परवीन हुड्डा का एशियन गेम्स 2026 गोल्ड: 22 महीने के बैन के बाद ऐतिहासिक वापसी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बॉक्सर परवीन हुड्डा ने शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2026 को निशियो में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के महिला 65 किग्रा वर्ग के फाइनल में चीनी ताइपे की निएन-चिन चे को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह उनके करियर का पहला एशियन गेम्स गोल्ड है और वर्तमान प्रतियोगिता में भारत के लिए महिला बॉक्सिंग का दूसरा स्वर्ण पदक है।
मुश्किल वापसी का सफर
परवीन हुड्डा को 2023 में 'वेयरअबाउट्स क्लॉज' के उल्लंघन के कारण 22 महीने का प्रतिबंध झेलना पड़ा था। इस बैन की वजह से उन्हें एशियन गेम्स 2022 का अपना ब्रॉन्ज मेडल भी लौटाना पड़ा, जिसने उनके करियर को बड़ा झटका दिया। सस्पेंशन समाप्त होने के बाद उन्होंने वापसी की, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो में महिला 65 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में हार के साथ निराशा हाथ लगी और वह मेडल की दौड़ से बाहर हो गईं।
मानसिक मजबूती बनी सबसे बड़ा हथियार
जीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए 26 वर्षीय परवीन ने कहा, 'जब मेरे साथ वह सब हुआ, तो मैं मानसिक रूप से टूट गई थी। सब कुछ खत्म हो गया था। मुझे जीरो से शुरुआत करनी पड़ी। मैंने खुद से कहा कि अगर मैंने अभी ट्रेनिंग नहीं की और वापसी नहीं की, तो मुझे जिंदगी भर पछतावा होगा। एक छोटी सी गलती की वजह से इतना कुछ हो गया। इसलिए मैंने सब कुछ अलग नजरिए से देखने का फैसला किया।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय खेल जगत में मानसिक स्वास्थ्य और लचीलेपन को लेकर बातचीत तेज हो रही है।
ग्लासगो की हार ने सिखाया सबक
परवीन ने ग्लासगो की हार के दर्दनाक पलों को भी साझा किया। उन्होंने कहा, 'मैं वहां खड़ी होकर रो रही थी। मैंने सोचा, अब रोने का क्या फायदा? वरना, मैं अगली प्रतियोगिता में फिर रोऊंगी। इसलिए अगले दिन, मैं उठी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की। मैंने सोचा कि मैं अगली प्रतियोगिता में हंसते हुए आऊंगी।' गौरतलब है कि यह दृष्टिकोण ही शुक्रवार के कड़े फाइनल में उनके काम आया।
फाइनल का रोमांचक मुकाबला
फाइनल मुकाबले में परवीन ने पहले राउंड में 5-0 से दबदबा बनाया, लेकिन दूसरे राउंड में चे ने उसी स्कोर से बराबरी कर ली। तीसरे और निर्णायक राउंड में परवीन ने 3-2 से जीत दर्ज कर गोल्ड अपने नाम किया। उन्होंने बताया, 'तीसरे राउंड में मुझे एक फैसला लेना था। मुझे बस इतना याद आया कि मुझे डिप्टी डायरेक्टर बनना है। हरियाणा में अगर मैं गोल्ड जीतती हूं, तो मुझे डिप्टी डायरेक्टर का पद मिलेगा। यह मेरा ड्रीम जॉब था।'
गीता का संदेश और आगे की राह
परवीन ने अपनी मानसिक तैयारी का श्रेय गीता के कर्म-दर्शन को भी दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने नतीजे के बारे में सोचा, जैसा कि गीता में कहा गया है: कर्म करो; नतीजे की चिंता मत करो। मैंने सोचा कि मैं पूरे दिल से ट्रेनिंग करूंगी, अपना बेस्ट दूंगी।' अपने करियर के इस दौर को 'दूसरी यात्रा' बताते हुए परवीन ने कहा कि मुश्किल अनुभवों ने उन्हें पहले से कहीं अधिक मजबूत और परिपक्व बनाया है। आने वाले टूर्नामेंट में उनसे इसी मजबूत मानसिकता के साथ मैदान में उतरने की उम्मीद है।