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मेजर ध्यानचंद को PM मोदी की श्रद्धांजलि: 'खेलो इंडिया संवाद' में 100 साल के भारत-न्यूजीलैंड खेल संबंधों को किया याद

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मेजर ध्यानचंद को PM मोदी की श्रद्धांजलि: 'खेलो इंडिया संवाद' में 100 साल के भारत-न्यूजीलैंड खेल संबंधों को किया याद

सारांश

'खेलो इंडिया संवाद' में PM मोदी ने मेजर ध्यानचंद को याद करते हुए 100 साल पुराने भारत-न्यूजीलैंड हॉकी रिश्ते को रेखांकित किया। उनका संदेश साफ था — खेल सिर्फ पदक नहीं, विकसित भारत की नींव है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 27 अगस्त 2026 को 'खेलो इंडिया संवाद' में मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि दी।
लगभग 100 साल पहले हुए न्यूजीलैंड हॉकी दौरे में ध्यानचंद की भूमिका को किया गया याद; इस दौरे को भारत-न्यूजीलैंड खेल संबंधों की नींव बताया।
मोदी ने हाल की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान भी ध्यानचंद को याद करने का उल्लेख किया।
खेल को पदक से परे — व्यक्तित्व, परिवार, समाज और देश की प्रतिष्ठा से जोड़ा।
हर जिले में प्रतिभाओं की पहचान और उन खेलों के विकास पर जोर जिनमें भारत का अब तक ओलंपिक में प्रतिनिधित्व नहीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'खेलो इंडिया संवाद' कार्यक्रम के दौरान भारतीय हॉकी के महानायक मेजर ध्यानचंद को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने लगभग एक सदी पहले हुए न्यूजीलैंड के भारतीय हॉकी दौरे में ध्यानचंद की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया।

100 साल पुराने खेल संबंधों की नींव

मोदी ने कार्यक्रम में कहा, "सौ साल पहले, भारत की हॉकी टीम ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था। ध्यानचंद उस दौरे का हिस्से थे। वह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों के 100 साल पूरे होने की नींव बना।" उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान उन्होंने वहाँ भी मेजर ध्यानचंद को याद किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत इन द्विपक्षीय खेल संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में प्रतिबद्ध है।

खेल का व्यापक महत्व — पदक से परे

मोदी ने खेल को महज पदक जीतने तक सीमित न मानने की बात कही। उनके शब्दों में, "यह भारत की खेल शक्ति और युवा शक्ति को एक साथ लाकर एक विकसित भारत बनाने की कोशिश है।" उन्होंने अपना चिर-परिचित संदेश दोहराया — "जो खेलेंगे वे आगे बढ़ेंगे" — और इसे व्यक्तित्व निर्माण, परिवार की प्रतिष्ठा, समाज और देश की पहचान से जोड़ा।

खिलाड़ी की सफलता से बदलती है क्षेत्र की पहचान

प्रधानमंत्री ने कहा, "जब कोई खिलाड़ी सफल होता है, तो वह सफलता सिर्फ उसकी नहीं होती। उसकी सफलता से उसके परिवार की पहचान बनती है, उसके स्कूल-कॉलेज की प्रतिष्ठा बढ़ती है, और उसके जिले व राज्य की पहचान मजबूत होती है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के हर जिले में विश्व के खेल मानचित्र पर चमकने की क्षमता मौजूद है।

जमीनी प्रतिभाओं की पहचान और ओलंपिक में नए खेलों का लक्ष्य

अपने संबोधन में मोदी ने हर जिले में खेल प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें जमीनी स्तर से शीर्ष स्तर तक समुचित सहयोग देने की बात कही। उन्होंने उन खेलों के विकास पर भी बल दिया जिनमें भारत का अब तक ओलंपिक में प्रतिनिधित्व नहीं हो सका है। यह संकेत देता है कि सरकार की खेल नीति केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नए क्षेत्रों में भी भारत की उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश होगी।

राष्ट्रीय खेल दिवस का संदर्भ

राष्ट्रीय खेल दिवस प्रतिवर्ष 29 अगस्त को मेजर ध्यानचंद की जयंती पर मनाया जाता है। 'खेलो इंडिया संवाद' इस अवसर पर आयोजित एक संवादात्मक मंच है, जहाँ प्रधानमंत्री खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रशासकों से सीधे संवाद करते हैं। इस वर्ष का आयोजन ध्यानचंद के उस ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरे की शताब्दी के साथ विशेष रूप से प्रासंगिक रहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि जमीनी खेल ढाँचे में निवेश कितना हो रहा है। भारत ओलंपिक पदक तालिका में अभी भी अपनी जनसंख्या के अनुपात में बहुत पीछे है — यह अंतर नीतिगत घोषणाओं से नहीं, बल्कि जिला-स्तरीय बुनियादी ढाँचे और कोचिंग इकोसिस्टम में दीर्घकालिक निवेश से पाटा जा सकता है। ओलंपिक में नए खेलों में प्रतिनिधित्व का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर इसके लिए चाहिए ठोस रोडमैप — न कि केवल संवाद।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'खेलो इंडिया संवाद' कार्यक्रम क्या है?
'खेलो इंडिया संवाद' एक संवादात्मक मंच है जहाँ प्रधानमंत्री खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रशासकों से सीधे संवाद करते हैं। यह आमतौर पर राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाता है।
PM मोदी ने मेजर ध्यानचंद को क्यों याद किया?
मोदी ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मेजर ध्यानचंद को याद किया, जो प्रतिवर्ष 29 अगस्त को उनकी जयंती पर मनाया जाता है। उन्होंने करीब 100 साल पहले हुए न्यूजीलैंड हॉकी दौरे में ध्यानचंद की भूमिका को भारत-न्यूजीलैंड खेल संबंधों की नींव बताया।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हॉकी संबंध कितने पुराने हैं?
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, लगभग 100 साल पहले भारत की हॉकी टीम ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था, जिसमें मेजर ध्यानचंद भी शामिल थे। उस दौरे को दोनों देशों के बीच खेल संबंधों की शताब्दी-पुरानी नींव माना जाता है।
मोदी ने खेल और विकसित भारत को कैसे जोड़ा?
मोदी ने कहा कि खेल का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि खेल शक्ति और युवा शक्ति को मिलाकर विकसित भारत बनाना है। उनके अनुसार, एक खिलाड़ी की सफलता उसके परिवार, जिले, राज्य और देश की पहचान को मजबूत करती है।
सरकार ओलंपिक में नए खेलों को कैसे बढ़ावा देगी?
मोदी ने उन खेलों के विकास पर जोर दिया जिनमें भारत का अब तक ओलंपिक में प्रतिनिधित्व नहीं हो सका है। उन्होंने हर जिले में प्रतिभाओं की पहचान और जमीनी से शीर्ष स्तर तक सहयोग देने की बात कही, हालाँकि विस्तृत रोडमैप अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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