रग्बी प्रीमियर लीग 2026: चेन्नई बुल्स की संध्या राय बोलीं — ग्रामीण बेटियों को मिलेगा नया मंच
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई बुल्स की स्टार खिलाड़ी संध्या राय — जो पश्चिम बंगाल के एक छोटे चाय बागान से निकलकर भारतीय महिला रग्बी का चेहरा बनी हैं — का मानना है कि रग्बी प्रीमियर लीग (आरपीएल) का महिला संस्करण ग्रामीण भारत की लड़कियों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित होगा। उनके अनुसार, जब देश के दूर-दराज़ गाँवों की बेटियाँ टीवी पर महिला रग्बी खिलाड़ियों को मैदान में उतरते देखेंगी, तो वे भी बड़े सपने देखने का हौसला जुटा सकेंगी।
आरपीएल का महिला संस्करण: एक ऐतिहासिक पहल
रग्बी इंडिया की पहल पर शुरू हुई रग्बी प्रीमियर लीग दुनिया की पहली फ्रेंचाइज़ी-आधारित रग्बी सेवन्स लीग है। 2026 में पहली बार इसका महिला संस्करण आयोजित किया जा रहा है, जिसमें चार टीमें भाग लेंगी। संध्या इस आयोजन को भारतीय महिला खेल के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ मानती हैं — ठीक उसी तरह जैसे महिला क्रिकेट ने नई पीढ़ी को प्रेरित किया।
उन्होंने कहा, 'आरपीएल पूरे देश में टीवी पर दिखेगा। मेरे गाँव के बच्चे भी हमें खेलते देखेंगे। मैं चाहती हूँ कि वे हमें देखकर प्रेरित हों और रग्बी में अपना भविष्य बनाएँ।'
आर्थिक संघर्ष: सफलता के पीछे की कड़वी सच्चाई
संध्या ने भारत में महिला रग्बी खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रचलित भ्रांतियों पर खुलकर बात की। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर दिखती चमक और वास्तविकता में ज़मीन-आसमान का फ़र्क है।
उन्होंने कहा, 'लोग सोचते हैं कि हम बड़े स्तर पर खेलते हैं तो हमारे पास कार, बंगला और हर सुविधा होगी, लेकिन सच यह है कि अभी हमें पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिलता। अगर किसी खिलाड़ी को चोट लग जाए तो उसे फिर से शुरुआत करनी पड़ती है और कई बार करियर भी खतरे में पड़ जाता है।'
गाँव की बेटियों की अधूरी कहानियाँ
संध्या ने बताया कि उनके गाँव की कई प्रतिभाशाली लड़कियाँ आर्थिक तंगी, चोट के बाद पुनर्वास की कमी और मानसिक समर्थन न मिलने के कारण रग्बी छोड़ने पर मजबूर हो गईं। कई को कम उम्र में ही विवाह के लिए परिवार का दबाव झेलना पड़ा, क्योंकि खेल में भविष्य की संभावना उन्हें नज़र नहीं आती थी।
उन्होंने कहा, 'मेरी कई दोस्त मुझसे बेहतर खेलती थीं, लेकिन परिवार के दबाव और अवसरों की कमी के कारण उन्होंने रग्बी छोड़ दी। अगर वे आज खेल रही होतीं तो शायद आरपीएल में मेरे साथ होतीं।'
परिवार और प्रेरणा: संध्या की असली ताक़त
संध्या ने अपने माता-पिता को अपनी सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय वह इस संपर्क-खेल (कॉन्टैक्ट स्पोर्ट) की चुनौतियों से डरकर रग्बी छोड़ना चाहती थीं, लेकिन माता-पिता के निरंतर प्रोत्साहन ने उन्हें मैदान पर बनाए रखा।
उन्होंने कहा, 'जब मेरा क्लब टीम में चयन हुआ और मुझे विदेश जाने का मौका मिला, तब मुझे महसूस हुआ कि रग्बी के ज़रिए दुनिया देखी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलने के बाद खेल के प्रति मेरा जुनून और बढ़ गया।'
उनकी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत पूर्व भारतीय कप्तान और वर्तमान टीम फिज़ियो वाहबिज भरूचा हैं, जिनकी नेतृत्व क्षमता और अनुशासन को वह अपने खेल का मार्गदर्शक मानती हैं।
आगे का रास्ता: अवसर और संभावनाएँ
भारत की अंडर-18 टीम की पूर्व कप्तान और सीनियर महिला टीम की पूर्व उपकप्तान संध्या राय एशिया की प्रमुख महिला रग्बी खिलाड़ियों में शुमार रह चुकी हैं। अपनी उपलब्धियों का श्रेय वह पूरी टीम को देती हैं — उनके शब्दों में, 'अनस्टॉपेबल का सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, पूरी टीम का है।'
संध्या का दृढ़ विश्वास है कि प्रतिभा किसी भी गाँव या कस्बे से उभर सकती है — बस ज़रूरत है सही अवसर और समर्थन की। आरपीएल का महिला संस्करण उनकी नज़र में वह मंच है जो देश की हज़ारों बेटियों के सपनों को हकीकत में बदल सकता है।