जदुमणि सिंह को PM मोदी की शाबाशी: कारगिल दिवस पर पाकिस्तानी मुक्केबाज को 5-0 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 10 अगस्त 2026 को अपने आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के भारतीय पदक विजेताओं से मुलाकात की और मुक्केबाज जदुमणि सिंह की विशेष रूप से प्रशंसा की, जिन्होंने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी को 5-0 से हराकर यह जीत देश के वीर जवानों को समर्पित की थी।
मुलाकात में क्या हुआ
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान पूछा कि कारगिल दिवस पर किसकी विजय हुई थी। इस पर जदुमणि ने बताया कि उस दिन उनकी भिड़ंत एक पाकिस्तानी मुक्केबाज से थी और चूँकि वे स्वयं भारतीय सेना से हैं, इसलिए हर हाल में पाकिस्तान को हराना उनका संकल्प था। उन्होंने बताया कि वे इस संकल्प में सफल रहे और पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी को 5-0 के स्पष्ट अंतर से पराजित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने जदुमणि से कहा, 'आप स्वयं सेना से हैं, तो मैं ज़रूर मानता हूँ कि आपने जो देश के वीर जवानों के प्रति यह भाव प्रकट किया कि मैं यह जीत या मेडल कारगिल के विजेताओं को समर्पित करता हूँ, उसने उस विजय पर चार चाँद लगा दिए। आपने उसको ही पराजित किया, जिसको करना था।'
जदुमणि का प्रदर्शन
भारतीय मुक्केबाज जदुमणि सिंह ने 55 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता। हालाँकि, फाइनल में उन्हें ऑस्ट्रेलिया के जे डिक्सन के हाथों हार का सामना करना पड़ा और वे गोल्ड से चूक गए। इसके बावजूद, कारगिल विजय दिवस पर पाकिस्तानी मुक्केबाज पर उनकी जीत ने इस पदक को भावनात्मक रूप से और भी खास बना दिया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन
स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज समेत कुल 39 मेडल जीते और चौथे स्थान पर रहा। यह उल्लेखनीय है कि इस बार शूटिंग, बैडमिंटन, हॉकी और रेसलिंग जैसे परंपरागत रूप से मज़बूत खेल टूर्नामेंट में शामिल नहीं थे, फिर भी भारत का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा।
मुक्केबाजी में भारत ने कुल 10 मेडल जीते, जिनमें 7 गोल्ड शामिल रहे। इसके अलावा, भारत ने पहली बार जूडो में 2 गोल्ड मेडल जीते। एथलीट गुलवीर एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में 2 मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
आगे क्या
यह मुलाकात न केवल खिलाड़ियों के मनोबल को ऊँचा करती है, बल्कि सेना और खेल के बीच के गहरे जुड़ाव को भी रेखांकित करती है। गौरतलब है कि जदुमणि सिंह जैसे सैनिक-खिलाड़ी भारत की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ खेल का मैदान और सेवा का संकल्प एकसाथ चलते हैं। आने वाले समय में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन 2028 ओलंपिक की तैयारी के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करेगा।