डीवीएसी की करूर में बड़ी छापेमारी: डीएमके नेता सेंथिल बालाजी के ठिकानों पर तलाशी, ₹1,397 करोड़ के भ्रष्टाचार की जांच
सारांश
मुख्य बातें
डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन (डीवीएसी) ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) नेता वी. सेंथिल बालाजी से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। करूर जिले में सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई यह तलाशी कथित भ्रष्टाचार के कई लंबित मामलों की जांच के तहत की गई। 10 से अधिक डीवीएसी अधिकारी पुलिस बल के साथ घंटों तक तलाशी अभियान में जुटे रहे।
कहाँ-कहाँ हुई तलाशी
अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान रामेश्वरपट्टी स्थित सेंथिल बालाजी के पुश्तैनी घर से शुरू हुआ। इसके अलावा उनके साथी सुब्रमणि के आवास, डीएमके पदाधिकारी भास्करन के घर और कोडाईनगर इलाके में कार्ति तथा रमेश के ठिकानों पर भी एक साथ तलाशी ली गई। अधिकारियों ने दस्तावेज़ों की गहन जाँच की।
कौन-से मामले हैं जांच में
सेंथिल बालाजी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लंबित हैं। इनमें सरकारी नौकरियों के बदले नकद लेने का कथित घोटाला (कैश-फॉर-जॉब्स स्कैम), तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (टीएएसएमएसी) में कथित ₹1,000 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएँ और ट्रांसफॉर्मर खरीद में कथित ₹397 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं। इन मामलों की जांच अलग-अलग एजेंसियाँ कर रही हैं।
अलग आपराधिक मामला भी जारी
उपरोक्त मामलों के अलावा सेंथिल बालाजी पर एक अलग आपराधिक मुकदमा भी चल रहा है, जो सत्ताधारी टीवीके सरकार को कथित तौर पर अस्थिर करने की साजिश से संबंधित है। इस मामले में अदालत ने उन्हें और उनके छोटे भाई अशोक कुमार को अग्रिम जमानत देते समय चेन्नई के ट्रिप्लीकेन पुलिस स्टेशन में रोज़ाना हाज़िरी की शर्त लगाई है।
जांच का फोकस
अधिकारियों ने बताया कि बुधवार की तलाशी में दस्तावेज़ी और डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर विशेष ध्यान दिया गया, जो भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में सहायक हो सकते हैं। जांच एजेंसी कई स्रोतों से साक्ष्य एकत्र कर रही है। कथित तौर पर आरोपी पक्ष ने किसी भी अनियमितता से इनकार किया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके के भीतर और बाहर दोनों तरफ से दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि सेंथिल बालाजी पहले भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच का सामना कर चुके हैं और उन्हें जून 2023 में गिरफ्तार किया गया था। डीवीएसी की यह ताज़ा कार्रवाई उन लंबित मामलों की जांच को नई गति देने का संकेत है जो अब तक विभिन्न चरणों में थे।