योगासन को खेल का दर्जा मिले: योगासन भारत अध्यक्ष उदित सेठ का PM मोदी का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
योगासन भारत के अध्यक्ष और वर्ल्ड योगासन के उपाध्यक्ष उदित सेठ ने कहा है कि योगासन को विशुद्ध रूप से एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए, न कि केवल आध्यात्मिक गतिविधि के तौर पर। राष्ट्र प्रेस से बातचीत में सेठ ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के मार्गदर्शन ने इस खेल के वैश्विक विस्तार की रूपरेखा को आकार दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
सेठ के अनुसार, योगासन का सफर अब केवल मुकाबलों और मेडल तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण इकोसिस्टम बनाने पर केंद्रित है — जिसमें संस्थागत समर्थन, कमर्शियल स्थिरता, वर्ल्ड-क्लास प्रस्तुति और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत जब खुद को खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है, तब योगासन एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश
सेठ ने राष्ट्र प्रेस को बताया, “प्रधानमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जब हम योगासन खेल की बात करते हैं, तो हमें इसे एक खेल की तरह ही मानना चाहिए। इसे मुख्य रूप से एक आध्यात्मिक गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसे ग्लोबल होना चाहिए। इसका एक मजबूत फेडरेशन ढांचा होना चाहिए। इसकी कमेंट्री वर्ल्ड-क्लास होनी चाहिए, और हमें इंटरनेशनल भागीदारी को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना चाहिए।”
सेठ ने जोड़ा कि सोच में इस स्पष्टता ने योगासन को सिर्फ सांस्कृतिक या स्वास्थ्य-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़ने में मदद की है।
SAI और सरकारी ढांचे की भूमिका
उन्होंने कहा, “भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने भी ACTC जैसे कार्यक्रमों के जरिए मदद देकर और यह पक्का करके कि चैंपियनशिप को राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों से समर्थन मिले, एक अहम भूमिका निभाई है।” सेठ का मानना है कि खेल, शिक्षा और कूटनीतिक संस्थाओं के बीच तालमेल ही योगासन के दीर्घकालिक भविष्य की कुंजी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर अनुभव से मिली सीख
खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्यमिता में करीब दो दशक के अनुभव वाले सेठ ने पहले भारत के सबसे बड़े खेल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक, ‘द एरिना बाय ट्रांसस्टेडिया’ को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, “मुझे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) दौर के दौरान हमारे प्रधानमंत्री के साथ करीब से काम करने का मौका मिला। मैंने उनके काम करने के तरीके और राष्ट्र-निर्माण के बारे में बहुत कुछ सीखा। हम उसी सोच को योगासन की यात्रा में भी लाना चाहते हैं।”
प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में योगासन
आज इस खेल में स्पष्ट जजिंग पैमाने, कठिनाई-आधारित कैटेगरी, चैलेंज राउंड, इलेक्ट्रॉनिक स्कोरिंग सिस्टम और कई इवेंट फॉर्मेट शामिल हैं। एथलीट अकेले, जोड़ी, रिदमिक और आर्टिस्टिक श्रेणियों में मुकाबला करते हैं, और प्रदर्शन को तकनीकी व कलात्मक दोनों मानकों पर परखा जाता है।
सेठ का तर्क है कि अगली चुनौती इस खेल को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और वैश्विक दर्शकों के लिए आकर्षक बनाना है — जहाँ टेक्नोलॉजी, ब्रॉडकास्टिंग और प्रोडक्शन की गुणवत्ता निर्णायक भूमिका निभाएगी।
भारत की अपनी देन
सेठ का मानना है कि अधिकतर वैश्विक खेलों के विपरीत — जिन्हें भारत ने बाहर से अपनाया — योगासन देश को अंतरराष्ट्रीय खेल जगत को कुछ मौलिक देने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के शीर्ष एथलीट पहले से ही लचीलापन, रिकवरी, संतुलन और मानसिक तैयारी के लिए योग को अपना चुके हैं, जिससे इसकी वैश्विक प्रासंगिकता पुख्ता होती है। आने वाले समय में योगासन परंपरा और आधुनिकता के बीच पुल बनकर भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दे सकता है।