2 नवंबर 2026
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केरल हाईकोर्ट का पूर्व डीजीपी थाचनकारी से सवाल: जेल में बीमार, विदेश में काम के लिए फिट कैसे?

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केरल हाईकोर्ट का पूर्व डीजीपी थाचनकारी से सवाल: जेल में बीमार, विदेश में काम के लिए फिट कैसे?

सारांश

जेल में भर्ती रहने का दावा करने वाले पूर्व डीजीपी थाचनकारी अब विदेश में काम करने की अनुमति माँग रहे हैं — केरल हाईकोर्ट ने इस विरोधाभास को पकड़ा और जेल अधीक्षक से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट तलब की। केरल के पहले दोषी ठहराए गए रिटायर्ड डीजीपी का यह मामला अब न्यायिक जाँच के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने 2 नवंबर 2026 को पूर्व डीजीपी टॉमिन जे.
थाचनकारी की विदेश यात्रा अनुमति याचिका पर तीखे सवाल उठाए।
बदरुद्दीन ने जेल में बीमारी के दावे और विदेश में काम की योजना के बीच विरोधाभास की ओर इशारा किया।
अदालत ने जेल अधीक्षक से रिपोर्ट माँगी — कितने दिन अस्पताल में भर्ती रहे, किन बीमारियों का इलाज हुआ।
थाचनकारी को कोट्टायम की अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले में चार वर्ष की सजा और ₹30.84 लाख जुर्माना सुनाया था।
15 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाई, लेकिन विदेश यात्रा पर प्रतिबंध बरकरार।
अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को निर्धारित।

केरल उच्च न्यायालय ने 2 नवंबर 2026 को कोच्चि में पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टॉमिन जे. थाचनकारी की विदेश यात्रा अनुमति याचिका पर तीखे सवाल उठाए। अदालत ने जेल में रहने के दौरान गंभीर बीमारी के उनके दावे और जमानत मिलने के बाद विदेश में नौकरी करने की उनकी योजना के बीच स्पष्ट विरोधाभास को रेखांकित किया।

अदालत की मौखिक टिप्पणी

जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने मौखिक रूप से कहा कि थाचनकारी अपनी 28 दिन की हिरासत के दौरान जेल अस्पताल में भर्ती रहे, जबकि अब वह काम के लिए विदेश जाने की अनुमति माँग रहे हैं। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने दो परस्पर विरोधाभासी बातें कही हैं।

अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी परिस्थितियों में इस प्रकार की राहत देने से न्यायपालिका पर जनता के भरोसे पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह टिप्पणी इस मामले की संवेदनशीलता को दर्शाती है।

जेल अधीक्षक से रिपोर्ट तलब

अदालत ने जेल अधीक्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट माँगी है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि थाचनकारी वास्तव में कितने दिन जेल अस्पताल में भर्ती रहे, उन्हें किन बीमारियों का उपचार दिया गया, और अपनी चार सप्ताह की हिरासत के दौरान वह कितने दिन अस्पताल से बाहर रहे।

अदालत के अनुसार इस रिपोर्ट से यह जाँचने में सहायता मिलेगी कि तथ्यों को देखते हुए उनका विदेश जाने का अनुरोध न्यायसंगत है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को निर्धारित है।

याचिका का आधार और जमानत की शर्त

रिटायर्ड डीजीपी थाचनकारी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी जमानत की उस शर्त में ढील माँगी है, जो उन्हें अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने से रोकती है। वह अपनी नौकरी पर लौटने के लिए विदेश जाना चाहते हैं।

गौरतलब है कि कोट्टायम स्थित जाँच आयुक्त और विशेष न्यायाधीश (सतर्कता) ने आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में उन्हें चार वर्ष की जेल और ₹30.84 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी। उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था।

हाईकोर्ट द्वारा सजा पर रोक

लगभग चार सप्ताह जेल में बिताने के बाद 15 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दी थी। हालाँकि अदालत की अनुमति के बिना भारत छोड़ने पर प्रतिबंध की शर्त अभी भी लागू है।

ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह

थाचनकारी केरल के पहले ऐसे रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हैं, जिन्हें दोषी ठहराए जाने के बाद जेल भेजा गया था। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि अब उनकी हिरासत अवधि और जेल में मिले चिकित्सा उपचार की हाईकोर्ट द्वारा बारीकी से जाँच की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला उन आरोपियों द्वारा चिकित्सा आधार पर राहत माँगने की प्रवृत्ति पर न्यायिक निगरानी की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों द्वारा चिकित्सा आधार पर कारागार-राहत और यात्रा-छूट माँगने की बढ़ती प्रवृत्ति; और दो, न्यायपालिका पर जनता के भरोसे को बनाए रखने का दबाव। हाईकोर्ट का जेल-मेडिकल रिकॉर्ड माँगना दर्शाता है कि अदालतें अब इस तरह के दावों को स्वतः स्वीकार करने के बजाय उनकी तथ्यात्मक जाँच करने लगी हैं। केरल के पहले दोषी ठहराए गए रिटायर्ड डीजीपी से जुड़ा यह मामला राज्य की पुलिस जवाबदेही के लिए एक ऐतिहासिक परीक्षण बन चुका है। 6 नवंबर की सुनवाई तय करेगी कि क्या यह विरोधाभास याचिका को खारिज करवाता है या थाचनकारी कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण दे पाते हैं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी थाचनकारी पर क्या सवाल उठाए?
अदालत ने जेल में गंभीर बीमारी के दावे और जमानत के बाद विदेश में काम करने की योजना के बीच के विरोधाभास पर सवाल उठाया। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में विदेश यात्रा की अनुमति देने से न्यायपालिका पर जनता के भरोसे पर असर पड़ सकता है।
टॉमिन जे. थाचनकारी को किस मामले में सजा हुई थी?
कोट्टायम की जाँच आयुक्त और विशेष न्यायाधीश (सतर्कता) अदालत ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए चार वर्ष की सजा और ₹30.84 लाख का जुर्माना सुनाया था। वह केरल के पहले रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक हैं जिन्हें इस तरह दोषी ठहराया गया।
थाचनकारी को जमानत कब और किस शर्त पर मिली?
15 अक्टूबर 2026 को केरल हाईकोर्ट ने लगभग चार सप्ताह की जेल के बाद उनकी सजा पर रोक लगाते हुए जमानत दी। हालाँकि अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर प्रतिबंध की शर्त अभी भी लागू है।
जेल अधीक्षक से कौन-सी रिपोर्ट माँगी गई है?
हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक से यह स्पष्ट करने को कहा है कि थाचनकारी चार सप्ताह की हिरासत में कितने दिन जेल अस्पताल में भर्ती रहे, उन्हें किन बीमारियों का इलाज मिला, और कितने दिन अस्पताल से बाहर रहे। यह रिपोर्ट 6 नवंबर की सुनवाई से पहले प्रस्तुत की जाएगी।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
केरल हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 को होगी, जिसमें जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर विदेश यात्रा की याचिका पर निर्णय होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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