केरल हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी थाचनकारी को लगाई कड़ी फटकार, दुबई नौकरी की अर्जी पर जमानत रद्द करने की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केरल उच्च न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को दोषी ठहराए गए सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक टॉमिन जे. थाचनकारी को कड़ी फटकार लगाई, जब उन्होंने रोज़गार के लिए दुबई जाने की अनुमति माँगी — और यह तब, जब वे हिरासत की अपनी पूरी अवधि जेल के बजाय पूजापुरा सेंट्रल जेल के अस्पताल में बिता चुके थे। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने चेतावनी दी कि अदालत उनकी जमानत रद्द करने पर गंभीरता से विचार कर सकती है।
मामले की पृष्ठभूमि
कोट्टायम विजिलेंस कोर्ट ने 17 सितंबर को थाचनकारी को चार साल के कठोर कारावास और ₹30.84 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी। उन्हें 2003 से 2007 के बीच अपनी ज्ञात आय से 52.33 प्रतिशत अधिक, यानी ₹30.84 लाख की संपत्ति अर्जित करने का दोषी पाया गया था। थाचनकारी केरल के पहले पूर्व डीजीपी हैं जिन्हें किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद जेल भेजा गया।
अस्पताल में पूरी हिरासत, अब विदेश जाने की माँग
न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने पूजापुरा सेंट्रल जेल के अधीक्षक के निर्देश पर जमा कराए गए मेडिकल रिकॉर्ड की जाँच की। रिकॉर्ड से यह सामने आया कि हिरासत के दौरान बिताए गए पूरे चार सप्ताह थाचनकारी जेल अस्पताल में भर्ती रहे — एक दिन भी जेल की बैरक में नहीं गए।
इस पर जज ने कड़ी टिप्पणी की: 'उन्हें भर्ती होने की तारीख से लेकर रिहाई की तारीख तक अस्पताल में रखा गया। वे एक दिन भी जेल में नहीं रहे। आराम से अस्पताल में रहे। वहाँ उन्हें 1,000 बीमारियाँ थीं, और अब कोई बीमारी नहीं है! अब वे दुबई जाकर नौकरी करना चाहते हैं। यह कैसे हो सकता है? कोर्ट के सामने झूठ न बोलें।'
अदालत की तीखी प्रतिक्रिया
न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति हिरासत के दौरान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देता रहा, वह अब विदेश में नौकरी करने के लिए स्वयं को पूरी तरह स्वस्थ कैसे बता सकता है। अदालत ने टिप्पणी की, 'जब वे जेल जाते हैं, तो जेल में रहने के बजाय अस्पताल में जाकर लेट जाते हैं। और जैसे ही बाहर आते हैं, एकदम स्वस्थ हो जाते हैं! ऐसा नहीं हो सकता।'
न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि इस तरह के आचरण को अदालत गंभीरता से ले रही है और जमानत रद्द करने का विकल्प मेज पर है।
जमानत और विदेश-यात्रा अर्जी की पृष्ठभूमि
केरल उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर को उनकी अपील का निपटारा होने तक सजा पर रोक लगाते हुए जमानत दी थी। इसके बाद थाचनकारी ने रोज़गार के सिलसिले में विदेश जाने के लिए जमानत की शर्तों में ढील माँगते हुए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया — जिस पर अदालत ने शुक्रवार को यह कड़ा रुख अपनाया।
आगे क्या होगा
इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह तीखी टिप्पणी संकेत देती है कि थाचनकारी की विदेश-यात्रा अर्जी को स्वीकृति मिलने की संभावना फिलहाल बेहद कम है। गौरतलब है कि यह मामला पुलिस अधिकारियों द्वारा हिरासत के दौरान अस्पताल में भर्ती होने की प्रवृत्ति पर भी व्यापक सवाल खड़े करता है।