ऑस्ट्रेलिया ने ईंधन संकट से निपटने के लिए 'फ्यूल सप्लाई टास्कफोर्स' का गठन किया
सारांश
Key Takeaways
- फ्यूल सप्लाई टास्कफोर्स का गठन किया गया है।
- यह टास्कफोर्स ईंधन संकट का सामना करने के लिए तैयार है।
- एंथिया हैरिस को इस टास्कफोर्स का समन्वय सौंपा गया है।
- ईंधन कंपनियों की जांच प्रतिस्पर्धा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए है।
- सरकार संकट से निपटने के लिए और कदम उठाएगी।
कैनबरा, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के चलते ऑस्ट्रेलिया ने संभावित ईंधन संकट के लिए "ओवर-प्रिपेयर्ड" यानी अत्यधिक सजग रहने की योजना बनाई है, जिससे किसी भी प्रकार की आपूर्ति में रुकावट का सामना किया जा सके।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को राष्ट्रीय कैबिनेट की एक आपातकालीन वर्चुअल बैठक आयोजित की, जिसमें ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट पर चर्चा की गई। यह समस्या मुख्यतः मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में हुई अनिश्चितता से उत्पन्न हुई है। अल्बनीज ने एक वीडियो के माध्यम से इस रणनीति का खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि संकट से निपटने के लिए सरकार ने विशेष “फ्यूल सप्लाई टास्कफोर्स” का गठन किया है, जिसका समन्वय एंथिया हैरिस करेंगी, जिन्होंने पहले ऑस्ट्रेलियाई ऊर्जा नियामक की प्रमुख के रूप में कार्य किया है। उन्हें ईंधन सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े मुद्दों पर केंद्र एवं राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य सौंपा गया है।
ऑस्ट्रेलिया के कई क्षेत्रों में ईंधन की गंभीर कमी देखी जा रही है, जिसे “अकल्पनीय” स्थिति करार दिया गया है। ऐसे में राज्यों के नेताओं ने केंद्र सरकार से त्वरित कार्रवाई और दीर्घकालिक रणनीति की माँग की थी। टास्कफोर्स के गठन के बाद इस कदम का स्वागत किया गया है।
प्रधानमंत्री अल्बनीज ने बैठक के बाद कहा कि देश में फिलहाल ईंधन आपूर्ति सुरक्षित है, लेकिन सरकार किसी भी संभावित संकट से पहले पूरी तैयारी करना चाहती है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में सरकार सप्लाई चेन को मजबूत करने और संकट से निपटने के लिए और कदम उठाएगी।
इस बीच, ऑस्ट्रेलिया की प्रतिस्पर्धा निगरानी संस्था ऑस्ट्रेलियाई प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता आयोग (एसीसीसी) ने प्रमुख ईंधन कंपनियों की जांच शुरू कर दी है। इस जांच में एम्पोल, बीपी, मोबिल और वीवा एनर्जी शामिल हैं।
इन कंपनियों पर आरोप है कि वे ईंधन की कमी के दौरान संभावित रूप से प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो सकती हैं, जिससे कीमतों में कृत्रिम वृद्धि हो सकती है। जबकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, यह दर्शाता है कि सरकार बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए सख्त कदम उठा रही है।