नवरात्रि 2026: सुरेश रैना ने कांगड़ा के मां बज्रेश्वरी मंदिर में टेकी मत्था, बोले — 'माता का आशीर्वाद हमेशा साथ रहा'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना नवरात्रि के पहले दिन, रविवार 11 अक्टूबर 2026 को, अपनी माँ और बहन सहित परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बज्रेश्वरी मंदिर पहुंचे और देवी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। यह यात्रा रैना के लिए व्यक्तिगत रूप से विशेष रही, क्योंकि उनकी माँ का जन्म हिमाचल प्रदेश में ही हुआ था।
मंदिर में दर्शन और भावपूर्ण क्षण
मां बज्रेश्वरी मंदिर में दर्शन के बाद सुरेश रैना ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'मैं अपनी मां और बहन के साथ मंदिर आकर बहुत खुश हूं। यह मेरे और मेरी मां के लिए बहुत खास दिन है। मैं बचपन से माता रानी की पूजा करता आ रहा हूं, और उनका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहा है। यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि मेरी मां का जन्म हिमाचल प्रदेश में ही हुआ था।' रैना ने सभी भक्तों की खुशी और अच्छी सेहत के लिए भी देवी से प्रार्थना की।
नवरात्रि पर मंदिर में उमड़ा जनसैलाब
नवरात्रि के पहले दिन मां बज्रेश्वरी मंदिर में देशभर के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने पूजा-अर्चना की और देवी का आशीर्वाद लिया। कांगड़ा का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के सबसे पूजनीय शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष उत्साह रहता है।
सुरेश रैना का क्रिकेट करियर
सुरेश रैना भारतीय क्रिकेट के सफलतम बाएँ हाथ के विस्फोटक बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने 30 जुलाई 2005 को दांबुला में श्रीलंका के विरुद्ध वनडे मैच से अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। अपने करियर में रैना ने 226 वनडे मैचों में 35.31 की औसत से 5,615 रन बनाए, जिसमें 5 शतक और 36 अर्धशतक शामिल हैं। 78 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्होंने 1,605 रन बनाए और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 101 रहा। 18 टेस्ट मैचों की 31 पारियों में उनके बल्ले से 768 रन निकले, जिनमें 1 शतक और 7 अर्धशतक शामिल हैं।
मिस्टर आईपीएल की विरासत
'मिस्टर आईपीएल' के नाम से मशहूर सुरेश रैना ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की 205 मैचों की 200 पारियों में 1 शतक और 39 अर्धशतक लगाते हुए 5,528 रन बनाए। गौरतलब है कि रैना ने 15 अगस्त 2020 को पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास की घोषणा के कुछ ही मिनट बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था — यह क्षण भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक भावुक अध्याय बन गया।
आस्था और खेल की जुगलबंदी
रैना की इस मंदिर यात्रा ने एक बार फिर यह दर्शाया कि भारतीय खिलाड़ी मैदान की सफलता के साथ-साथ अपनी जड़ों और आस्था से भी जुड़े रहते हैं। नवरात्रि जैसे पावन अवसर पर उनकी उपस्थिति ने मंदिर परिसर में एक अलग ही उत्साह का माहौल बना दिया। आने वाले नवरात्रि के शेष दिनों में भी कांगड़ा के इस शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहेगा।