31 जुलाई 2026
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रग्बी प्रीमियर लीग 2026: चेन्नई बुल्स की संध्या राय बोलीं — ग्रामीण बेटियों को मिलेगा नया मंच

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रग्बी प्रीमियर लीग 2026: चेन्नई बुल्स की संध्या राय बोलीं — ग्रामीण बेटियों को मिलेगा नया मंच

सारांश

पश्चिम बंगाल के चाय बागान से निकलकर भारतीय महिला रग्बी का चेहरा बनी संध्या राय के लिए आरपीएल का महिला संस्करण सिर्फ एक लीग नहीं — यह उन हज़ारों ग्रामीण बेटियों के लिए दरवाज़ा खोलने की कोशिश है जो प्रतिभावान होते हुए भी अवसर और समर्थन की कमी में खेल छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं।

मुख्य बातें

रग्बी प्रीमियर लीग (आरपीएल) का महिला संस्करण 2026 में पहली बार आयोजित होगा, जिसमें चार टीमें भाग लेंगी।
चेन्नई बुल्स की स्टार खिलाड़ी संध्या राय पश्चिम बंगाल के एक चाय बागान से निकलकर भारत की अंडर-18 कप्तान और सीनियर टीम की उपकप्तान बनी हैं।
संध्या के अनुसार महिला रग्बी खिलाड़ियों को पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिलता — चोट की स्थिति में करियर तक खतरे में पड़ जाता है।
गाँव की कई प्रतिभाशाली लड़कियाँ आर्थिक तंगी, पुनर्वास की कमी और पारिवारिक दबाव के कारण खेल छोड़ने पर मजबूर हुईं।
आरपीएल के राष्ट्रीय टीवी प्रसारण को संध्या ग्रामीण भारत की बेटियों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा माध्यम मानती हैं।
संध्या ने पूर्व भारतीय कप्तान और टीम फिज़ियो वाहबिज भरूचा को अपना सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत बताया।

चेन्नई बुल्स की स्टार खिलाड़ी संध्या राय — जो पश्चिम बंगाल के एक छोटे चाय बागान से निकलकर भारतीय महिला रग्बी का चेहरा बनी हैं — का मानना है कि रग्बी प्रीमियर लीग (आरपीएल) का महिला संस्करण ग्रामीण भारत की लड़कियों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित होगा। उनके अनुसार, जब देश के दूर-दराज़ गाँवों की बेटियाँ टीवी पर महिला रग्बी खिलाड़ियों को मैदान में उतरते देखेंगी, तो वे भी बड़े सपने देखने का हौसला जुटा सकेंगी।

आरपीएल का महिला संस्करण: एक ऐतिहासिक पहल

रग्बी इंडिया की पहल पर शुरू हुई रग्बी प्रीमियर लीग दुनिया की पहली फ्रेंचाइज़ी-आधारित रग्बी सेवन्स लीग है। 2026 में पहली बार इसका महिला संस्करण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें चार टीमें भाग लेंगी। संध्या इस आयोजन को भारतीय महिला खेल के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ मानती हैं — ठीक उसी तरह जैसे महिला क्रिकेट ने नई पीढ़ी को प्रेरित किया।

उन्होंने कहा, 'आरपीएल पूरे देश में टीवी पर दिखेगा। मेरे गाँव के बच्चे भी हमें खेलते देखेंगे। मैं चाहती हूँ कि वे हमें देखकर प्रेरित हों और रग्बी में अपना भविष्य बनाएँ।'

आर्थिक संघर्ष: सफलता के पीछे की कड़वी सच्चाई

संध्या ने भारत में महिला रग्बी खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रचलित भ्रांतियों पर खुलकर बात की। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर दिखती चमक और वास्तविकता में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है।

उन्होंने कहा, 'लोग सोचते हैं कि हम बड़े स्तर पर खेलते हैं तो हमारे पास कार, बंगला और हर सुविधा होगी, लेकिन सच यह है कि अभी हमें पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिलता। अगर किसी खिलाड़ी को चोट लग जाए तो उसे फिर से शुरुआत करनी पड़ती है और कई बार करियर भी खतरे में पड़ जाता है।'

गाँव की बेटियों की अधूरी कहानियाँ

संध्या ने बताया कि उनके गाँव की कई प्रतिभाशाली लड़कियाँ आर्थिक तंगी, चोट के बाद पुनर्वास की कमी और मानसिक समर्थन न मिलने के कारण रग्बी छोड़ने पर मजबूर हो गईं। कई को कम उम्र में ही विवाह के लिए परिवार का दबाव झेलना पड़ा, क्योंकि खेल में भविष्य की संभावना उन्हें नज़र नहीं आती थी।

उन्होंने कहा, 'मेरी कई दोस्त मुझसे बेहतर खेलती थीं, लेकिन परिवार के दबाव और अवसरों की कमी के कारण उन्होंने रग्बी छोड़ दी। अगर वे आज खेल रही होतीं तो शायद आरपीएल में मेरे साथ होतीं।'

परिवार और प्रेरणा: संध्या की असली ताक़त

संध्या ने अपने माता-पिता को अपनी सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय वह इस संपर्क-खेल (कॉन्टैक्ट स्पोर्ट) की चुनौतियों से डरकर रग्बी छोड़ना चाहती थीं, लेकिन माता-पिता के निरंतर प्रोत्साहन ने उन्हें मैदान पर बनाए रखा।

उन्होंने कहा, 'जब मेरा क्लब टीम में चयन हुआ और मुझे विदेश जाने का मौका मिला, तब मुझे महसूस हुआ कि रग्बी के ज़रिए दुनिया देखी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलने के बाद खेल के प्रति मेरा जुनून और बढ़ गया।'

उनकी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत पूर्व भारतीय कप्तान और वर्तमान टीम फिज़ियो वाहबिज भरूचा हैं, जिनकी नेतृत्व क्षमता और अनुशासन को वह अपने खेल का मार्गदर्शक मानती हैं।

आगे का रास्ता: अवसर और संभावनाएँ

भारत की अंडर-18 टीम की पूर्व कप्तान और सीनियर महिला टीम की पूर्व उपकप्तान संध्या राय एशिया की प्रमुख महिला रग्बी खिलाड़ियों में शुमार रह चुकी हैं। अपनी उपलब्धियों का श्रेय वह पूरी टीम को देती हैं — उनके शब्दों में, 'अनस्टॉपेबल का सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, पूरी टीम का है।'

संध्या का दृढ़ विश्वास है कि प्रतिभा किसी भी गाँव या कस्बे से उभर सकती है — बस ज़रूरत है सही अवसर और समर्थन की। आरपीएल का महिला संस्करण उनकी नज़र में वह मंच है जो देश की हज़ारों बेटियों के सपनों को हकीकत में बदल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके ही शब्दों में छिपा असली सवाल यह है कि क्या आरपीएल सिर्फ दर्शक बढ़ाएगा या खिलाड़ियों की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा। जब एक राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी खुद कहती है कि चोट लगने पर करियर खतरे में पड़ जाता है, तो यह फ्रेंचाइज़ी मॉडल की असली परीक्षा है। टीवी पर दिखना ज़रूरी है, लेकिन ग्रामीण प्रतिभाओं को टिकाए रखने के लिए ठोस चिकित्सा सहायता, वज़ीफ़ा और पुनर्वास तंत्र उतना ही ज़रूरी है — जो अभी तक इस खेल में नदारद रहा है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रग्बी प्रीमियर लीग का महिला संस्करण क्या है और कब शुरू होगा?
रग्बी प्रीमियर लीग (आरपीएल) दुनिया की पहली फ्रेंचाइज़ी-आधारित रग्बी सेवन्स लीग है, जिसका महिला संस्करण 2026 में पहली बार आयोजित होगा। इसमें चार टीमें भाग लेंगी और इसका राष्ट्रीय टेलीविज़न पर प्रसारण होगा।
संध्या राय कौन हैं और उनकी उपलब्धियाँ क्या हैं?
संध्या राय पश्चिम बंगाल के एक चाय बागान से निकली भारतीय महिला रग्बी खिलाड़ी हैं, जो अब चेन्नई बुल्स का प्रतिनिधित्व करती हैं। वह भारत की अंडर-18 टीम की पूर्व कप्तान और सीनियर महिला टीम की पूर्व उपकप्तान रह चुकी हैं, और एशिया की प्रमुख महिला रग्बी खिलाड़ियों में उनकी गिनती होती है।
भारत में महिला रग्बी खिलाड़ियों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
संध्या राय के अनुसार, भारत में महिला रग्बी खिलाड़ियों को पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिलता। चोट लगने पर पुनर्वास की सुविधा का अभाव और मानसिक समर्थन की कमी के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी खेल छोड़ देती हैं, और कुछ को कम उम्र में ही विवाह के लिए पारिवारिक दबाव झेलना पड़ता है।
आरपीएल ग्रामीण भारत की लड़कियों के लिए किस तरह फायदेमंद होगा?
संध्या राय का मानना है कि आरपीएल के राष्ट्रीय टीवी प्रसारण से गाँवों और छोटे शहरों की लड़कियाँ पहली बार महिला रग्बी खिलाड़ियों को मैदान में देखेंगी, जो उन्हें खेल को करियर के रूप में अपनाने की प्रेरणा देगा। यह वही भूमिका है जो महिला क्रिकेट ने पिछले एक दशक में निभाई है।
संध्या राय का प्रेरणा स्रोत कौन हैं?
संध्या राय ने पूर्व भारतीय कप्तान और वर्तमान टीम फिज़ियो वाहबिज भरूचा को अपना सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत बताया है। इसके अलावा, उन्होंने अपने माता-पिता को भी अपनी सफलता का मूल आधार माना, जिन्होंने मुश्किल समय में उन्हें खेल जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
राष्ट्र प्रेस
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