थूथुकुडी अदालत ने डीएमके विधायक अनीता राधाकृष्णन और 6 परिजनों को ₹4.90 करोड़ के आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी किया
सारांश
मुख्य बातें
थूथुकुडी जिला सत्र न्यायालय ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को वरिष्ठ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता, तिरुचेंदूर से मौजूदा विधायक और तमिलनाडु के पूर्व आवास मंत्री अनीता आर. राधाकृष्णन को तथा उनके 6 परिजनों को करीब 20 वर्ष पुराने 'आय से अधिक संपत्ति' मामले में बरी कर दिया। उन पर अपने मंत्रिकाल के दौरान ज्ञात आय स्रोतों से परे ₹4.90 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने का आरोप था।
फैसले का ब्यौरा
थूथुकुडी जिला सत्र न्यायाधीश सुभा देवी ने शाम करीब 4 बजे यह निर्णय सुनाया। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों की जिरह पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। बरी होने के साथ ही लगभग दो दशकों से चली आ रही लंबी कानूनी लड़ाई का अंत हुआ।
मुख्य घटनाक्रम: मामले की पृष्ठभूमि
राधाकृष्णन ने 2001 से 2006 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) सरकार में आवास मंत्री के रूप में कार्य किया था। 2006 में सरकार बदलने और DMK प्रमुख एम. करुणानिधि के मुख्यमंत्री बनने के बाद डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (DVAC) ने राधाकृष्णन व उनके परिजनों के विरुद्ध मामला दर्ज किया था।
जाँचकर्ताओं के अनुसार, पूर्व मंत्री ने जाँच अवधि के दौरान अपनी वैध आय से ₹4.90 करोड़ अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की। यह मामला उल्लेखनीय इसलिए भी रहा क्योंकि इसे उसी DVAC ने दर्ज किया था जो DMK सरकार के अधीन काम करती थी — जबकि राधाकृष्णन बाद में DMK में शामिल हो गए।
आरोपी पक्षकार
राधाकृष्णन के साथ इस मामले में उनकी पत्नी जयंती, पुत्र अनंत पद्मनाभन, अनंत रामकृष्णन और अनंत महेश्वरन तथा उनके भाई शनमुगनंदन और शिवानंदन भी नामजद थे। अदालत ने सभी सात अभियुक्तों को बरी कर दिया।
राजनीतिक संदर्भ और प्रतिक्रिया
यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में विशेष रुचि का विषय रहा, क्योंकि राधाकृष्णन अपने राजनीतिक जीवन के विभिन्न चरणों में दोनों प्रमुख द्रविड़ दलों — AIADMK और DMK — से जुड़े रहे। फैसले के तुरंत बाद तूतीकुड़ी और तिरुचेंदूर में उनके समर्थकों ने जश्न मनाया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़े और मिठाइयाँ बाँटीं। गौरतलब है कि अदालत ने 3 नवंबर को ही यह फैसला सुनाने की तारीख पहले से निर्धारित की थी।
आगे क्या
यह फैसला तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में लंबे समय से लंबित भ्रष्टाचार मामलों की एक कड़ी के समापन का प्रतीक है। अभियोजन पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय में अपील किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालाँकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।