डीवीएसी का डीएमके नेता केएन नेहरू के तिरुचिरापल्ली आवास पर छापा, ₹634 करोड़ रिश्वत के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के पूर्व नगर प्रशासन मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) विधायक केएन नेहरू के खिलाफ सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (DVAC) ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 की सुबह बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई की। तिरुचिरापल्ली के थिल्लई नगर स्थित उनके आवास और कार्यालय परिसर पर 15 से अधिक DVAC अधिकारियों ने अचानक दबिश दी। यह कार्रवाई नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में भर्ती अनियमितताओं के संबंध में कथित तौर पर ₹634 करोड़ की रिश्वत लेने के आरोपों के आधार पर की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
सुबह तीन बोलेरो वाहनों में पहुँचे DVAC अधिकारियों ने थिल्लई नगर में नेहरू के आवास और कार्यालय परिसर को घेर लिया। इसके बाद परिसर के भीतर गहन तलाशी अभियान शुरू किया गया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र प्रवेश द्वार पर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया। अधिकारी दस्तावेजों की जाँच और साक्ष्यों के सत्यापन में जुटे रहे।
रिपोर्टों के अनुसार, तलाशी पूरी होने के बाद जब्त की गई सामग्री और मामले से जुड़े अन्य विवरणों पर DVAC की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया जा सकता है।
आरोपों की पृष्ठभूमि
यह पहली बार नहीं है जब DVAC ने केएन नेहरू के ठिकानों पर छापेमारी की हो। 5 सितंबर 2026 को भी DVAC अधिकारियों ने DMK विधायक केएन नेहरू और उनके भाई रविचंद्रन से जुड़ी 19 जगहों पर एक साथ तलाशी ली थी। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज़ हुआ है।
गौरतलब है कि मौजूदा आरोप नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े हैं — एक ऐसा विभाग जो नेहरू के पास मंत्री रहते हुए था।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस छापेमारी का समय विशेष रूप से ध्यान खींचता है। सूत्रों के अनुसार, केएन नेहरू के छोटे भाई रविचंद्रन के बेटे की शादी अगले कुछ दिनों में होनी है और परिवार उसकी तैयारियों में व्यस्त था। इन परिस्थितियों में हुई इस अचानक कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
विपक्षी दलों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नज़र इस मामले पर टिकी है, हालाँकि अभी तक किसी दल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आगे क्या होगा
DVAC अधिकारियों द्वारा एकत्रित दस्तावेज़ और साक्ष्य आगे की जाँच का आधार बनेंगे। यदि जाँच में ठोस प्रमाण मिलते हैं तो औपचारिक आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता है। इससे पहले हुई 5 सितंबर की तलाशी के बाद की स्थिति को देखते हुए, यह दूसरी बड़ी कार्रवाई मामले की गंभीरता को रेखांकित करती है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।