पुर्तगाल जीतेगा FIFA वर्ल्ड कप 2026 — पॉल मेसफील्ड का दांव, रोनाल्डो के लिए आखिरी मौका
सारांश
मुख्य बातें
इंग्लैंड के पूर्व फुटबॉलर और कमेंटेटर पॉल मेसफील्ड ने 18 जून 2026 को एक विशेष बातचीत में दावा किया कि फीफा विश्व कप 2026 का खिताब पुर्तगाल जीतेगा — और इसके पीछे उनका तर्क है कि जिस तरह अर्जेंटीना की टीम लियोनेल मेसी के लिए एकजुट हुई थी, उसी तरह पुर्तगाल की टीम क्रिस्टियानो रोनाल्डो के लिए एकजुट हो सकती है। जी5 पर फीफा वर्ल्ड कप 2026 मीडिया पैनल के विशेषज्ञ के रूप में मेसफील्ड ने वीएआर विवाद, 48 टीमों के नए फॉर्मेट और 'क्लब बनाम देश' बहस पर भी खुलकर राय रखी।
रोनाल्डो के लिए आखिरी मौका — टीम एकजुट हो सकती है
मेसफील्ड ने कहा, 'मैं हर खिलाड़ी और हर टीम को देखता हूं — ग्रुप्स को भी, सब कुछ। हो सकता है कि कुछ लोगों को हैरानी हो, लेकिन मुझे लगता है कि पुर्तगाल जीतेगा।' उन्होंने 2022 कतर विश्व कप में अर्जेंटीना की जीत का हवाला देते हुए कहा कि टीम ने मेसी के लिए वह किया जो वह खुद नहीं कर सकते थे — और यही पुर्तगाल रोनाल्डो के लिए कर सकती है।
मेसफील्ड ने स्पष्ट किया, 'यह निश्चित रूप से रोनाल्डो के लिए आखिरी मौका है। मेसी अभी भी एक और कप के लिए यहां हैं — यह उनके लिए भी आखिरी मौका है। मुझे लगता है कि पुर्तगाल की टीम रोनाल्डो के साथ एकजुट होकर टूर्नामेंट में बहुत आगे तक जा सकती है।'
इंग्लैंड के लिए नरम उम्मीद, पुर्तगाल-फ्रांस असली दावेदार
इंग्लैंड ने अपना इकलौता विश्व कप खिताब 1966 में जीता था। मेसफील्ड ने माना कि कोच थॉमस ट्यूशेल ने टीम की मानसिकता बदली है — उन्होंने कुछ खास हुनर वाले खिलाड़ियों के बजाय एक पूरी टीम तैयार की है — लेकिन खिताब जीतने की उम्मीद पर वे सतर्क रहे।
उन्होंने कहा, 'मुझे व्यक्तिगत रूप से नहीं लगता कि यह इंग्लैंड का समय है। जाहिर है, मैं चाहूंगा कि वे टूर्नामेंट के आखिरी चरणों तक पहुंचें, लेकिन मेरे हिसाब से पुर्तगाल और फ्रांस जैसी टीमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।'
वीएआर विवाद: तकनीक सहायक, लेकिन रेफरी की भूमिका अहम
इस विश्व कप में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मेसफील्ड का मानना है कि इस टूर्नामेंट में वीएआर का उपयोग दुनिया की अन्य लीगों की तुलना में कम हुआ है।
उन्होंने कहा, 'अब तक इस वर्ल्ड कप में कोई बहुत बड़ा वीएआर फैसला नहीं आया — ऐसा कोई मामला नहीं जिसमें दो-तीन मिनट खेल रुका हो, जैसा प्रीमियर लीग में हर हफ्ते होता है। तकनीक कुछ हद तक मदद कर रही है, लेकिन रेफरी का अपना फैसला भी अहम होना चाहिए। मैं चाहता हूं कि रेफरी खुद थोड़े और मजबूत बनें और अपने फैसलों पर अडिग रहें।'
48 टीमों का फॉर्मेट: मल्टी-नेशन मॉडल ही भविष्य
इस विश्व कप में रिकॉर्ड 48 टीमें भाग ले रही हैं। मेसफील्ड ने इस विस्तार का समर्थन किया और कहा कि फीफा दुनियाभर से अधिक प्रतिभा को शामिल करने की कोशिश कर रहा है — खासकर अफ्रीका और एशिया को अधिक प्रतिनिधित्व देकर।
उन्होंने केप वर्डे और कुराकाओ के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि केप वर्डे का हालिया प्रदर्शन 2002 में सेनेगल द्वारा फ्रांस को हराने के बाद के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक था। उन्होंने कहा, 'वर्ल्ड कप यही तो करता है — यह पूरी दुनिया को एक साथ लाता है।'
क्लब बनाम देश: यूरोप पर ही असर, बाकी महाद्वीप सुरक्षित
बड़े फॉर्मेट से खिलाड़ियों पर बढ़ते बोझ के सवाल पर मेसफील्ड ने कहा कि एशिया, अफ्रीका, उत्तर और दक्षिण अमेरिका पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा — असर केवल यूरोप पर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि यूरोप इस समस्या के समाधान के लिए छोटी टीमों हेतु एक प्री-क्वालिफाइंग प्रतियोगिता शुरू करने पर विचार कर रहा है, जिससे खिलाड़ियों पर मैचों का बोझ कम होगा। मेसफील्ड ने इसे फीफा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जिसमें सभी को शामिल करने का लक्ष्य है।