पंजाब में 343 मनोवैज्ञानिकों की भर्ती अटकी, अकाली दल ने भगवंत मान सरकार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब सरकार राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चयनित 343 मनोवैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र न देने पर घिर गई है। शिरोमणि अकाली दल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर आरोप लगाया है कि लिखित परीक्षा, दस्तावेज़ सत्यापन और काउंसलिंग सहित सभी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद भी चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए हैं। 9 जुलाई 2025 को चंडीगढ़ में उम्मीदवार अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
18 दिसंबर 2024 को पंजाब सरकार ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए इन 343 पदों पर नियमित भर्ती अचानक रद्द कर दी। उसी दिन स्वास्थ्य विभाग ने सभी डिप्टी कमिश्नरों और सिविल सर्जनों को निर्देश भेजा कि तीन सप्ताह के भीतर 200 मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति एक निजी एजेंसी के माध्यम से संविदा आधार पर की जाए। यह निर्णय उन उम्मीदवारों के लिए बड़ा झटका था जो महीनों से भर्ती प्रक्रिया पूरी कर चुके थे।
न्यायालय का हस्तक्षेप
सरकार के इस फ़ैसले को चुनौती देते हुए चयनित उम्मीदवारों ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक आउटसोर्सिंग के ज़रिए भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसके बाद उच्च न्यायालय ने भी फ़िलहाल आउटसोर्सिंग प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
अकाली दल की माँग
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस मामले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि चयनित उम्मीदवार भर्ती की हर अनिवार्य प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं और सरकार का यह रवैया अन्यायपूर्ण है। चीमा ने माँग की कि सरकार तत्काल भर्ती की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करे और यह आशंका भी दूर करे कि इन पदों को आउटसोर्सिंग के ज़रिए भरा जाएगा।
आम जनता पर असर
यह विवाद केवल रोज़गार का मामला नहीं है — इसका सीधा असर पंजाब की सार्वजनिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत इन पदों का उद्देश्य ज़िला स्तर पर मनोवैज्ञानिक सेवाएँ सुलभ कराना है। पदों के खाली रहने या संविदा आधार पर भरे जाने से सेवा की गुणवत्ता और निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या होगा आगे
मामला अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई तक आउटसोर्सिंग पर रोक बनी रहेगी। चयनित उम्मीदवार चंडीगढ़ में धरना जारी रखे हुए हैं और सरकार से नियुक्ति पत्र जारी करने की माँग कर रहे हैं। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ भगवंत मान सरकार पर जल्द स्पष्टीकरण देने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।