त्रिपुरा: BSF जवानों पर हमले के 9 फरार आरोपियों के बांग्लादेश भागने की आशंका, सीमा पर हाई अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा पुलिस ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है, ताकि सिपाहीजला जिले में BSF जवानों पर हुए हमले के 9 फरार आरोपी पड़ोसी देश में शरण न ले सकें। 4 नवंबर 2026 को पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मामले में दर्ज एफआईआर में कुल 19 हमलावरों के नाम हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, सोमवार रात BSF जवानों ने आशाबाड़ी इलाके में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुछ भारतीय और बांग्लादेशी तस्करों को कथित तौर पर गांजे की तस्करी करते देखा। जवान तुरंत मौके पर पहुँचे और एक भारतीय तस्कर को पकड़ लिया, जबकि बाड़ के दूसरी ओर मौजूद बांग्लादेशी तस्कर भाग निकले।
एक अन्य भारतीय तस्कर भागने में सफल रहा और उसने ग्रामीणों को भड़काते हुए कथित तौर पर यह अफवाह फैलाई कि BSF जवानों ने उसके साथ मारपीट की है। इसके बाद करीब 50 पुरुष और महिलाएँ मौके पर जमा हो गईं और उन्होंने BSF के वाहन को घेरकर जवानों पर हमला कर दिया।
इस हमले में कंपनी कमांडर समेत तीन BSF कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमलावरों पर एक जवान से पंप एक्शन गन छीनने और BSF के वाहन को नुकसान पहुँचाने का भी आरोप है। हमले में एक हमलावर भी घायल बताया गया है।
गिरफ्तारी और तलाशी अभियान
अब तक तीन महिलाओं समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 9 आरोपी अभी भी फरार हैं। पुलिस ने कहा कि हमले के तुरंत बाद शुरू किया गया तलाशी अभियान लगातार जारी है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
आशंका जताई जा रही है कि फरार आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर बांग्लादेश में शरण ले सकते हैं। इसी को देखते हुए BSF को सीमा पर कड़ी निगरानी रखने और किसी भी अवैध आवाजाही को रोकने के लिए अलर्ट जारी किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों का दौरा
BSF त्रिपुरा फ्रंटियर की महानिरीक्षक प्रिंसी रानी और सिपाहीजला जिले के पुलिस अधीक्षक बिजॉय देबबर्मा ने मंगलवार को अन्य अधिकारियों के साथ घटनास्थल आशाबाड़ी का दौरा किया। BSF आईजी ने जवानों को सीमा सुरक्षा की सभी मानक प्रक्रियाओं का अतिरिक्त सतर्कता के साथ पालन करने का निर्देश दिया।
बीएसएफ आईजी ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से भी मुलाकात कर उन्हें घटना की पूरी जानकारी दी। बुधवार को भी क्षेत्र में तनाव बना रहा, जिसके चलते BSF, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स और पुलिस ने संयुक्त रूप से फ्लैग मार्च और क्षेत्र प्रभुत्व अभियान चलाया।
BSF का बयान और रुख
BSF ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा, तस्करी पर रोक और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए बल पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बल ने स्थानीय निवासियों से शांति बनाए रखने और सुरक्षा कार्यों में सहयोग करने की अपील की।
बयान में विशेष रूप से कहा गया कि हमला होने के बावजूद जवानों ने संयम का परिचय दिया और घातक बल का उपयोग नहीं किया, जो मानव जीवन की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बल ने चेतावनी दी कि ड्यूटी पर तैनात जवानों को डराने या उनके कार्य में बाधा डालने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा।
पृष्ठभूमि और संवेदनशील सीमा
गौरतलब है कि त्रिपुरा में इससे पहले भी सुरक्षाकर्मियों पर हमले हो चुके हैं। 16 अक्टूबर 2017 को तस्करों के वाहन ने BSF की 145वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट दीपक कुमार मंडल को कुचल दिया था, जिनका 20 अक्टूबर 2017 को निधन हो गया था। इसी प्रकार 21 नवंबर 2019 को त्रिपुरा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर दुर्गा कुमार ह्रांगखावल की भी ड्यूटी के दौरान कथित तस्करों द्वारा वाहन से कुचलकर हत्या की गई थी।
त्रिपुरा की बांग्लादेश के साथ 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है और राज्य तीन ओर से बांग्लादेश से घिरा होने के कारण अवैध घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। आगे फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और सीमा की सुरक्षा व्यवस्था पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।