गोल्ड ईटीएफ फोलियो तीन साल में 2.6 गुना उछले, लार्ज कैप फंडों को पछाड़ा; विशेषज्ञों ने FOMO को बताया कारण
सारांश
मुख्य बातें
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेशकों की दिलचस्पी पिछले तीन वर्षों में अभूतपूर्व गति से बढ़ी है — सितंबर 2023 से अब तक फोलियो की संख्या 2.6 गुना तक पहुँच चुकी है, जो इसी अवधि में लार्ज कैप इक्विटी फंडों की 1.3 गुना वृद्धि से दोगुनी है। ओम्नीसाइंस कैपिटल द्वारा संकलित आँकड़ों के अनुसार, यह उछाल मुख्य रूप से सोने की कीमतों में लगातार तेज़ी की प्रतिक्रिया में आया है, न कि किसी व्यापक निवेश रणनीति के तहत।
मुख्य आँकड़े: कितनी तेज़ रफ़्तार है वृद्धि
आँकड़ों के अनुसार, गोल्ड ईटीएफ का कुल प्रबंधित संपत्ति (AUM) बढ़कर लगभग ₹1.9 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। यह लार्ज कैप इक्विटी फंडों के ₹4 लाख करोड़ के AUM का लगभग आधा है — और यह अनुपात तेज़ी से बढ़ रहा है।
ओम्नीसाइंस कैपिटल का कहना है कि लार्ज कैप फंडों की तुलना में सोने की हिस्सेदारी अब लगभग 47 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जिसे अत्यधिक ऊँचा माना जा सकता है। इक्विटी फंडों की तुलना में अंतर्निहित परिसंपत्तियों के रिटर्न को समायोजित करने के बाद भी यह स्पष्ट होता है कि निवेशक सोने की कीमतों में तेज़ी से प्रेरित होकर इस वर्ग में धन लगा रहे हैं।
FOMO की भूमिका: विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ओम्नीसाइंस कैपिटल के अध्यक्ष एवं मुख्य पोर्टफोलियो प्रबंधक अश्विनी शामी के अनुसार, यह व्यवहार 'फियर ऑफ मिसिंग आउट' (FOMO) — यानी तेज़ी से बढ़ती कीमतों वाले निवेश में पीछे छूट जाने के डर — को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "यदि किसी अन्य परिसंपत्ति की कीमतें इसी तरह बढ़तीं, तो निवेशकों की प्रतिक्रिया भी लगभग ऐसी ही होती।"
शामी ने गोल्ड ईटीएफ की ओर इस आक्रामक झुकाव को अनुशासित एसेट एलोकेशन से महत्वपूर्ण विचलन बताया। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और सोने से भविष्य में मिलने वाले संभावित रिटर्न को लेकर अत्यधिक आशावादी न हों।
आदर्श एसेट एलोकेशन बनाम मौजूदा स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी सामान्यतः 5 से 10 प्रतिशत रखने की सलाह दी जाती है। सभी वैकल्पिक परिसंपत्तियों — जैसे प्राइवेट इक्विटी, स्ट्रक्चर्ड डेट, स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) — का संयुक्त हिस्सा प्रायः 10 से 20 प्रतिशत के बीच रखा जाता है।
रिपोर्ट के विश्लेषण में यह भी संकेत दिया गया है कि निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी अब इस अनुशंसित सीमा से ऊपर पहुँचती दिख रही है, जो दीर्घकालिक जोखिम उत्पन्न कर सकती है।
सोने की कीमतों पर जोखिम कारक
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि केंद्रीय बैंकों की मज़बूत खरीदारी अकेले सोने की कीमतों को लगातार ऊँचे स्तर पर बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। यदि निवेशक बेहतर प्रतिफल देने वाले फिक्स्ड इनकम साधनों की ओर रुख करते हैं, तो सोने की माँग पर असर पड़ सकता है।
विश्लेषण के अनुसार, अल्प और मध्यम अवधि के ऋण साधनों में निवेश बढ़ने से केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का प्रभाव संतुलित हो सकता है और वैश्विक सोने की कीमतों में अत्यधिक तेज़ी पर अंकुश लग सकता है। अश्विनी शामी ने दीर्घकालिक आधार पर सोने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा, लेकिन यह धारणा नकारी कि मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और सोने की कीमतें एक साथ लगातार बढ़ती रहेंगी।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक ब्याज दरों में कमी आती है या अमेरिकी डॉलर मज़बूत होता है, तो गोल्ड ईटीएफ में उमड़ी यह भीड़ पलट सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाज़ार की भावना के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और दीर्घकालिक लक्ष्यों के आधार पर पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन करें।