भारत का डीजल निर्यात सात साल में सबसे ऊँचे स्तर पर, ऑस्ट्रेलिया को मिल रही राहत
सारांश
Key Takeaways
- भारत का डीजल निर्यात सात साल में उच्चतम स्तर पर है।
- ऑस्ट्रेलिया की ईंधन मांग में वृद्धि हुई है।
- भारत से लगभग एक मिलियन मीट्रिक टन डीजल निर्यात किया गया।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज का प्रमुख योगदान है।
- यह स्थिति ऑस्ट्रेलिया की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकती है।
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत का डीजल निर्यात दक्षिण-पूर्व एशिया में मार्च में पिछले सात वर्षों में सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। यह वृद्धि इस क्षेत्र और ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की मांग में बढ़ोतरी के कारण हुई है, जो मध्य पूर्व से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान के चलते उत्पन्न हुई।
ऑस्ट्रेलिया के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि यह देश आयातित ईंधन पर अत्यधिक निर्भर है और अपनी आवश्यकताओं का अधिकांश हिस्सा एशिया से हासिल करता है।
वर्तमान में, ऑस्ट्रेलिया की रिफाइनरियाँ केवल देश की ईंधन मांग का 20 प्रतिशत से भी कम पूरा कर रही हैं, जबकि शेष आपूर्ति क्षेत्रीय सप्लाई चेन के माध्यम से की जा रही है।
'ऑस्ट्रेलिया टुडे' के एक लेख के अनुसार, यह स्थिति भारत से आने वाले अतिरिक्त डीजल के जरिए उस सप्लाई चेन का विस्तार करने में मदद कर रही है, जहाँ से ऑस्ट्रेलिया ईंधन खरीद सकता है, क्योंकि खरीदार अब नए विकल्पों की तलाश में हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, मार्च में लगभग एक मिलियन मीट्रिक टन डीजल भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के लिए भेजा गया, जिसमें से लगभग आधा सिंगापुर के लिए था और लगभग 90 प्रतिशत व्यापार रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा किया गया।
ऑस्ट्रेलिया के लिए यह केवल कीमत का मुद्दा नहीं है, बल्कि भौतिक उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।
एंथनी अल्बानीज की सरकार ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया लगभग 90 प्रतिशत ईंधन का आयात करता है और स्थानीय स्तर पर आपूर्ति की कमी का सामना कर रहा है। हाल के हफ्तों में कई पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या डीजल खत्म हो गया है।
आर्टिकल में बताया गया है कि पिछले सप्ताहांत में ऑस्ट्रेलिया के पास लगभग 30 दिनों का डीजल और जेट फ्यूल उपलब्ध था, जबकि एशिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको और अन्य स्थानों से 53 से अधिक ईंधन शिपमेंट अभी ऑस्ट्रेलिया की ओर बढ़ रहे हैं।
हालांकि, भारतीय डीजल अकेले समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन यह आपूर्ति की कमी को कम करने में सहायक है।
रॉयटर्स ने बताया कि व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि अप्रैल में अतिरिक्त भारतीय माल आपूर्ति की कमी को कम करेगा और कुछ बाजार विश्लेषक मानते हैं कि ईस्ट-ऑफ-स्वेज बिक्री के लिए लाभ अभी भी कई महीनों तक अनुकूल रहेगा। इससे ऑस्ट्रेलियाई खरीदारों को एशियाई हब के माध्यम से विकल्प खोजने का बेहतर अवसर मिलेगा।
व्यवहारिक रूप से इसका अर्थ है कि भारत में निर्मित डीजल अब क्षेत्रीय भंडार का हिस्सा बन रहा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई ट्रकों, व्यवसायों और पेट्रोल पंपों की आपूर्ति में स्थिरता बनी रहती है।