ऑस्ट्रेलिया में 'गंदा फ्यूल' बेचना शुरू, हर महीने 10 करोड़ लीटर अतिरिक्त सप्लाई की योजना
सारांश
Key Takeaways
- ऑस्ट्रेलिया में गंदा फ्यूल बेचना शुरू होगा।
- हर महीने 10 करोड़ लीटर अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा।
- यह कदम ईंधन की कीमतें कम करने के उद्देश्य से है।
- 60 दिन बाद सामान्य ईंधन गुणवत्ता मानक लागू होंगे।
- पर्यावरण और स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाएगा।
कैनबरा, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति दबाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए देश में ईंधन गुणवत्ता मानकों में अस्थायी ढील देने का ऐलान किया है, जिसका मतलब है कि नागरिकों को गंदा ईंधन उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर नकारात्मक दबाव बनेगा।
ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने संसद में जानकारी दी कि सरकार 60 दिनों के लिए ईंधन में सल्फर की अधिक मात्रा की अनुमति देगी। आमतौर पर ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की गुणवत्ता के लिए सख्त मानक मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य पर्यावरण और वाहनों पर नकारात्मक प्रभाव को कम करना है।
सरकार के अनुसार, मानकों में यह बदलाव ईंधन की आपूर्ति को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। इस निर्णय के तहत रिफाइनरियों और सप्लाई नेटवर्क को थोड़ी अधिक सल्फर मात्रा वाले ईंधन का उपयोग करने की अनुमति मिलेगी, जिससे उत्पादन और आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का अनुमान है कि इस निर्णय के माध्यम से हर महीने करीब 10 करोड़ लीटर अतिरिक्त ईंधन बाजार में उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे परिवहन, उद्योग और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।
ऊर्जा मंत्रालय का कहना है कि यह कदम पूरी तरह अस्थायी है और 60 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद ईंधन गुणवत्ता के सामान्य मानक फिर से लागू कर दिए जाएंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दौरान पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर ध्यान रखा जाएगा।
ईरान के साथ यूएस-इजरायल सैन्य संघर्ष का भी ईंधन की कीमतों पर असर दिखने लगा है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच ऑस्ट्रेलिया का यह निर्णय ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया अस्थायी कदम है।