16वें भारत-जापान समिट पर जापानी मीडिया की सराहना, रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मिली नई मजबूती
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच 3 जुलाई को नई दिल्ली में संपन्न हुए 16वें भारत-जापान वार्षिक समिट को जापानी मीडिया ने व्यापक सकारात्मक कवरेज दी है। प्रमुख जापानी अखबारों और न्यूज़ आउटलेट्स ने इस समिट को रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों की गहराती जड़ों का प्रमाण बताया है।
समिट की पृष्ठभूमि और संदर्भ
द जापान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह समिट ऐसे नाज़ुक समय में हुई जब चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव, सप्लाई चेन की कमज़ोरियों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जापान की चिंताएँ गहरी हो रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि 'टोक्यो के लिए यह समिट ऐसे समय में हो रहा है जब चीन के लगातार आर्थिक फायदे के इस्तेमाल को लेकर बीजिंग के साथ तनाव बढ़ रहा है, जिसमें डुअल-यूज़ वाले सामानों से जुड़े हालिया एक्सपोर्ट कंट्रोल उपाय और जापानी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करना शामिल है।'
अखबार ने यह भी रेखांकित किया कि 'ताकाइची सरकार के लिए सप्लाई चेन में मजबूती को एक कूटनीतिक प्राथमिकता के तौर पर देखते हुए, भारत अपने बड़े बाज़ार, बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग बेस और तकनीकी कार्यबल की विशाल उपलब्धता के कारण एक आकर्षक साझेदार बन गया है।'
चीन कारक और हिंद-प्रशांत रणनीति
क्योडो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, जापान भारत को एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को आगे बढ़ाने में एक अहम साझेदार मानता है। रिपोर्ट में बताया गया कि जनवरी से चीन ने जापान जाने वाले डुअल-यूज़ वस्तुओं — जिनमें संभवतः रेयर अर्थ मिनरल्स भी शामिल हैं — के शिपमेंट पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। इसके अलावा, पिछले साल नवंबर में ताइवान पर प्रधानमंत्री ताकाइची की टिप्पणियों के बाद चीन-जापान संबंध तनावपूर्ण हो गए थे।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग में बड़ा कदम
नई दिल्ली में 90 मिनट की बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। द जापान न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान ने भारत को यूनिकॉर्न (UNICORN) कम्युनिकेशन एंटेना निर्यात करने से संबंधित एक महत्वपूर्ण समझौता किया — ये एंटेना अभी जापानी मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के मोगामी-क्लास डिस्ट्रॉयर पर लगे हैं। जापान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने हिंद महासागर में संयुक्त प्रशिक्षण को गहरा करने, नौसैनिक जहाज़ों के रखरखाव में सहयोग और 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा उपकरण व तकनीक हस्तांतरण पर भी सहमति जताई।
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच पिछले साल संशोधित की गई सुरक्षा सहयोग संयुक्त घोषणा के आधार पर इस साल के अंत तक जापान-भारत '2+2' वार्ता आयोजित करने का निर्देश भी संबंधित विभागों को दिया गया है।
नेताओं के बयान
समिट के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा, 'भारत एक भरोसेमंद साझेदार है जिसके साथ हमारा रणनीतिक दृष्टिकोण साझा है। हम अपने संबंध को नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे।' दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व और चीन में हो रहे घटनाक्रमों के मद्देनज़र ऊर्जा और ज़रूरी मिनरल्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी आर्थिक सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
आगे क्या होगा
इस समिट के बाद भारत-जापान संबंध एक नए रणनीतिक मुकाम पर पहुँच गए हैं। इस साल के अंत तक प्रस्तावित '2+2' मंत्रिस्तरीय बातचीत से रक्षा और विदेश नीति समन्वय को और धार मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक दबाव तेज़ हो रहे हैं और भारत-जापान की साझेदारी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को नया आकार देने में अहम भूमिका निभा सकती है।