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शाजी प्रभाकरन का बड़ा बयान: भारत फीफा विश्व कप के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं कर रहा

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शाजी प्रभाकरन का बड़ा बयान: भारत फीफा विश्व कप के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं कर रहा

सारांश

AIFF के पूर्व महासचिव शाजी प्रभाकरन का बयान सीधा है — भारत के पास फीफा विश्व कप तक पहुंचने की क्षमता है, लेकिन ईमानदार मेहनत और एकजुटता की कमी सबसे बड़ी बाधा है। 1.4 अरब की आबादी का देश इस सवाल का जवाब देने से अब और नहीं बच सकता।

मुख्य बातें

शाजी प्रभाकरन , AIFF के पूर्व महासचिव, ने 19 जुलाई 2026 को कहा कि भारत फीफा विश्व कप के लिए पर्याप्त मेहनत नहीं कर रहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 1.4 अरब की आबादी वाले देश के पास संसाधन और क्षमता दोनों मौजूद हैं।
सुधार की ज़रूरत प्रशासन, जमीनी स्तर और एलीट प्रतियोगिता — तीनों स्तरों पर बताई गई।
भारत सरकार फुटबॉल को समर्थन देने की इच्छुक है, लेकिन फुटबॉल प्रशासकों पर सही निर्णय लेने की जिम्मेदारी है।
प्रभाकरन के अनुसार, विश्व कप में भागीदारी भारत के लिए 'सॉफ्ट पावर' का बड़ा अवसर होगी — 2 अरब दर्शकों तक पहुंच के साथ।

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के पूर्व महासचिव शाजी प्रभाकरन ने 19 जुलाई 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि फीफा विश्व कप के लिए भारत के क्वालीफाई न कर पाने की जड़ में समर्पण और सामूहिक प्रयास की कमी है — संसाधनों की नहीं। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाले देश से यह सवाल दुनिया पूछती है, और इसका जवाब आत्मनिरीक्षण में छिपा है।

मुख्य बयान: 'हम मेहनत नहीं कर रहे'

प्रभाकरन ने कहा, 'नहीं, यह बहुत दुख की बात है कि दुनिया यह सवाल पूछती है कि 1.4 अरब लोग वाला देश वर्ल्ड कप के लिए क्यों क्वालीफाई नहीं कर पा रहा है, लेकिन सच तो यह है कि हम वहां पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत नहीं कर रहे हैं, बस इतनी सी बात है।' उन्होंने जोड़ा कि भारत के पास क्षमता और काबिलियत दोनों मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए लगातार और ईमानदारी से काम करने की ज़रूरत है।

प्रशासन और जमीनी स्तर पर सुधार की दरकार

पूर्व महासचिव ने कहा कि सुधार की आवश्यकता हर पहलू में है — चाहे वह प्रशासन हो, जमीनी स्तर हो, या यूथ व सीनियर एलीट प्रतिस्पर्धी ढाँचा। उन्होंने कहा, 'इसके लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है। ये आसान चीजें हैं — लोगों को एक साथ लाना होगा और मिलकर काम करना होगा।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय फुटबॉल की FIFA रैंकिंग लगातार दबाव में है।

सरकारी समर्थन और फुटबॉल की 'सॉफ्ट पावर'

प्रभाकरन ने बताया कि भारत सरकार फुटबॉल को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए गंभीर है और खेल को सपोर्ट करने की इच्छुक है। उन्होंने कहा कि अगर भारत फीफा विश्व कप में खेलता है, तो भारतीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाना आसान होगा, क्योंकि विश्व कप के दौरान दुनिया की 2 अरब से अधिक आबादी मैच लाइव देखती है। उनके अनुसार, फुटबॉल भारत के लिए 'सॉफ्ट पावर' का एक बड़ा माध्यम बन सकता है।

नकारात्मकता से आगे: समाधान पर ज़ोर

प्रभाकरन ने कहा, 'अगर हम आज शुरुआत करें, तो इस बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है कि हम क्या नहीं कर पा रहे हैं।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गलतियाँ गिनाना आसान है, लेकिन बदलाव के लिए ईमानदारी से कोशिश करना ज़रूरी है। गौरतलब है कि क्रिकेट के बाद फुटबॉल भारत में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले खेलों में से एक है — और विश्व कप के दौरान यह लोकप्रियता और भी स्पष्ट होती है। यदि सभी हितधारक एकजुट हों, तो प्रभाकरन के अनुसार भारत का विश्व कप में पहुंचना असंभव नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें जवाबदेही की कमी है — 'मेहनत नहीं हो रही' कहना आसान है, पर यह नहीं बताया गया कि AIFF के अपने कार्यकाल में क्या ठोस बदलाव आए। भारतीय फुटबॉल की संरचनात्मक समस्याएं — कमज़ोर घरेलू लीग, राज्य संघों में राजनीति, और विदेशी कोचिंग की अनिश्चितता — इन पर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया। सरकारी समर्थन की बात सही है, लेकिन बिना स्वायत्त और पारदर्शी फुटबॉल प्रशासन के, संसाधन भी सूई नहीं हिला सकते।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाजी प्रभाकरन ने भारत के फीफा विश्व कप क्वालीफाई न कर पाने की क्या वजह बताई?
शाजी प्रभाकरन ने कहा कि भारत के पास संसाधन और क्षमता है, लेकिन फीफा विश्व कप तक पहुंचने के लिए पर्याप्त और ईमानदार मेहनत नहीं हो रही। उनके अनुसार, लोगों को एकजुट करना और टीम की तरह काम करना सबसे ज़रूरी है।
भारतीय फुटबॉल में सुधार के लिए प्रभाकरन ने क्या सुझाव दिए?
उन्होंने प्रशासन, जमीनी स्तर और एलीट प्रतिस्पर्धा — तीनों में सुधार की बात कही। साथ ही सभी हितधारकों को एकजुट करने और नकारात्मकता की बजाय समाधान पर ध्यान देने पर जोर दिया।
क्या भारत सरकार फुटबॉल को समर्थन देने के लिए तैयार है?
प्रभाकरन के अनुसार, भारत सरकार खेलों को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए गंभीर है और फुटबॉल को भी सपोर्ट करना चाहती है। अब यह जिम्मेदारी फुटबॉल प्रशासकों पर है कि वे सही समय पर सही फैसले लें।
फुटबॉल भारत के लिए 'सॉफ्ट पावर' कैसे बन सकता है?
प्रभाकरन ने कहा कि फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है और विश्व कप के दौरान 2 अरब से अधिक दर्शक मैच देखते हैं। अगर भारत विश्व कप में खेले, तो भारतीय संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक मंच पर पहुंचाना आसान हो जाएगा।
शाजी प्रभाकरन कौन हैं?
शाजी प्रभाकरन अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के पूर्व महासचिव हैं। वे भारतीय फुटबॉल प्रशासन के अनुभवी व्यक्तित्व हैं और खेल नीति पर सक्रिय रूप से अपनी राय रखते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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