दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने NSF मान्यता के लिए आवेदन की घोषणा की
सारांश
मुख्य बातें
योग फेडरेशन ऑफ इंडिया (YFI) ने 17 जुलाई 2025 को घोषणा की कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया आदेश के बाद युवा मामले एवं खेल मंत्रालय से राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में नई मान्यता के लिए औपचारिक आवेदन करेगा। साथ ही फेडरेशन ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के साथ अपनी संबद्धता बहाल करने की प्रक्रिया भी आरंभ करने का संकल्प लिया है।
अदालत का फैसला और पृष्ठभूमि
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में योगासन भारत को राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में दी गई मान्यता को निरस्त कर दिया। अदालत ने युवा मामले एवं खेल मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप पारदर्शी, निष्पक्ष और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए नई मान्यता प्रक्रिया शुरू करे। योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस फैसले को भारतीय खेल प्रशासन में पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में भारत सरकार ने योगासन को खेल के रूप में विकसित करने की पहल की थी। फेडरेशन के महासचिव डॉ. अभिनव जोशी के अनुसार, उस प्रक्रिया में अपेक्षित लोकतांत्रिक और समावेशी प्रशासनिक ढाँचा विकसित नहीं हो सका और पूरी व्यवस्था एक सीमित संरचना तक सिमट गई — जिसके कारण योग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उस प्रक्रिया से अलग होने का निर्णय लिया था।
फेडरेशन का आगामी रोडमैप
फेडरेशन ने बताया कि वह केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी. टी. उषा से मुलाकात का प्रयास करेगा। इस दौरान संगठन प्रतिस्पर्धी योगासन के विकास का दीर्घकालिक रोडमैप प्रस्तुत करेगा और राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत पहचान बहाल करने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा करेगा।
फेडरेशन का कहना है कि नई मान्यता प्रक्रिया सभी पात्र संगठनों को समान अवसर देने वाली होनी चाहिए। संगठन के अनुसार, यदि प्रक्रिया पूरी तरह राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप संचालित होती है, तो इससे योगासन प्रशासन की विश्वसनीयता और संस्थागत मजबूती में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
फेडरेशन की ऐतिहासिक भूमिका
वर्ष 1974 में स्थापित योग फेडरेशन ऑफ इंडिया देश में प्रतिस्पर्धी योगासन को बढ़ावा देने वाले सबसे पुराने संगठनों में शामिल है। 50 से अधिक वर्षों में फेडरेशन ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है, तकनीकी मानकों का विकास किया है, और निर्णायकों व प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। संगठन का उद्देश्य केवल मान्यता प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसा प्रशासनिक ढाँचा तैयार करना है जिसमें पारदर्शिता, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और खिलाड़ियों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
नेतृत्व की प्रतिक्रिया
योग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. अनिरुद्ध गुप्ता ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला योगासन के भविष्य को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि संगठन नई मान्यता प्रक्रिया में पूरी गंभीरता से भाग लेगा और भारतीय ओलंपिक संघ के साथ संबद्धता बहाल करने की दिशा में काम करेगा।
डॉ. गुप्ता ने यह भी बताया कि 2027 में आयोजित होने वाली 11वीं एशियाई योग चैंपियनशिप की तैयारियाँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इस प्रतियोगिता में एशिया के 17 देशों के राष्ट्रीय महासंघों के भाग लेने की संभावना है। भारतीय खिलाड़ियों की पहचान, चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
आगे क्या होगा
महासचिव डॉ. जोशी ने युवा मामले एवं खेल मंत्रालय से आग्रह किया है कि नई मान्यता प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और राष्ट्रीय खेल विकास संहिता के अनुरूप हो। फेडरेशन का मानना है कि निष्पक्ष प्रक्रिया से न केवल भारतीय योगासन प्रशासन को मजबूती मिलेगी, बल्कि खिलाड़ियों को दीर्घकालिक, पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मंच भी मिलेगा। अब सभी की निगाहें मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।