मांडविया ने जारी किया ऐतिहासिक 'श्रीनगर खेल संकल्प', खेलों को राष्ट्र-निर्माण का आधार बनाने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
श्रीनगर, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 26 अप्रैल 2025 को श्रीनगर में आयोजित तीन दिवसीय चिंतन शिविर के समापन पर राज्यों के खेल मंत्रियों और खेल जगत की प्रमुख हस्तियों के साथ मिलकर 'श्रीनगर खेल संकल्प' नामक महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किया। यह दस्तावेज भारत में खेल संस्कृति को सहकारी संघवाद के माध्यम से मजबूत करने की एक सुनिश्चित राष्ट्रीय रणनीति प्रस्तुत करता है। इसे देश के खेल इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
संकल्प की मुख्य प्राथमिकताएं
यह संकल्प दस्तावेज कई अहम विषयों को अपने केंद्र में रखता है। इसमें एथलीट-केंद्रित विकास, खेल अवसंरचना का विस्तार, प्रतिभा की पहचान और क्षेत्रीय खेल समूहों का सुदृढ़ीकरण प्रमुख स्तंभ हैं।
इसके अतिरिक्त संकल्प में युवा सशक्तिकरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, खेल पर्यटन और आर्थिक विकास में खेलों की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। दस्तावेज यह भी स्पष्ट करता है कि भारत ओलंपिक गेम्स और फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े वैश्विक आयोजनों की मेजबानी की अपनी महत्वाकांक्षा पर दृढ़ है।
सहकारी संघवाद और एकजुट दृष्टिकोण
श्रीनगर खेल संकल्प केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। इसका मूल उद्देश्य खेलों को राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया के केंद्र में स्थापित करना है।
यह संकल्प सरकारों और खेल निकायों को एक साझा लक्ष्य की ओर काम करने के लिए प्रेरित करता है, जहां संसाधनों और प्रयासों का समन्वय इस प्रकार हो कि देश के हर कोने के एथलीट को एक सहायक और अनुकूल वातावरण मिल सके। यह दृष्टिकोण सामाजिक एकता को बढ़ावा देने और समुदायों को सशक्त बनाने में खेलों की भूमिका को भी स्वीकार करता है।
विविधता को शक्ति बनाने की रणनीति
संकल्प में भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को खेल विकास की ताकत के रूप में उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया है। राज्यों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे अपनी स्थानीय विशेषताओं के अनुरूप खेल ढांचा तैयार करें, क्षेत्रीय प्रतिभाओं को खोजें और एक सशक्त खेल इकोसिस्टम का निर्माण करें।
उदाहरण के लिए जम्मू-कश्मीर जैसे पर्वतीय क्षेत्र शीतकालीन खेलों और साहसिक खेलों में विशेषज्ञता विकसित कर सकते हैं, जबकि तटीय राज्य जल क्रीड़ाओं में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।
खेल और सामाजिक-आर्थिक विकास का संबंध
संकल्प दस्तावेज में खेलों को सामाजिक-आर्थिक विकास के एक प्रमुख माध्यम के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार खेल पर्यटन को बढ़ावा दे सकते हैं, रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकते हैं और स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं।
गौरतलब है कि भारत पहले ही 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर चुका है। इस संकल्प को उस महत्वाकांक्षा को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
साइक्लोथॉन से हुई समापन दिवस की शुरुआत
चिंतन शिविर के अंतिम दिन की शुरुआत 'फिट इंडिया' अभियान के तहत 'संडे ऑन साइकिल' साइक्लोथॉन से हुई। इस साइक्लोथॉन का नेतृत्व स्वयं डॉ. मनसुख मांडविया और राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने किया।
इस आयोजन ने फिटनेस, अनुशासन और जन-भागीदारी के संदेश को और अधिक प्रभावशाली तरीके से जनता तक पहुंचाया। यह इस बात का प्रतीक है कि सरकार खेल नीति को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि जमीनी भागीदारी को भी उतना ही महत्व देती है।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकारें इस संकल्प को किस गति से लागू करती हैं और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दिशा में भारत की तैयारियां किस रूप में आगे बढ़ती हैं।