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दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने NSF मान्यता के लिए आवेदन की घोषणा की

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दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने NSF मान्यता के लिए आवेदन की घोषणा की

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने योगासन भारत की NSF मान्यता रद्द की — और अब 1974 से सक्रिय योग फेडरेशन ऑफ इंडिया मैदान में है। फेडरेशन खेल मंत्रालय और IOA दोनों के दरवाजे खटखटाने की तैयारी में है, साथ ही 2027 की 11वीं एशियाई योग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने योगासन भारत को दी गई राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) मान्यता निरस्त कर दी।
योग फेडरेशन ऑफ इंडिया (YFI) ने युवा मामले एवं खेल मंत्रालय से NSF मान्यता के लिए औपचारिक आवेदन की घोषणा की।
फेडरेशन भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के साथ संबद्धता बहाल करने की प्रक्रिया भी शुरू करेगा।
वर्ष 1974 में स्थापित YFI 50 से अधिक वर्षों से प्रतिस्पर्धी योगासन के क्षेत्र में सक्रिय है।
2027 में होने वाली 11वीं एशियाई योग चैंपियनशिप के लिए भारतीय खिलाड़ियों की पहचान और प्रशिक्षण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है; 17 देशों के भाग लेने की संभावना।
फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ.
अनिरुद्ध गुप्ता और महासचिव डॉ.
अभिनव जोशी ने मंत्री डॉ.
मनसुख मांडविया और IOA अध्यक्ष पी.
उषा से मुलाकात का प्रयास करने की बात कही।

योग फेडरेशन ऑफ इंडिया (YFI) ने 17 जुलाई 2025 को घोषणा की कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया आदेश के बाद युवा मामले एवं खेल मंत्रालय से राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में नई मान्यता के लिए औपचारिक आवेदन करेगा। साथ ही फेडरेशन ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के साथ अपनी संबद्धता बहाल करने की प्रक्रिया भी आरंभ करने का संकल्प लिया है।

अदालत का फैसला और पृष्ठभूमि

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में योगासन भारत को राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में दी गई मान्यता को निरस्त कर दिया। अदालत ने युवा मामले एवं खेल मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप पारदर्शी, निष्पक्ष और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए नई मान्यता प्रक्रिया शुरू करे। योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस फैसले को भारतीय खेल प्रशासन में पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भारत सरकार ने योगासन को खेल के रूप में विकसित करने की पहल की थी। फेडरेशन के महासचिव डॉ. अभिनव जोशी के अनुसार, उस प्रक्रिया में अपेक्षित लोकतांत्रिक और समावेशी प्रशासनिक ढाँचा विकसित नहीं हो सका और पूरी व्यवस्था एक सीमित संरचना तक सिमट गई — जिसके कारण योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उस प्रक्रिया से अलग होने का निर्णय लिया था।

फेडरेशन का आगामी रोडमैप

फेडरेशन ने बताया कि वह केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी. उषा से मुलाकात का प्रयास करेगा। इस दौरान संगठन प्रतिस्पर्धी योगासन के विकास का दीर्घकालिक रोडमैप प्रस्तुत करेगा और राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत पहचान बहाल करने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा करेगा।

फेडरेशन का कहना है कि नई मान्यता प्रक्रिया सभी पात्र संगठनों को समान अवसर देने वाली होनी चाहिए। संगठन के अनुसार, यदि प्रक्रिया पूरी तरह राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप संचालित होती है, तो इससे योगासन प्रशासन की विश्वसनीयता और संस्थागत मजबूती में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

फेडरेशन की ऐतिहासिक भूमिका

वर्ष 1974 में स्थापित योग फेडरेशन ऑफ इंडिया देश में प्रतिस्पर्धी योगासन को बढ़ावा देने वाले सबसे पुराने संगठनों में शामिल है। 50 से अधिक वर्षों में फेडरेशन ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है, तकनीकी मानकों का विकास किया है, और निर्णायकों व प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। संगठन का उद्देश्य केवल मान्यता प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसा प्रशासनिक ढाँचा तैयार करना है जिसमें पारदर्शिता, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और खिलाड़ियों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता हो।

नेतृत्व की प्रतिक्रिया

योग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्ध गुप्ता ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला योगासन के भविष्य को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि संगठन नई मान्यता प्रक्रिया में पूरी गंभीरता से भाग लेगा और भारतीय ओलंपिक संघ के साथ संबद्धता बहाल करने की दिशा में काम करेगा।

डॉ. गुप्ता ने यह भी बताया कि 2027 में आयोजित होने वाली 11वीं एशियाई योग चैंपियनशिप की तैयारियाँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इस प्रतियोगिता में एशिया के 17 देशों के राष्ट्रीय महासंघों के भाग लेने की संभावना है। भारतीय खिलाड़ियों की पहचान, चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।

आगे क्या होगा

महासचिव डॉ. जोशी ने युवा मामले एवं खेल मंत्रालय से आग्रह किया है कि नई मान्यता प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप हो। फेडरेशन का मानना है कि निष्पक्ष प्रक्रिया से न केवल भारतीय योगासन प्रशासन को मजबूती मिलेगी, बल्कि खिलाड़ियों को दीर्घकालिक, पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मंच भी मिलेगा। अब सभी की निगाहें मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय खेल संस्थाओं में जवाबदेही की बढ़ती माँग का संकेत है — जो क्रिकेट से लेकर कुश्ती तक कई संघों में देखी जा चुकी है। असली सवाल यह है कि क्या मंत्रालय इस बार वास्तव में राष्ट्रीय खेल विकास संहिता की भावना के अनुरूप पारदर्शी प्रक्रिया अपनाएगा, या फिर एक नई संस्था को पुरानी खामियों के साथ मान्यता मिल जाएगी। 2019 की प्रक्रिया में जो 'सीमित ढाँचे' की शिकायत YFI ने उठाई, वह भारतीय खेल प्रशासन की उस पुरानी बीमारी की ओर इशारा करती है जिसमें संस्थागत समावेश की बजाय चुनिंदा नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाती है। 2027 की एशियाई चैंपियनशिप की समय-सीमा को देखते हुए मंत्रालय के पास लंबे इंतजार की गुंजाइश नहीं है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने योगासन भारत की मान्यता क्यों रद्द की?
दिल्ली हाई कोर्ट ने योगासन भारत को दी गई राष्ट्रीय खेल महासंघ की मान्यता इसलिए निरस्त की क्योंकि मान्यता प्रक्रिया राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं पाई गई। अदालत ने युवा मामले एवं खेल मंत्रालय को नई, विधिसम्मत प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
योग फेडरेशन ऑफ इंडिया (YFI) क्या है और यह कितना पुराना संगठन है?
योग फेडरेशन ऑफ इंडिया की स्थापना वर्ष 1974 में हुई थी और यह देश में प्रतिस्पर्धी योगासन को बढ़ावा देने वाले सबसे पुराने संगठनों में से एक है। 50 से अधिक वर्षों में इसने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है और तकनीकी मानकों का विकास किया है।
YFI अब आगे क्या कदम उठाएगा?
फेडरेशन युवा मामले एवं खेल मंत्रालय से NSF मान्यता के लिए औपचारिक आवेदन करेगा और भारतीय ओलंपिक संघ के साथ संबद्धता बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके अलावा फेडरेशन मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और IOA अध्यक्ष पी. टी. उषा से मुलाकात का प्रयास करेगा।
11वीं एशियाई योग चैंपियनशिप 2027 की क्या स्थिति है?
एशियन योग फेडरेशन के तत्वावधान में 2027 में होने वाली 11वीं एशियाई योग चैंपियनशिप में एशिया के 17 देशों के भाग लेने की संभावना है। YFI ने बताया कि भारतीय खिलाड़ियों की पहचान, चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
नई NSF मान्यता प्रक्रिया से भारतीय योगासन खिलाड़ियों को क्या फायदा होगा?
यदि नई मान्यता प्रक्रिया राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप पारदर्शी तरीके से पूरी होती है, तो खिलाड़ियों को एक स्थिर, पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मंच मिलेगा। इससे सरकारी वित्त पोषण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी और दीर्घकालिक करियर के अवसर बेहतर होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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