बेन स्टोक्स के संन्यास पर युवराज सिंह का भावुक संदेश: 'वापस उठने की काबिलियत ही महान बनाती है'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर युवराज सिंह ने 30 जून 2026 को इंग्लैंड के दिग्गज क्रिकेटर बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा पर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भावुक श्रद्धांजलि पोस्ट की। युवराज ने स्टोक्स के 15 साल के करियर में विपरीत परिस्थितियों से उबरने की उनकी अदम्य क्षमता को उनकी सबसे बड़ी विरासत बताया।
युवराज का भावुक संदेश
युवराज ने एक्स पर लिखा, "वर्ल्ड कप फाइनल की एक ऐसी पारी जिसे देखने वाला कोई भी कभी नहीं भूलेगा। हेडिंग्ले में नाबाद 135 रन की पारी जिसने यह फिर से लिख दिया कि क्या मुमकिन था। मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात करने की हिम्मत, जब ज्यादातर लोग ऐसा नहीं करते। अपने पिता को खोना। और हर बार वापस आना। मुझे पता है कि एक दिन दुनिया में टॉप पर होना और अगले दिन सबसे निचले स्तर पर होना कैसा लगता है, और मैंने तुममें वही सफर देखा।"
युवराज ने आगे लिखा, "यही अच्छे को सच में महान से अलग करता है। रिकॉर्ड नहीं। ट्रॉफी नहीं। वापस उठने की काबिलियत। 15 साल। दो वर्ल्ड कप विनर मेडल। एक कप्तान जिसने अपनी टीम को यकीन दिलाया कि कुछ भी मुमकिन है। सबसे अच्छे लोगों में से एक जिसे खेल हमेशा याद रखेगा। एक जबरदस्त करियर के लिए बधाई। खेल तुम्हें याद करेगा, बेन। अगले चैप्टर का मजा लो। तुमने यह कमाया है।"
स्टोक्स का करियर: आँकड़ों में
35 वर्षीय बेन स्टोक्स ने 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। डेढ़ दशक के इस सफर में उन्होंने 122 टेस्ट में 7,273 रन (14 शतक, 37 अर्धशतक) और 252 विकेट लिए। 114 वनडे में 3,463 रन (5 शतक, 24 अर्धशतक) और 74 विकेट, तथा 43 टी20 मैचों में 585 रन और 26 विकेट उनके नाम दर्ज हैं।
करियर की बड़ी उपलब्धियाँ
स्टोक्स इंग्लैंड के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। उनके करियर में दो विश्व कप खिताब, एशेज श्रृंखला में यादगार प्रदर्शन और इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान के रूप में 'बाज़बॉल' शैली से क्रिकेट को नया आयाम देना शामिल है। हेडिंग्ले 2019 में उनकी नाबाद 135 रन की पारी को क्रिकेट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पारियों में गिना जाता है।
युवराज और स्टोक्स: संघर्ष की साझा भाषा
गौरतलब है कि युवराज सिंह स्वयं कैंसर से जूझने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी कर चुके हैं, इसलिए उनकी श्रद्धांजलि में एक व्यक्तिगत गहराई है। स्टोक्स ने भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए क्रिकेट से ब्रेक लिया था और अपने पिता के निधन के बाद भी मैदान पर लौटे — यही संघर्ष युवराज को स्टोक्स के सबसे करीब लाता है। यह ऐसे समय में आया है जब क्रिकेट जगत में खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की संस्कृति धीरे-धीरे विकसित हो रही है।
आगे क्या
स्टोक्स के संन्यास के बाद इंग्लैंड की टेस्ट टीम को नए ऑलराउंडर की तलाश होगी। उनकी विरासत न केवल आँकड़ों में, बल्कि उस नेतृत्व शैली में भी जीवित रहेगी जिसने इंग्लैंड क्रिकेट को आक्रामक और आत्मविश्वासी बनाया।