आईपीएल डेब्यू में ऐतिहासिक कारनामा: प्रफुल्ल हिंगे बोले — 'शांत रहना ही था मेरा मंत्र'
सारांश
Key Takeaways
- प्रफुल्ल हिंगे आईपीएल डेब्यू मैच के पहले ओवर में 3 विकेट लेने वाले आईपीएल इतिहास के पहले गेंदबाज बने।
- हिंगे ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल, प्रीटोरियस और रियान पराग को आउट किया।
- नागपुर के इस युवा गेंदबाज ने 13 वर्ष की आयु में लेदर बॉल क्रिकेट से अपना सफर शुरू किया था।
- एमआरएफ पेस फाउंडेशन (चेन्नई) और ग्लेन मैकग्राथ की कोचिंग ने उनकी गेंदबाजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया।
- 2016 से हिंगे ने अंडर-16, अंडर-19 और वीसीए के लिए खेलते हुए घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई।
- हिंगे की सफलता का मंत्र भीड़ के दबाव को नजरअंदाज करना और गेंदबाजी योजना पर केंद्रित रहना रहा।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सनराइजर्स हैदराबाद के युवा तेज गेंदबाज प्रफुल्ल हिंगे ने अपने आईपीएल डेब्यू में ऐसा कारनामा कर दिखाया जो आईपीएल इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में हिंगे मैच के पहले ओवर में ही 3 विकेट लेने वाले आईपीएल के पहले गेंदबाज बन गए। हिंगे ने कहा कि उनकी सफलता का राज यही था कि वह मैदान पर पूरी तरह शांत रहे और सिर्फ अपनी गेंदबाजी योजना पर केंद्रित रहे।
पहले ओवर में तीन विकेट — आईपीएल का नया इतिहास
नागपुर के इस होनहार तेज गेंदबाज ने जियोस्टार प्रेस रूम में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि डेब्यू मुकाबले में उनका पूरा ध्यान गेंदबाजी की योजना को अमल में लाने पर था। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही भीड़ के शोर को अपने दिमाग से निकालने का मन बना लिया था और जितना संभव हो उतना शांत रहने की कोशिश की। प्रैक्टिस सेशन में उन्होंने दबाव में गेंदबाजी का अभ्यास किया था इसलिए मैच में वही दोहराना था।
वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल, लुआन-ड्रे प्रीटोरियस और रियान पराग जैसे अनुभवी बल्लेबाजों को आउट करते हुए हिंगे ने स्वीकार किया कि उन्हें उस वक्त इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि वह इतिहास रच रहे हैं। उनके अनुसार विकेट लेना या न लेना उनके हाथ में नहीं था, उन्हें बस अच्छी गेंदबाजी करनी थी और टीम को जिताने में मदद करनी थी। क्रिकेट में अगर आप सही जगह गेंद डालते रहें तो विकेट खुद-ब-खुद मिलते हैं।
13 साल की उम्र से शुरू हुआ सफर
हिंगे ने अपने क्रिकेट के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने 13 वर्ष की आयु में पहली बार लेदर बॉल क्रिकेट खेला। इससे पहले वह केवल टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे। उन्होंने अपने पिताजी से क्लब में खेलने की जिद की और अंततः उन्हें मौका मिला।
हिंगे ने बताया कि उन्हें घरेलू क्रिकेट की संरचना का तब कोई ज्ञान नहीं था लेकिन एक बात पूरी तरह स्पष्ट थी कि उन्हें भारत के लिए उस नीली जर्सी के लिए खेलना है। यह जज्बा ही उनकी असली ताकत बना। 2016 में उन्होंने अंडर-16, अंडर-19 और वीसीए (विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन) के लिए विभिन्न आयु वर्गों में प्रतिनिधित्व किया।
घरेलू क्रिकेट से आईपीएल तक का उत्थान
हिंगे ने बताया कि पिछले सत्र में उन्हें पुडुचेरी के खिलाफ घरेलू क्रिकेट में डेब्यू का अवसर मिला जहां उन्होंने 4 विकेट लिए। इसके बाद 2026 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में डेब्यू करते हुए उन्होंने लगभग चार ओवर में 23 रन देकर एक विकेट हासिल किया। हर मंच पर प्रदर्शन में निरंतरता ने उन्हें आईपीएल तक पहुंचाया।
हिंगे के अनुसार यह सब कड़ी मेहनत का नतीजा है और वह बस वही कर रहे हैं जो उन्हें करना है। उनकी यह सादगी और जमीन से जुड़ा रवैया उन्हें भीड़ से अलग करता है।
एमआरएफ पेस फाउंडेशन और दिग्गजों की भूमिका
चेन्नई स्थित एमआरएफ पेस फाउंडेशन में प्रशिक्षण और ऑस्ट्रेलिया दौरे ने हिंगे की गेंदबाजी को नई धार दी। वहां उन्हें दुनियाभर के तेज गेंदबाजों के साथ सीखने का मौका मिला जिससे उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा। सनराइजर्स हैदराबाद के गेंदबाजी कोच वरुण एरोन और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्राथ ने उनकी तकनीक और फिटनेस को परिष्कृत करने में अहम भूमिका निभाई।
गौरतलब है कि आईपीएल हमेशा से युवा भारतीय प्रतिभाओं के लिए एक लॉन्चपैड रहा है। हिंगे जैसे खिलाड़ी इस बात की मिसाल हैं कि घरेलू क्रिकेट में धैर्य और निरंतर प्रदर्शन से सबसे बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है। आने वाले मैचों में हिंगे पर सभी की निगाहें होंगी और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह इस शानदार शुरुआत को आगे बरकरार रख पाते हैं।