24 रन देकर 3 विकेट लिए और 'प्लेयर ऑफ द मैच' का खिताब अपने नाम किया। चोट से उबरने के बाद मैदान पर लौटे 22 वर्षीय इस खिलाड़ी के इस प्रदर्शन ने भारत को अफगानिस्तान को 159/8 पर रोकने और फिर 7 विकेट शेष रहते लक्ष्य हासिल करने में अहम भूमिका निभाई।
मैच में नीतीश का प्रदर्शन
सीरीज के पहले मैच में औसत प्रदर्शन के बाद नीतीश रेड्डी ने दूसरे मुकाबले में पूरी तरह से अपनी छाप छोड़ी। उनकी गेंदबाज़ी ने अफगान बल्लेबाज़ों पर लगाम कसी और भारत को आरामदायक जीत दिलाने में निर्णायक योगदान दिया। यह प्रदर्शन तब आया जब नीतीश ने हाल ही में खुलासा किया था कि फिटनेस हासिल करने के लिए उन्होंने बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) में कड़ी मेहनत की थी।
आत्मविश्वास की ज़रूरत — नीतीश की बात
बुधवार, 16 सितंबर 2026 को बीसीसीआई के एक वीडियो में नीतीश ने कहा, 'बहुत अच्छा लग रहा है। चोट से वापसी करने वाले हर खिलाड़ी को आत्मविश्वास की ज़रूरत होती है। सच कहूँ तो, पहला मैच मेरे लिए उतना अच्छा नहीं रहा था, लेकिन दूसरे मैच में अपने प्रदर्शन से बहुत खुश हूँ, क्योंकि किसी भी खिलाड़ी को ऐसे आत्मविश्वास की ज़रूरत होती है और मुझे उम्मीद है कि मैं इस आत्मविश्वास को आगे भी बनाए रखूँगा।'
नीतीश ने यह भी कहा कि भारतीय टीम मैनेजमेंट के विश्वास और समर्थन ने उन्हें टीम में अपनी जगह की चिंता किए बिना खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की। उनके शब्दों में, 'मैनेजमेंट ने मुझे काफी मौके दिए हैं और मुझ पर बहुत भरोसा जताया है। मुझे लगता है कि एक खिलाड़ी को असल में इसी चीज़ की ज़रूरत होती है।'
मानसिक स्वास्थ्य और चोट से उबरने की चुनौती
नीतीश ने स्वीकार किया कि COE में लंबे समय तक रहना मानसिक रूप से थका देने वाला होता है, भले ही वहाँ विश्वस्तरीय सुविधाएँ और ट्रेनिंग उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि करीबी दोस्तों और परिवार से रोज़ बातचीत तथा कभी-कभी 1-2 दिन के लिए घर जाना उन्हें मानसिक सुकून देता है।
उन्होंने कहा, 'सीओई में मानसिक रूप से बहुत थकान हो जाती है। मैं अपने दोस्तों और परिवार से बात करता हूँ और कभी-कभी 1-2 दिन के लिए घर जाकर वापस आ जाता हूँ। इससे थोड़ा सुकून मिलता है, लेकिन हाँ, मानसिक सेहत का ध्यान रखना भी ज़रूरी है।'
ऑलराउंडर की भूमिका और चोटों का दबाव
एक ऑलराउंडर होने के नाते नीतीश पर गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी दोनों का काम का बोझ रहता है, जिससे चोटों का जोखिम भी अधिक होता है। उन्होंने इसे स्वीकार करते हुए कहा, 'चोटें तो लगती ही हैं। शायद इसलिए कि मैं एक ऑलराउंडर हूँ, मुझ पर काम का बोझ अधिक होता है।'
नीतीश का मानना है कि ऐसे कठिन दौर में मानसिक मज़बूती और सकारात्मकता ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने कहा, 'ऐसे समय में आपको बहुत मज़बूत रहना होता है। किसी भी नकारात्मक बात या नकारात्मक लोगों को उस समय आप पर हावी नहीं होने देना चाहिए। बस मानसिक रूप से सकारात्मक रहें और अच्छा काम करते रहें।'
आगे क्या
इस प्रदर्शन के बाद नीतीश रेड्डी की टीम में स्थिति और मज़बूत हुई है। सीरीज के आगामी मैचों में उनसे बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी दोनों में अहम भूमिका की उम्मीद होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे इस लय को बनाए रख पाते हैं।