2 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

परवीन हुड्डा का एशियन गेम्स 2026 गोल्ड: 22 महीने के बैन के बाद ऐतिहासिक वापसी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
परवीन हुड्डा का एशियन गेम्स 2026 गोल्ड: 22 महीने के बैन के बाद ऐतिहासिक वापसी

सारांश

22 महीने का बैन, एशियन गेम्स 2022 का ब्रॉन्ज छिनना, ग्लासगो में क्वार्टर फाइनल में हार — और फिर जीरो से वापसी। परवीन हुड्डा की यह कहानी सिर्फ एक गोल्ड मेडल की नहीं, बल्कि टूटकर फिर खड़े होने की है। एशियन गेम्स 2026 में उनकी जीत भारतीय खेल जगत की सबसे प्रेरणादायक वापसियों में से एक है।

मुख्य बातें

परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 के महिला 65 किग्रा फाइनल में चीनी ताइपे की निएन-चिन चे को हराकर गोल्ड मेडल जीता।
यह 2023 में 'वेयरअबाउट्स क्लॉज' उल्लंघन के कारण मिले 22 महीने के बैन के बाद उनकी ऐतिहासिक वापसी है।
बैन के चलते परवीन को एशियन गेम्स 2022 का ब्रॉन्ज मेडल भी लौटाना पड़ा था।
फाइनल में पहला राउंड 5-0 से जीता, दूसरा 5-0 से हारा और तीसरा 3-2 से अपने नाम कर गोल्ड हासिल किया।
यह वर्तमान एशियन गेम्स में भारत के लिए महिला बॉक्सिंग का दूसरा गोल्ड मेडल है।
हरियाणा सरकार की नीति के अनुसार गोल्ड जीतने पर परवीन को डिप्टी डायरेक्टर का पद मिलेगा।

भारतीय बॉक्सर परवीन हुड्डा ने शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2026 को निशियो में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के महिला 65 किग्रा वर्ग के फाइनल में चीनी ताइपे की निएन-चिन चे को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह उनके करियर का पहला एशियन गेम्स गोल्ड है और वर्तमान प्रतियोगिता में भारत के लिए महिला बॉक्सिंग का दूसरा स्वर्ण पदक है।

मुश्किल वापसी का सफर

परवीन हुड्डा को 2023 में 'वेयरअबाउट्स क्लॉज' के उल्लंघन के कारण 22 महीने का प्रतिबंध झेलना पड़ा था। इस बैन की वजह से उन्हें एशियन गेम्स 2022 का अपना ब्रॉन्ज मेडल भी लौटाना पड़ा, जिसने उनके करियर को बड़ा झटका दिया। सस्पेंशन समाप्त होने के बाद उन्होंने वापसी की, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो में महिला 65 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में हार के साथ निराशा हाथ लगी और वह मेडल की दौड़ से बाहर हो गईं।

मानसिक मजबूती बनी सबसे बड़ा हथियार

जीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए 26 वर्षीय परवीन ने कहा, 'जब मेरे साथ वह सब हुआ, तो मैं मानसिक रूप से टूट गई थी। सब कुछ खत्म हो गया था। मुझे जीरो से शुरुआत करनी पड़ी। मैंने खुद से कहा कि अगर मैंने अभी ट्रेनिंग नहीं की और वापसी नहीं की, तो मुझे जिंदगी भर पछतावा होगा। एक छोटी सी गलती की वजह से इतना कुछ हो गया। इसलिए मैंने सब कुछ अलग नजरिए से देखने का फैसला किया।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय खेल जगत में मानसिक स्वास्थ्य और लचीलेपन को लेकर बातचीत तेज हो रही है।

ग्लासगो की हार ने सिखाया सबक

परवीन ने ग्लासगो की हार के दर्दनाक पलों को भी साझा किया। उन्होंने कहा, 'मैं वहां खड़ी होकर रो रही थी। मैंने सोचा, अब रोने का क्या फायदा? वरना, मैं अगली प्रतियोगिता में फिर रोऊंगी। इसलिए अगले दिन, मैं उठी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की। मैंने सोचा कि मैं अगली प्रतियोगिता में हंसते हुए आऊंगी।' गौरतलब है कि यह दृष्टिकोण ही शुक्रवार के कड़े फाइनल में उनके काम आया।

फाइनल का रोमांचक मुकाबला

फाइनल मुकाबले में परवीन ने पहले राउंड में 5-0 से दबदबा बनाया, लेकिन दूसरे राउंड में चे ने उसी स्कोर से बराबरी कर ली। तीसरे और निर्णायक राउंड में परवीन ने 3-2 से जीत दर्ज कर गोल्ड अपने नाम किया। उन्होंने बताया, 'तीसरे राउंड में मुझे एक फैसला लेना था। मुझे बस इतना याद आया कि मुझे डिप्टी डायरेक्टर बनना है। हरियाणा में अगर मैं गोल्ड जीतती हूं, तो मुझे डिप्टी डायरेक्टर का पद मिलेगा। यह मेरा ड्रीम जॉब था।'

गीता का संदेश और आगे की राह

परवीन ने अपनी मानसिक तैयारी का श्रेय गीता के कर्म-दर्शन को भी दिया। उन्होंने कहा, 'मैंने नतीजे के बारे में सोचा, जैसा कि गीता में कहा गया है: कर्म करो; नतीजे की चिंता मत करो। मैंने सोचा कि मैं पूरे दिल से ट्रेनिंग करूंगी, अपना बेस्ट दूंगी।' अपने करियर के इस दौर को 'दूसरी यात्रा' बताते हुए परवीन ने कहा कि मुश्किल अनुभवों ने उन्हें पहले से कहीं अधिक मजबूत और परिपक्व बनाया है। आने वाले टूर्नामेंट में उनसे इसी मजबूत मानसिकता के साथ मैदान में उतरने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय खेल प्रशासन के लिए एक आईना भी है — 'वेयरअबाउट्स क्लॉज' जैसी तकनीकी चूकों पर दो साल का प्रतिबंध और पहले से जीते पदक की वापसी, क्या यह दंड अनुपातहीन नहीं था? परवीन की ताकत इस व्यवस्था से लड़ने में नहीं, बल्कि उसे स्वीकार कर जीरो से शुरुआत करने में रही — यही उनकी सबसे बड़ी जीत है। साथ ही, हरियाणा की खेल नीति की यह बात सामने आई कि एक बॉक्सर को तीसरे राउंड में 'डिप्टी डायरेक्टर की नौकरी' याद आई — यह एक कड़वा-मीठा सच है कि भारत में खिलाड़ी आज भी जीवन-सुरक्षा के लिए सरकारी नौकरी पर निर्भर हैं।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में कौन सा मेडल जीता?
परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में महिला 65 किग्रा बॉक्सिंग वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में चीनी ताइपे की निएन-चिन चे को हराया।
परवीन हुड्डा पर बैन क्यों लगाया गया था?
परवीन हुड्डा पर 2023 में 'वेयरअबाउट्स क्लॉज' के उल्लंघन के कारण 22 महीने का प्रतिबंध लगाया गया था। इस बैन के कारण उन्हें एशियन गेम्स 2022 का ब्रॉन्ज मेडल भी लौटाना पड़ा था।
एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में परवीन हुड्डा ने कैसे जीत हासिल की?
परवीन ने पहला राउंड 5-0 से जीता, दूसरा राउंड 5-0 से गंवाया और निर्णायक तीसरे राउंड में 3-2 से जीतकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने बताया कि तीसरे राउंड में हरियाणा सरकार के डिप्टी डायरेक्टर पद की प्रेरणा ने उन्हें जीत दिलाई।
परवीन हुड्डा को गोल्ड जीतने पर हरियाणा में क्या मिलेगा?
परवीन हुड्डा के अनुसार, हरियाणा सरकार की खेल नीति के तहत एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने पर उन्हें डिप्टी डायरेक्टर का पद मिलेगा, जो उनका सपना था।
परवीन हुड्डा की मानसिक तैयारी का रहस्य क्या है?
परवीन ने गीता के 'कर्म करो, फल की चिंता मत करो' के दर्शन को अपनाया। उन्होंने नतीजों की चिंता छोड़कर पूरे मन से ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे वह मानसिक रूप से तटस्थ रह सकीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 5 दिन पहले
  6. 6 दिन पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले