लॉर्ड्स टेस्ट शतक के बाद यास्तिका भाटिया बोलीं: '2-3 साल की तकलीफ के बाद यह पल बेहद भावुक था'
सारांश
मुख्य बातें
विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट शतक जड़कर इतिहास रच दिया — वे इस प्रतिष्ठित मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बन गई हैं। 18 जुलाई 2026 को बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) की ओर से आयोजित वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि बीते 2-3 वर्षों की चुनौतियों और एसीएल सर्जरी के लंबे संघर्ष के बाद यह शतक उनके लिए महज क्रिकेटीय उपलब्धि नहीं, बल्कि एक गहरे भावनात्मक पल के रूप में आया।
भावुक पल और आस्था का सहारा
यास्तिका ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'मैं दो दिन पहले मंदिर गई थी और दो महीने पहले मैंने महाकाल के दर्शन किए थे। वहाँ उन्हें देखकर भगवान का शुक्रिया अदा करने का जो एहसास होता है — वैसा ही एहसास मुझे शतक लगाने पर हुआ।' उन्होंने बताया कि पारी से दो दिन पहले वे गुरुदेव दत्त मंदिर गई थीं और उस पल की अनुभूति और शतक के क्षण की अनुभूति उन्हें एक जैसी लगी। उन्होंने कहा, 'पिछले 2-3 वर्षों में मैंने जो कुछ भी झेला है, उसके लिए मैं अपने परिवार की शुक्रगुजार हूँ, जो पूरे करियर में मेरे लिए एक मज़बूत सहारा रहे हैं।'
ऑनर्स बोर्ड और डॉन ब्रैडमैन की प्रेरणा
यास्तिका ने बताया कि लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज करवाने की प्रेरणा उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच के दौरान मिली थी, जब कोच अमोल सर ने उन्हें इस संभावना से अवगत कराया था। उन्होंने कहा, 'जब मैं अपनी पारी खेलने से पहले बैठी थी, तो मैंने ऑनर्स बोर्ड की तरफ देखा और पाया कि डॉन ब्रैडमैन सर का नाम वहाँ दो बार है। दिलीप वेंगसरकर सर का नाम भी बोर्ड पर तीन बार है।' यह देखकर उनका आत्मविश्वास और दृढ़ हो गया। दूसरे दिन 39 रन बनाने के बाद उन्होंने मन में तय किया कि बस 61 रन और चाहिए और वे भी उस बोर्ड पर जगह पा सकती हैं।
स्मृति मंधाना की साझेदारी और प्रेरणा
यास्तिका ने स्मृति मंधाना के साथ लॉर्ड्स में की गई साझेदारी को 'किसी सपने के सच होने जैसा' बताया। उन्होंने कहा, 'जब से मैंने खेलना शुरू किया है, वह मेरे लिए प्रेरणा रही हैं। लॉर्ड्स में हम साथ खेल रहे थे और पार्टनरशिप कर रहे थे — दूसरे छोर से यह मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा था।' यास्तिका ने यह भी कहा कि मंधाना दोनों पारियों में शानदार खेल रही थीं, दुर्भाग्य से वे शतक से चूक गईं, लेकिन उनकी पारियाँ टीम के लिए बेहद अहम रहीं।
एसीएल चोट का संघर्ष और परिवार का साथ
सितंबर 2025 में विशाखापत्तनम के एक अभ्यास शिविर के दौरान यास्तिका के बाएँ घुटने में गंभीर एसीएल चोट लगी थी, जिसके बाद उन्हें सर्जरी और लंबे रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा। इस कठिन दौर में स्मृति मंधाना ने उनका हौसला बढ़ाया — मंधाना को भी जनवरी 2017 में महिला बिग बैश लीग (WBBL) के दौरान इसी तरह की चोट लगी थी। यास्तिका ने बताया कि कप्तान हरमनप्रीत कौर ने रिहैब के दौरान उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया। उनकी माँ रिहैब के छह महीनों तक बेंगलुरु में उनके साथ एयरबीएनबी में रहीं और खाना बनाती रहीं ताकि वे सकारात्मक माहौल में ठीक हो सकें।
महिला टेस्ट क्रिकेट और भविष्य की उम्मीद
कप्तान हरमनप्रीत कौर ने लॉर्ड्स टेस्ट जीत के बाद महिला क्रिकेट में अधिक टेस्ट मैच खेले जाने की वकालत की थी। यास्तिका ने इससे पूरी तरह सहमति जताई और कहा, 'महिलाओं के और टेस्ट मैच होने चाहिए। हम एक टीम के तौर पर टेस्ट क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं। हम और टेस्ट मैच खेलना चाहते हैं और मुझे लगता है कि भविष्य में ऐसा जरूर होगा।' टेस्ट से पहले यास्तिका ने अपने परिवार के साथ स्कॉटलैंड की तीन दिन की यात्रा की, जिसने उन्हें मानसिक रूप से तरोताज़ा कर दिया। परिवार से मिले अटूट प्यार और समर्थन को ही वे अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं — और लॉर्ड्स का यह शतक उसी ताकत का प्रमाण है।