मोहित खत्री: भारतीय रग्बी के 'पोस्टर बॉय', चेन्नई बुल्स के साथ लगातार दूसरे RPL खिताब की दावेदारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रग्बी के स्टार खिलाड़ी और चेन्नई बुल्स के उप-कप्तान मोहित खत्री ने रग्बी प्रीमियर लीग (RPL) के दूसरे सीजन को भारतीय रग्बी के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ बताया है। 16 जून से शुरू हो रहे इस सीजन में चेन्नई बुल्स अपने खिताब की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। दुनिया की पहली फ्रेंचाइजी-आधारित रग्बी सेवन्स लीग में भारतीय खिलाड़ियों को ओलंपिक स्तर के एथलीटों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेलने का अनूठा अवसर मिल रहा है।
चेन्नई बुल्स की तैयारी और टीम संरचना
चेन्नई बुल्स ने इस सीजन के लिए एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं से सजी टीम तैयार की है। टीम की कमान ओलंपिक 2024 में अर्जेंटीना की कप्तानी कर चुके सैंटियागो अल्वारेज के हाथों में है, जबकि मोहित खत्री उप-कप्तान की भूमिका में हैं। गौरतलब है कि 2025-26 सीजन के दौरान चेन्नई बुल्स फिजी कोरल कोस्ट सेवंस और हांगकांग टेंस जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली पहली भारतीय टीम बनी — एक उपलब्धि जो मैदान के बाहर भी टीम की बढ़ती साख को दर्शाती है।
मोहित खत्री: 'पोस्टर बॉय' की जिम्मेदारी और आत्मविश्वास
भारत के पूर्व कप्तान मोहित खत्री को देश में रग्बी का 'पोस्टर बॉय' कहा जाता है। इस पहचान को लेकर उनका नजरिया परिपक्व है। उन्होंने कहा, "असल में, 'पोस्टर बॉय' होना अच्छी बात है। बहुत से जाने-पहचाने और अनजान लोग आपको पहचानने लगते हैं और इसके साथ ही आप पर एक जिम्मेदारी भी आती है, लेकिन इससे मुझ पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता, क्योंकि मेरा अपना काम और फोकस करने के लिए चीजें हैं। मैं अपना पूरा ध्यान वहीं लगाने की कोशिश करता हूं और इसे बोझ नहीं मानता।"
खत्री की सबसे गर्व भरी यादें अंतरराष्ट्रीय मंच से नहीं, बल्कि हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया, "मुझे पहली बड़ी उपलब्धि सीनियर नेशनल से मिली, जहां मैं अपने राज्य, हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर रहा था। उस टीम में मेरे 4 चचेरे भाई भी खेलते थे। हम अपने भाइयों के नक्शेकदम पर चले, एक टीम में खेले, अपने परिवार, अपनी संस्कृति और अपने राज्य का प्रतिनिधित्व किया और फिर पूरे भारत में जीत हासिल की।"
विश्व स्तरीय खिलाड़ियों से सीखने का अवसर
हरियाणा और भारतीय राष्ट्रीय टीम दोनों की कप्तानी कर चुके खत्री अब उप-कप्तान के रूप में एक नई भूमिका में हैं। वह इसे सीखने का अमूल्य अवसर मानते हैं। उन्होंने कहा, "हमें कुछ नया सीखने का मौका मिला है — रग्बी में दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी क्या पसंद करते हैं, वे किन चीजों का पालन करते हैं, कैसे खेलते हैं। हमारे कप्तान अर्जेंटीना से हैं। अर्जेंटीना पिछले दो-तीन वर्षों से जीत रही है। लीडरशिप के मामले में भी, यह मेरे लिए सीखने का एक बहुत अच्छा अनुभव होगा।"
खत्री ने अपने रग्बी सफर की जड़ों को याद करते हुए दिल्ली हरिकेंस को श्रेय दिया, जहां से उन्होंने इस खेल की बुनियादी बारीकियाँ सीखीं। उनके शब्दों में, "रग्बी से मुझे जो कुछ भी मिला है, वह दिल्ली हरिकेंस की वजह से ही मिला है।"
RPL का अनूठा फॉर्मेट और भारतीय खिलाड़ियों का विकास
रग्बी प्रीमियर लीग का फॉर्मेट पारंपरिक सेवन्स रग्बी से अलग है। जहाँ सामान्य सेवन्स में 7-7 मिनट के दो हाफ होते हैं, वहीं RPL में 4 मिनट के 4 क्वार्टर खेले जाते हैं। खत्री ने बताया कि पहले सीजन में यह फॉर्मेट सभी के लिए नया था — भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों के लिए भी। इससे खिलाड़ियों ने फिटनेस का एक नया स्तर हासिल किया और रणनीतिक दृष्टि से भी काफी सुधार किया।
राहुल बोस का योगदान और रग्बी का बदलता परिदृश्य
खत्री ने रग्बी इंडिया के अध्यक्ष राहुल बोस के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, "जब से राहुल बोस रग्बी इंडिया से जुड़े हैं, तब से ज्यादा स्पॉन्सर जुड़ रहे हैं। रग्बी का स्वरूप और दौर बदल गया है। इस टूर्नामेंट की वजह से हम ओलंपियनों के साथ खेल पा रहे हैं। अगर यह टूर्नामेंट नहीं होता, तो हम उन्हें सिर्फ टेलीविजन पर ही देख पाते।"
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रग्बी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश में है। RPL का दूसरा सीजन इस दिशा में एक और अहम कदम साबित हो सकता है।