श्रीनगर में खेल मंत्रियों का ऐतिहासिक चिंतन शिविर: 24 अप्रैल से तीन दिन, मांडविया करेंगे नेतृत्व

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श्रीनगर में खेल मंत्रियों का ऐतिहासिक चिंतन शिविर: 24 अप्रैल से तीन दिन, मांडविया करेंगे नेतृत्व

सारांश

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय 24-26 अप्रैल को श्रीनगर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करेगा। डॉ. मनसुख मांडविया की अगुवाई में खेलो इंडिया, खेल नीति, युवा विकास और केंद्र-राज्य समन्वय पर मंथन होगा। यह शिविर भारत की खेल रणनीति को नई दिशा दे सकता है।

Key Takeaways

  • 24 से 26 अप्रैल 2025 तक श्रीनगर के SKICC में तीन दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित होगा।
  • केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे शिविर का नेतृत्व करेंगे।
  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्री इस उच्च स्तरीय विमर्श में भाग लेंगे।
  • खेलो इंडिया, फिट इंडिया, माय भारत और NSS के प्रतिनिधि भी शिविर में शामिल होंगे।
  • शिविर 'संवाद से समाधान', 'समाधान से संकल्प' और 'आत्मावलोकन' के विषयगत ढांचे पर आधारित है।
  • प्रस्तावित खेलो भारत नीति और वार्षिक कार्य योजना 2026-27 पर विशेष चर्चा होगी।

श्रीनगर, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय 24 से 26 अप्रैल 2025 तक श्रीनगर के प्रतिष्ठित शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (SKICC) में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों का एक महत्वपूर्ण तीन दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करने जा रहा है। इस उच्च स्तरीय विचार-मंथन सत्र का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे करेंगे। यह शिविर भारत की खेल नीति को नई दिशा देने और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

शिविर का उद्देश्य और संरचना

यह चिंतन शिविर महज एक बैठक नहीं, बल्कि एक व्यापक नीति-प्रयोगशाला है। इसका मूल उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच खेल एवं युवा विकास की नीतियों में एकरूपता लाना, संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ बनाना और जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करना है।

तीन दिवसीय कार्यक्रम को तीन विषयगत ढांचों पर संरचित किया गया है — 'संवाद से समाधान', 'समाधान से संकल्प' और 'आत्मावलोकन'। यह ढांचा सुनिश्चित करता है कि शिविर सिर्फ चर्चा तक सीमित न रहे, बल्कि कार्रवाई-उन्मुख परिणाम भी सामने आएं।

प्रमुख प्रतिभागी और वरिष्ठ अधिकारी

शिविर में मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी भाग लेंगे, जिनमें युवा कार्यक्रम सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल, अपर सचिव नितेश कुमार मिश्रा और खेल सचिव हरि रंजन राव शामिल हैं। इसके अलावा खेलो इंडिया, फिट इंडिया, माय भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) जैसे प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रतिनिधि भी इस मंच पर अपनी बात रखेंगे।

सत्रों में मुख्य संबोधन, राज्यों और मंत्रालय की प्रस्तुतियां, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, विषय-केंद्रित चर्चाएं और सहयोगात्मक नीति प्रयोगशालाएं शामिल होंगी। विचार-विमर्श का वास्तविक समय में अभिलेखीकरण भी किया जाएगा।

खेल विकास पर मुख्य एजेंडा

खेलो इंडिया मिशन के तहत पदक रणनीति और खिलाड़ी विकास के उपायों पर केंद्रित चर्चा होगी। प्रस्तावित खेलो भारत नीति के माध्यम से केंद्र-राज्य तालमेल बढ़ाने, प्रतिभा पहचान प्रणाली को बेहतर बनाने और जमीनी स्तर पर खेल विकास को गति देने पर विशेष जोर रहेगा।

इसके साथ ही खेल प्रशासन, स्वच्छ एवं सुरक्षित खेल को बढ़ावा देने और सुदृढ़ खेल सामग्री निर्माण तंत्र विकसित करने जैसे अहम मुद्दों पर भी विमर्श होगा। पिछले सत्रों की कार्रवाई रिपोर्ट की समीक्षा भी की जाएगी ताकि निरंतरता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

युवा मामलों पर विशेष विमर्श

खेलों के अतिरिक्त, शिविर में युवा विकास के विभिन्न पहलुओं पर भी गहन चर्चा होगी। वार्षिक कार्य योजना 2026-27, जमीनी स्तर पर युवा क्लबों को व्यवस्थागत मजबूती देना और माय भारत पोर्टल के जरिए डिजिटल सहभागिता बढ़ाना प्रमुख विषयों में शामिल हैं।

माय भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के बीच समन्वय बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नेतृत्व विकास, स्वयंसेवा, अनुभवात्मक शिक्षा और नशा मुक्ति अभियान जैसी युवा-केंद्रित पहलों पर भी विचार-विमर्श प्रस्तावित है।

रणनीतिक महत्व: कश्मीर में आयोजन क्यों?

गौरतलब है कि यह शिविर जम्मू-कश्मीर में आयोजित किया जा रहा है, जो केंद्र सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसके तहत राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों को कश्मीर में करके वहां के युवाओं और खेल प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। खेलो इंडिया के तहत जम्मू-कश्मीर में पहले से ही कई खेल अकादमियां स्थापित की जा चुकी हैं और इस क्षेत्र से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभर रहे हैं।

यह शिविर ऐसे समय में हो रहा है जब भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए खिलाड़ियों की तैयारी तेज की जा रही है। ऐसे में केंद्र-राज्य समन्वय और एकीकृत खेल नीति की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

शिविर के बाद जारी होने वाले कार्रवाई बिंदु और संकल्प पत्र आगामी खेल नीति की दिशा तय करेंगे। राज्यों के खेल मंत्री इन संकल्पों को अपने-अपने राज्यों में लागू करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे, जिसकी समीक्षा अगले सत्र में की जाएगी।

Point of View

बल्कि केंद्र सरकार की उस दोहरी रणनीति का हिस्सा है जिसमें खेल को कश्मीर के एकीकरण के औजार के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सवाल यह है कि पिछले चिंतन शिविरों के कितने 'संकल्प' जमीन पर उतरे — खेलो इंडिया के बजट का बड़ा हिस्सा अभी भी शहरी अवसंरचना में जाता है, जबकि ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान का तंत्र कमजोर बना हुआ है। 2036 ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी के बीच यह शिविर दिखावटी नहीं, ठोस नीतिगत बदलाव का मंच बनना चाहिए।
NationPress
23/04/2026

Frequently Asked Questions

श्रीनगर में चिंतन शिविर कब और कहां आयोजित होगा?
यह चिंतन शिविर 24 से 26 अप्रैल 2025 तक श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (SKICC) में आयोजित होगा। इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्री भाग लेंगे।
चिंतन शिविर में कौन-कौन से मुख्य विषयों पर चर्चा होगी?
शिविर में खेलो इंडिया मिशन, पदक रणनीति, प्रतिभा पहचान, खेलो भारत नीति, युवा क्लब विकास, माय भारत पोर्टल और नशा मुक्ति अभियान जैसे विषयों पर चर्चा होगी। केंद्र-राज्य समन्वय और नीतिगत एकरूपता भी प्रमुख एजेंडे में है।
इस शिविर का नेतृत्व कौन करेंगे?
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे इस शिविर का नेतृत्व करेंगे। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. पल्लवी जैन गोविल, नितेश कुमार मिश्रा और हरि रंजन राव भी उपस्थित रहेंगे।
चिंतन शिविर का क्या महत्व है और इससे क्या बदलाव आ सकते हैं?
यह शिविर भारत की खेल नीति को एकीकृत और प्रभावी बनाने का प्रयास है। इससे राज्यों में खेल विकास के लिए एक समान ढांचा तैयार होगा और 2028 ओलंपिक तथा 2036 की संभावित मेजबानी के लिए तैयारियों को गति मिलेगी।
खेलो इंडिया और माय भारत का इस शिविर से क्या संबंध है?
खेलो इंडिया और माय भारत दोनों कार्यक्रमों के प्रतिनिधि शिविर में भाग लेंगे। शिविर में इन कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा होगी और NSS के साथ समन्वय बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
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