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क्या गुप्त नवरात्रि में मां तारा का अद्भुत मंदिर 7,200 फीट ऊंचाई पर है?

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क्या गुप्त नवरात्रि में मां तारा का अद्भुत मंदिर 7,200 फीट ऊंचाई पर है?

सारांश

गुप्त नवरात्रि के दौरान शिमला में स्थित मां तारा देवी का 250 साल पुराना मंदिर भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है। 7,200 फीट की ऊंचाई पर बसा यह मंदिर अद्भुत वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य से भरा हुआ है। यहां मां तारा की पूजा के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए खास अवसरों पर भंडारा भी आयोजित किया जाता है।

मुख्य बातें

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के रूपों की साधना होती है।
मां तारा का मंदिर 250 वर्ष पुराना है।
मंदिर की ऊंचाई 7,200 फीट है।
यह मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक है।

शिमला, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। यह नवरात्रि साधकों के लिए एक विशेष अवसर है, जहां वे मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की गोपनीय साधना करते हैं। पहले दिन मां काली की पूजा की जाती है, जबकि दूसरे दिन मां तारा के दर्शन का विधान है। हिमाचल प्रदेश के शिमला में मां तारा देवी का एक प्राचीन मंदिर है, जिसकी आयु 250 वर्ष से अधिक है।

यह मंदिर शिमला शहर से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर, शोघी हाईवे पर स्थित है और इसकी ऊंचाई 7,200 फीट है। भक्तों को मंदिर तक पहुंचने के लिए शोघी से एक खूबसूरत और घुमावदार सड़क पर चढ़ाई करनी होती है। मंदिर की स्थापना लगभग 250 वर्ष पूर्व हुई थी।

किंवदंती के अनुसार, सेन राजवंश के राजा भूपेंद्र सेन को एक रात स्वप्न में मां तारा ने दर्शन दिए। देवी ने राजा से कहा कि वे उनके लिए एक मंदिर बनवाएं। इस स्वप्न को सत्य मानते हुए राजा ने तुरंत निर्माण कार्य आरंभ करवाया। बाद में उनके वंशज बलवीर सेन ने मंदिर में अष्टधातु से बनी मां तारा की सुंदर मूर्ति स्थापित की।

मान्यता है कि मां तारा यहां कुलदेवी के रूप में विराजमान हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां तारा उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं और मुसीबतों से बचाती हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु विशेषकर संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य, धन-समृद्धि और सुरक्षा की कामना लेकर आते हैं।

मंदिर की वास्तुकला भी अद्भुत है। यह पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित है, जिसमें लकड़ी और पत्थर का उपयोग किया गया है। इसकी छत स्लेट की बनी हुई है, जो हिमाचल की पुरानी इमारतों की पहचान है। मंदिर में जटिल नक्काशी और खूबसूरत डिज़ाइन स्थानीय कारीगरों की अद्भुत कला को प्रदर्शित करते हैं।

हाल के वर्षों में, हिमाचल पर्यटन विभाग ने मंदिर के पास एक नया, आधुनिक लेकिन पारंपरिक शैली में मंदिर भी बनवाया है। इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता 360 डिग्री का पैनोरमिक नजारा है। हिमालय की बर्फीली चोटियां, हरे-भरे जंगल और घाटियां एक साथ दिखाई देती हैं, जो मन को शांति और भक्ति का अनुभव कराती हैं।

विशेष अवसरों पर मंदिर प्रबंधन भक्तों के लिए मुफ्त सामुदायिक भंडारा भी आयोजित करता है। यहां गुप्त नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना होती है। भक्त मां तारा को लाल फूल, चावल, सिंदूर, धूप-दीप और मिठाई चढ़ाते हैं। कई साधक इस दौरान विशेष अनुष्ठान और जप भी करते हैं। तारा देवी मंदिर न केवल धार्मिक महत्व का है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र है। शिमला घूमने आने वाले पर्यटक अक्सर यहां दर्शन करने आते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर भी है। हमें ऐसे स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिल सके।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुप्त नवरात्रि क्या है?
गुप्त नवरात्रि एक विशेष नवरात्रि है, जिसमें साधक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की गोपनीय साधना करते हैं।
मां तारा देवी का मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर शिमला में, शोघी हाईवे पर लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर है।
मंदिर की स्थापना कब हुई थी?
मंदिर की स्थापना लगभग 250 वर्ष पूर्व हुई थी।
मंदिर में भक्त कौन-कौन सी कामनाएं लेकर आते हैं?
भक्त संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य, धन-समृद्धि और सुरक्षा की कामनाएं लेकर आते हैं।
मंदिर की वास्तुकला कैसी है?
मंदिर पारंपरिक पहाड़ी शैली में बना है, जिसमें लकड़ी और पत्थर का उपयोग किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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