त्रिपुरा: बांग्लादेश सीमा पर BSF जवानों पर हमले में 18 गिरफ्तार, CM माणिक साहा ने बुलाई हाई-लेवल बैठक
सारांश
मुख्य बातें
सिपाहीजाला जिले, त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा के पास सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों पर हुए हमले के मामले में अब तक कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें तीन महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस ने गुरुवार रात और शुक्रवार तड़के सिपाहीजाला के अलग-अलग इलाकों से आठ और आरोपियों को हिरासत में लिया। यह हमला 2 नवंबर 2026 को कलामचौरा थाना क्षेत्र के आशाबाड़ी गाँव में हुआ था।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 2 नवंबर को BSF जवानों ने भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास गाँजे की तस्करी करने की कोशिश कर रहे कुछ संदिग्धों को रोका। इसके बाद लगभग 50 पुरुषों और महिलाओं की भीड़ ने BSF जवानों को घेरकर उन पर हमला कर दिया। इस हमले में एक कंपनी कमांडर समेत तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।
आरोप है कि हमलावरों ने BSF के एक जवान से पंप-एक्शन गन (PAG) भी छीन ली और BSF के एक वाहन को क्षति पहुँचाई। घटना के दौरान संदिग्ध हमलावरों में से एक व्यक्ति भी घायल हुआ।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि घटना के तुरंत बाद सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया, जो अभी भी जारी है। सभी 18 आरोपियों पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव अधिनियम, 1984 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पहले गिरफ्तार हुए 10 आरोपियों को अदालत में पेश किया जा चुका है और अदालत के आदेश पर उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। नव-गिरफ्तार 8 आरोपियों को जल्द ही सिपाहीजाला जिले की स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गुरुवार रात अगरतला के ITFT कॉन्फ्रेंस हॉल में एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्य प्रशासन, पुलिस, BSF, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
साहा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हमले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, सीमा पार तस्करी के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाए और राज्य में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा इंतज़ामों को और मज़बूत किया जाए।
व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करी, विशेषकर गाँजे और फेंसेडिल जैसे मादक पदार्थों की तस्करी, एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बनी हुई है। गौरतलब है कि त्रिपुरा की 856 किलोमीटर लंबी बांग्लादेश सीमा पर BSF को अक्सर ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है जहाँ स्थानीय लोग तस्करों की ओर से कार्रवाई करने की कोशिश करते हैं। BSF जवान से हथियार छीने जाने की घटना इसे विशेष रूप से गंभीर मामला बनाती है।
आगे क्या होगा
पुलिस के अनुसार शेष फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान जारी है। जाँच एजेंसियाँ इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि तस्करी नेटवर्क किस हद तक संगठित है और इसके तार सीमा पार तक फैले हैं या नहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह संभव है कि केंद्रीय एजेंसियाँ भी जाँच में शामिल हों।